भोपाल। शिवपुरी में व्याप्त जलसंकट अब जगमोहन सिंह की लापरवाही की देन कहा जा सकता है। यदि 2005-06 में तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष जगमोहन सिंह सीएमओ रामनिवास रावत की बातों में ना आते और नेशनल पार्क में लाइन बिछाने का प्रस्ताव एंपावर्ड कमेटी को भेजने से पहले फील्ड निरीक्षण कर लेते तो आज शिवपुरी सिंध के पानी से लबालब होती।
नगरीय प्रशासन विभाग, भोपाल में मौजूद दस्तावेज बोलते हैं कि शिवपुरी शहर में मड़ीखेड़ा से पानी लाने के लिए वर्ष 2005-06 में 64 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर हुआ इसके तहत माधव नेशनल पार्क के बीच से 11 किमी की पाइपलाइन बिछाई जानी थी। वर्ष 2007 में तत्कालीन नपा सीएमओ रामनिवास शर्मा और तत्कालीन नपाध्यक्ष जगमोहन सेंगर ने मौके पर जाए बगैर ले आउट तैयार कर लिया। पार्क के बीच से 11 किमी की लाइन बिछाने के लिए अनुमति का प्रस्ताव भी एंपावर्ड कमेटी को भेज दिया। चार साल बाद वर्ष 2011 में एंपावर्ड कमेटी ने पाइपलाइन बिछाने की मंजूरी दी। मंजूरी मिलने पर जैसे ही दोशियान कंपनी ने पार्क में काम शुरू किया तो पार्क प्रबंधन ने यह कहते हुए काम रुकवा दिया कि आपको पार्क के बीच से पाइपलाइन बिछाने की अनुमति मिली है, न कि इस रास्ते में आने वाले पेड़ काटने की। बस काम रुक गया। यदि शुरूआत में सही डीपीआर बन गई होती तो लाइन बिछाने के साथ साथ पेड़ काटने की अनुमति भी प्राप्त हो चुकी होती और शिवपुरी जलसंकट से मुक्त होती।
अब यह शोध का विषय है कि गांव गांव जाकर सुंदरकांड का पाठ करने वाले जगमोहन सिंह सेंगर से यह लापरवाही भूलवश हो गई या जलमाफिया मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए उन्होंने यह जानबूझकर किया।