सतेन्द्र उपाध्याय/शिवपुरी। एक ओर जहां शिक्षा विभाग की ढुलमुल व्यवस्थाओं से शिक्षा का स्तर नहीं सुधर रहा है तो वहीं दूसरी ओर कई जगह हालात यह है कि एक ही विद्यालय में क्षमता से कहीं अधिक शिक्षक पदस्थ कर दिए गए है। ताजा मामला शा.प्रा.विद्यालय मुढ़ैनी का है जहां वर्तमान में 85 विद्यार्थी अध्ययनरत है और इन विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त संख्या में तीन शिक्षक अरविन्द श्रीवास्तव, मीना शर्मा और दुर्गा वर्मा यहां कार्यरत भी हैं। बाबजूद इसके इस विद्यालय में जबरन अतिरिक्त स्टाफ की मांग करते हुए दो शिक्षकों को युक्तियुक्त करण के तहत पदस्थ करवा लिया गया है। इनमें युक्तियुक्त करण के तहत अनुसईया शर्मा और विजया वर्मा को भी यहां पदस्थ कर दिया गया है।
बताना होगा कि यह शा.प्रा.विद्यालय शहर से ही करीब 10 किमी दूरी पर ही है। शहर से जुड़ा होने के कारण कई शिक्षक यहां अपनी पदस्थी की जुगाड़ कर रहे थे और इसी जुगाड़ के कारण अब यहां कई शिक्षक पदस्थ हो गए है। ऐसे में कक्षाओं का नियमित रूप से शिक्षकों द्वारा लिया जाना भी संभव नहीं है। बाबजूद इसके शिक्षक यहां अपनी पदस्थी कराकर शिक्षा विभाग के ही नियम निर्देशों को आईना दिखा रहे है।
ऐसे में शिक्षा के मानदण्डों के अनुरूप नियमों को धता बताकर मुढ़ैनी विद्यालय में जबरन ही क्षमता से कहीं अधिक शिक्षक पदस्थ हो गए है। शिक्षकों में आपसी सांठगांठ और अलाली का यह परिणाम देखने को मिल रहा है। मुढ़ैनी के इस विद्यालय में जहां जब अधिक संख्या में शिक्षक पदस्थ हैं और उतने छात्र भी नहीं है। कई विद्यालय तो ऐसे है जहां एक ही शिक्षक करीब 30 से 40 बच्चों को पढ़ाने को मजबूर है। तो वहीं मुढ़ैनी में बढ़े हुए स्टाफ को लेकर ना केवल स्थानीय आमजन बल्कि शिक्षा विभाग में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि युक्तिकरण के नाम पर यह कारनामा किया गया है। इस युक्तिकरण में लेने देने की युक्ति की खबरे आ रही है। इसी युक्ति के कारण ही शिक्षा का माखौल उड़ाने में किस तरह विभाग अपनी मनमानी कर रहा है और किस प्रकार से शिक्षक अपनी सांठगांठ कर पदस्थी करवा रहे है। इसका खुला प्रमाण यह मुढ़ैनी का विद्यालय है। जिसमें आए दिन बच्चों को अध्यापन कार्य कराने के अतिरिक्त शिक्षक यहां कार्यरत बने हुए है।
इनका कहना है
सिर्फ 85 बच्चे दर्ज है। ऐसा हो नहीं सकता है फिर भी आप कह रहे हैं तो हम दिखवाते है, युक्तिकरण में अगर कोई नाम आ गया है तो जरूरी नहीं है कि वह उस जगह पदस्थ किए जाऐं। अगर वहां जगह खाली नहीं है तो उनको रिलीव नहीं किया जाएगा। इसकी जांच की जा रही है।
शिरोमणि दुबे, डीपीसी, शिवपुरी

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