पत्रकारो को शासन प्रशासन का झोला नही उठाना चाहिए: कार्यशाला में पत्रकारो के विचार

शिवपुरी। जनसंपर्ककार्यालय शिवपुरी द्वारा आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में बाहर से आए अतिथि पत्रकारों और स्थानीय वक्ताओं के बीच पत्रकारिता की बारीकियों को लेकर काफी तीखे मतभेद उभरे। मंच पर ही शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव और भोपाल के पत्रकार पवन देवलिया के बीच तीखी झड़प उस समय हुई जब पत्रकार भार्गव अपने विचार व्यक्त करते हुए शासन और प्रशासन के प्रति काफी आक्रामक और निष्ठुर हो गए। 

उन्होंने साफ-साफ कहा कि पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य जनहित है न कि शासन और प्रशासन का झोला उठाना। इसी बात पर श्री देवलिया ने आपत्ति व्यक्त की, लेकिन स्थानीय पत्रकार श्री भार्गव की बातों से सहमत नजर आए। मीडिया कार्यशाला में मध्यप्रदेश यूएनआई के हैड प्रशांत जैन, शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार अशोक कोचेटा और वीरेंद्र वशिष्ठ ने भी अपने विचार रखे जबकि कार्यक्रम की रूपरेखा उपसंचालक जनसंपर्क अनूप भारती ने प्रस्तुत की। 

कार्यक्रम में सबसे पहले यूएनआई के प्रशांत जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारों को नकारात्मक भाव से पत्रकारिता नहीं करना चाहिए, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि खामियों को देखना हम बंद कर दें। निगेटिविटी को भी यदि हम सकारात्मक भाव से देखेंगे तो उसमें समाज सुधार की भावना निहित होगी। उन्होंने पत्रकारों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि उनकी लेखनी में जनहित अवश्य होना चाहिए। ऐसे समाचार पत्र जिससे अशांति, हिंसा और आपसी कलह उत्पन्न होता हो उसे विवेकपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। ताकि समाज में शांति का वातावरण बना रहे। 

पत्रकारों में सीखने की ललक अवश्य होना चाहिए। भोपाल के पवन देवलिया ने अपने उदबोधन में कहा कि पत्रकारों को अपने पेशे को एंजॉय करना चाहिए। न एक दूसरे की बुराई करना चाहिए और न ही बुराई सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आप अच्छा लिखेंगे तो शासन और प्रशासन में आपका सम्मान होगा। पत्रकार प्रमोद भार्गव ने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि आज पत्रकार शासन और प्रशासन के पिछलग्गू होने में अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं। 

जबकि उन्हें शासन और  प्रशासन के गलत कामों को सामने लाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कल पुलिस द्वारा मोबाइल डाउनलोडिंग की दुकानों पर जो छापे मारे गए हैं। उसकी आज प्रासंगिकता क्या है जबकि हर हाथ में आज मोबाइल है जिसमें अशलील से अशलील चीजें सुलभ हैं। इस तरह की छापामारी से न केवल रोजगार छिनता है बल्कि आत्महत्या के लिए भी लोग प्रेरित होते हैं।

पत्रकार भार्गव ने कहा कि मैंने आज तक कभी शासन और प्रशासन की विरदावलि नहीं गाई और हमेशा जनहित से सरोकार रखा है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को मीडिया द्वारा बढ़ावा देने की बात कार्यशाला के एजेंडे में शामिल है तो जल संरक्षण के संदर्भ में सबसे सराहनीय कार्य अन्ना हजारे के ग गांव रालेगांव सिद्धी में हुआ है। 

पत्रकार अशोक कोचेटा ने कहा कि भले ही पत्रकारिता ने नए आयाम छुए हों, लेकिन इसके साथ ही पत्रकारों की गुणवत्ता में भी सुधार आवश्यक है जबकि आज पत्रकारिता के सारे मायने बदल गए हैं। पहले मिशन की पत्रकारिता हुआ करती थी, लेकिन अब पत्रकारिता प्रोफेशन से भी आगे बढक़र ब्लैकमेलिंग तक पहुंच गई है। यह स्थिति अत्यंत चिंता का विषय है। पत्रकार वीरेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि तकनीक आने से पत्रकारिता त्वरित हुई है। 

पत्रकारों का हुआ सम्मान 
मीडिया संवाद कार्यक्रम में पत्रकार प्रशांत जैन, प्रवीण देवलिया, प्रमोद भार्गव, अशोक कोचेटा और वीरेंद्र वशिष्ठ का उपसंचालक अनूप सिंह भारती द्वारा शाल, श्रीफल एवं पुष्पाहारों से सम्मान किया गया
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