निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को लेकर हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में मांगा जबाब

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शिवपुरी। आखिरकार माननीय हाईकोर्ट की युगलपीठ ने निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तक चलाने को लकर राज्य शासन व एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जबाब मांगा है। 

यह सुनवाई वरिष्ठ अभिभाषक एड.पीयूष शर्मा द्वारा जनहित में निजी स्कूल संचालकों की मनमानी को लेकर लगाई गई है जिसमें मांग की है कि सभी निजी स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम संचालित किया जावे लेकिन जब पालक संघ के धरना प्रदर्शन और अन्य विरोधों पर के बाद भी निजी विद्यालयों ने अपनी मनमानी नहीं रोकी तब जनहित में माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष एड.पीयूष शर्मा ने अपने अभिभाषक विवेक जैन के माध्यम से यह याचिका लगाई। 

इस पीआईएल की सुनवाई माननीय उच्च न्यायालय ने की और एनसीईआरटी व राज्य शासन से चार सप्ताह के भीतर नोटिस जारी कर इस मामले में जबाब मांगा है। 

याचिका में दलील है कि निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के मटेरियल की जांच के लिए कोई कमेटी नहीं है ना यह देखा जा रहा है कि किताब बच्चों के लायक हैं या नहीं, लेकिन निजी स्कूल संचालक प्रतिस्पर्धा के चलते जबरन निजी प्रकाशकों की पुस्तकें चलाना अनिवार्य किए हुए है। यह मामला अब माननीय उच्च न्यायालय पहुंच गया है और जनहित में यह इस फैसले के आने की संभावना है। 

इस तरह रोका जाए शोषण
एड.पीयूष शर्मा ने बताया कि यह याचिका निजी विद्यालयों के द्वारा अभिभावकों व बच्चों के होने वाले शोषण को रोकगी। जिसमें प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों के द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकों में शिक्षा के स्तर के व्यवस्थापन में नकारापन से पीडि़त होकर यह याचिका प्रस्तुत की गई है। 

याचिका में निजी विद्यालयों में संचालित पाठ्यक्रम को ना चलाया जाए, उनके स्थान पर एनसीईआरटी एवं एससीईआरटी की पुस्तकें ही चलाई जावे। निजी विद्यालयों के प्रकाशकों द्वारा चलाई जा रही किताबों पर स्टेट ऑथारिटी का कोई नियमात्मक नियंत्रण नहीं है जैसा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 29 के अनुसार रेस्पोडेन्ट क्रं.3 एससीईआरट का विधिक दायित्व है कि क्या ये किताबों में छपी सामग्री एससीईआरटी के बताए गए मापदण्डों पर खरी है। 

इसके अलावा निजी स्कूलों की किताबें घटिया व स्तरहीन होने पर उसे ठीक करने या उसका पता लगाने का कोई नियामक ढांचा नहीं है। श्री शर्मा ने बताया कि निजी विद्यालयों आपसी प्रतिस्पर्धा में कठिन से कठिनतम पाठ्य पुस्तकें चलाकर बच्चों की उम्र एवं स्तर की तुलना में कहीं अधिक कठिन कोर्स पढ़ाया जा रहा है जिसे अविलंब रोका जाना चाहिए। 

इस स्थान पर आरटीई एक्ट की धारा 29 कहती है कि प्राथमिक कक्षाओं का सिलेबस बच्चों को सीखने की क्षमता के अनुसार ही होना चाहिए और यह इस कानून के तहत बनी शैक्षणिक अधिकारिता के द्वारा स्वीकृत होना चाहिए। इसके साथ ही निजी विद्यालयों में आर.टी.ई.एक्ट 2009 का भी पालन नहीं किया जा रहा है जिससे कई बच्चे आज भी शिक्षा से वंचित है। 

इस आधार पर आप पार्टी मांग करती है कि निजी विद्यालय संचालक और प्रकाशकों को अच्छी क्वालिटी की एजुकेशन देने हेतु बाध्य किया जाए और मनमानी करने की दशा में उन्हें हतोत्साहित व दण्डित किया जावे। 

सरकार को इस मामले में स त कदम उठाने चाहिए जेसा कि आरटीई की धारा 29 में निहित किया गया है नियंत्रण करने हेतु अधिकारिता को अस्तित्व में लाया जाकर हमारी पीड़ा का उपचार प्रदेश एवं केन्द्र सरकार से कराया जावे। 
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