पुरात्तव की कैद से बहार नरवर किला, पर्यटन विभाग में शामिल, बनेगा शानदार होटल

शिवपुरी। भारत के नक् शे में राजस्थान के चित्तौडगढ़ के बाद आकार में दूसरे स्थान पर आने वाले नरवर का किला पुरात्तव विभाग की कैद से बहार आ गया है। बताया जा रहा है अब इस ऐताहासिक किले की देखरेख अब पर्यटन विभाग करेगा। पर्यटन विभाग इस होटल पर एक शानदार होटल के आलावा कई डबलव मेंट की योजना तैयार कर रहा है। जानकारी मिल रही है कि  किले का मेंटेनेंस, सडक़, पानी का इंतजाम पर्यटन विभाग को करना होगा। इसके आदेश पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव हरिरंजन राव ने हाल ही में जारी कर दिए हैं। इसके अलावा इस किले पर एक होटल बनाया जाएगा। इसका संचालक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत बनाया जाएगा। 

मालूम हो कि मई 2017 में प्रमुख सचिव ने नरवर किले का दौरा कर इसे हैरीटेज स्थल के रुप में विकसित करने की मंशा जताई थी। इसके बाद से इस किले को पुरातत्व विभाग के स्वामित्व से लेकर पर्यटन विभाग को देने की प्रक्रिया चल रही थी। 

8 वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुए नरवर के किले की सबसे ऊपर चोटी पर बने 8 कुआं और 9 बावड़ी की संरचना आज भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नरवर टाउन से 399 फीट की ऊंचाई पर बनी इन जल संरचनाओं का निर्माण शत्रुकाल के समय में शत्रुसेना से घिरने की स्थिति में पानी की समस्या को हल करने के लिए किया गया था। यहां औरंगजेब, तोमरों, राजाओं के साथ सिंधिया रियासत के पदचिन्ह मौजूद हैं। 

यहां 1600 सौ पनिहारिन एक साथ पानी भरती थीं। 390 वर्गफीट में इस जल संरचना का विस्तार है और 30 फअीट गहरे इस तालाब में घाट हैं। नीचे उतरने के लिए यहां सीढियां भी बनी हैं। अब इस किले का जीर्णोद्धार चल रहा है और यहां 2 करोड रुपए खर्च किए जा रहे हैं। 

कई राजाओं की राजधानी रहा है यह किला 

राजस्थान के चित्तौडगढ़ के बाद आकार में दूसरे स्थान पर आने वाले नरवर का किला 8 किमी लंबा और लगभग 6 किमी की चौड़ाई में फैला है। इस किले पर सर्वप्रथम राजा प्रथु एवं उनके बाद उनके पुत्र राजा नल का राज्य रहा। पुरातत्व अभिलेखों में राजा मान सिंह तोमर एवं इस किले पर मुगल शासकों ने भी राज्य किया है। मुगलों के बाद सिंधिया राजवंश के राज्य का अभिलेख भी पुरातत्व विभाग में है। 

किले पर स्थित हैं कई ऐतिहासिक स्मारक इनका होगा प्रचार-प्रसार 

नरवर किले पर यूं तो कई स्मारक और प्राचीन महल स्थित हैं, लेकिन इनमें से देखने लायक फुलवा महल, आल्हाऊदल का अखाड़ा, छीप महल,आठ कुआं, नौ बावड़ी सोलह सौ पनिहार, गौमुख, प्रदेश की पहली चर्च, पसर देवी माता मंदिर, कचहरी महल, हवा पौर, ताल कटोरा, मीना बाजार आदि सहित कई ऐतिहासिक धरोहर एवं स्मारक स्थित हैंए जिन्हें पुरातत्व विभाग द्वारा संवारा गया था। 

किला संवारने 2 करोड रुपए होंगे खर्च 

नरवर किले को पर्यटन विभाग में शामिल किए जाने से और अधिक संवारा व सजाया जा सकेगा। सदियों पुरानी ऐतिहासिक गाथाओं को संजोए नरवर का किला अब पर्यटन विभाग द्वारा सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसके बाद इसे विकसित और संरक्षित किया जाएगा। पुरातत्व विभाग ने अभी किले के स्वरुप को सुंदर बनाने के लिए 2 करोड रुपए यहां खर्च किए हैं। 

कुल मिलाकर अब यह धरोहर पर्यटन विभाग के हाथ में आ जाने से इसका प्रचार-प्रसार किया जाऐगा। नरवर क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावना है। भारत के नक्श में पर्यटन नगरी के रूप में पहचाने वाला जिला टूरिस्टो के लिए तरसता रहता है,लेकिन अगर पर्यटन विभाग ने योजना अनुसार काम किया तो आगे चलकर नरवर के किले के कारण इस जिले को अपार टूरिस्ट मिलने की संभवना है। 
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