विनयशील व्यक्ति तर्क में नहीं समर्पण में जीता है: मुनि श्री अजितसागर

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शिवपुरी। तर्क और श्रद्धा दोनों एक साथ नहीं रह सकते, तर्क में जहाँ बुद्धि का प्रयोग होता है, जो धीरे-धीरे शंका में परिवर्तित हो जाती है। वहीं जहां समर्पण और श्रद्धा होती है वहाँ निरंतर विनय गुण आता है और विनय से कभी शंका उत्पन्न नहीं होती। हम सभी को अपना जीवन हमेशा श्रद्धा, सर्मपण और विवेक के साथ जीना चाहिए। जो विनयशील होते हैं वह अपना जीवन तर्क में नहीं समर्पण में जीते हैं। उक्त मंगल प्रवचन पूज्य मुनि श्री अजितसागर जी महाराज ने अतिशय क्षेत्र श्री सेसई में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन दिये। उल्लेखनिय है कि शिवपुरी के वचनलाल, देवेंद्रकुमार जैन, जितेन्द्रकुमार जैन (पत्तेवाले) परिवार के पुण्र्याजन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन जैन समाज के सैंकड़ों लोग सिद्धों की आराधना कर रहे हैं। यह विधान 1 अक्टूबर तक चलेगा। 

मुनिश्री ने आगे कहा कि संसार में तीन प्रकार की दृष्टि होती हैं। शास्त्र दृष्टि, गुरु दृष्टि और अनुभव दृष्टि। शास्त्र दृष्टि हमें हेय-उपादेय की तरफ ले जाती है। हमारे शास्त्र ऋषि-मुनि और संत-संयमी द्वारा लिखे जाते हैं, जो हमें अच्छे-बुरे का ज्ञान कराते हैं, और निरंतर सद्मार्गों में आगे बढऩे की प्रेरणा देते हैं। गुरु हमेंशा दु:ख के मार्ग से बचाकर सुख का मार्ग बताते हैं। 

इसी प्रकार एक दृष्टि अनुभव की होती है, जो बुजुर्गों के पास होती है। बुजुर्गों की सलाह से किया गया कार्य सदैव निर्विध्न संपन्न होता है। जब बुजुर्गों का होश और युवाओं का जोश दोनों मिल जाते हैं, तो बड़े से बड़ा कार्य भी निर्विरोध-निर्विध्न संपन्न होते हैं। आज लोग दूसरों का अनुकरण तो करना चाहते हैं, परंतु ज्यादा जोश में अपना होश खो बैठते हैं। जो ज्यादा खतरनाक होता है। याद रखना नकल में भी अक्ल की जरूरत होती है। 

ऐलक श्री विवेकानंदसागर जी ने कहा कि बहुत सारे चोर हैं, जिनमें कामचोर भी होते है। जो पुरूर्षाथ से जी चुराता है, वह अस्वस्थ और दुर्गति के पात्र हैं। हमें कभी भी बिना मेहनत की कोई वस्तु प्राप्त करने की कोशिश नहीं करना चाहिए। कामचोर व्यक्ति को संसार में कोई भी पसंद नहीं करता है। संसार में परिग्रह ही दु:ख का कारण कहा गया है। परिग्रही कभी सुखी नहीं रहते, पर निस्पृही सदा सुखी ही रहते हैं। अत: परिग्रह त्याग से ही सुख का रास्ता जाता है।
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