
नगर पंचायत के गठन के बाद भाई भतीजा बाद को अपनाते हुए नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियों की यदि निष्पक्ष रूप से जांच की जाए तो मामले का खुलासा सबके सामने होगा।
ज्ञात हो कि ग्राम पंचायत बैराड़ को नगर पंचायत का दर्जा मिलने के पश्चात नगर परिषद ने कर्मचारियों की भर्ती करते समय सारे नियमों को ताक पर रखते हुए उस समय के पदस्थत नगर पंचायत अधिकारी एवं अध्यक्ष ने भाई भतीजे एवं रिश्तेदारों की भर्ती कर नौकरियां दे दी गई थी।
ग्राम पंचायत सचिवों ने फर्जी ठहराव प्रस्ताव के आधार पर नगर पंचायत में नौकरियां रेवड़ी की तरह बांट दी गई। लोगों का कहना है कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले उक्त कर्मचारी कार्य नहीं कर रहे जिसके कारण नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायत के गठन को अभी दो वर्ष भी नहीं हुए की कर्मचारी अपनी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए हैं।