वीरेन्द्र रघुवंशी का क्लोन तलाशने में जुटी कांग्रेस

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शिवपुरी। लगातार पिछले तीन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे वीरेन्द्र के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र के लिए किसी आक्रामक चेहरे की जोरशोर से तलाश कर रही है। लेकिन कांग्रेस के पास जो पूंजी पसारा है उसके हिसाब से अभी तक उसे निराशा हांसिल हुई है। 

दमदार चेहरे की तलाश में कांग्रेस अपने दो नगर अध्यक्षों को बदल चुकी है और इस समय कोलारस के पूर्व मंडी अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिनिधि हरवीर सिंह रघुवंशी पर दाव लगा रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हरवीर में वीरेन्द्र रघुवंशी जैसी आक्रामकता, तेवर और जूझारूपन का तत्व विद्यमान है? इसके अलावा नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ लढ़ा, अजय गुप्ता पर भी नजरें केन्द्रित हैं। 

लेकिन उनके चरित्र में भी आक्रामकता की खोज अभी होना है। कांग्रेस में एक लॉवी कोलारस नगर पंचायत के अध्यक्ष रविन्द्र शिवहरे को भी विकल्प के रूप में देख रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या रविन्द्र शिवहरे कोलारस को छोड़कर शिवपुरी आने को उत्सुक होंगे? 

शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से सन् 2007 से 2013 तक तीनोंबार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े वीरेन्द्र रघुवंशी ने एक मुकाबले में जीत हांसिल की, लेकिन दो मुकाबलों में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा, परन्तु इसके बाद भी उन्होंने अपनी मजबूत चुनौती का लोहा सभी से मनवा लिया। 

2007 में तो वीरेन्द्र काफी प्रतिकूल परिस्थिति में चुनाव जीते थे और 2008 तथा 2013 में वह हार अवश्य गए थे, लेकिन उनकी हार का अंतर अवश्य स मान जनक रहा। परन्तु 2013 में पराजय के पश्चात वीरेन्द्र रघुवंशी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। 

इससे शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की चुनौती काफी कमजोर हो गई। क्योंकि शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में हालांकि कांग्रेस में नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन या तो किसी की धार खो चुकी है या कोई स्वयं शिवपुरी में उत्सुक नहीं है और जो उत्सुक भी है उनमें वह तेवर नहीं है जिससे शासन और प्रशासन को नतमस्तक किया जा सके। 

एक जमाने में शिवपुरी में गणेश गौतम मजबूत कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पहचान रखते थे, लेकिन लगातार दल बदलने और लगातार हार से उनकी स्थिति कमजोर हुई है। हालांकि वह भाजपा और जनशक्ति पार्टी छोड़कर पुन: कांग्रेस में आ गए हैं, लेकिन अब वह बढ़ती उम्र के कारण स्वयं ही उत्सुक नहीं दिखते। 

सन् 1998 के चुनाव में पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला ने मजबूत चुनौती पेश की थी और वह भाजपा की सबसे मजबूत प्रत्याशी यशोधरा राजे सिंधिया से महज 7 हजार मतों से ही चुनाव में पराजित हुए थे, लेकिन उसके बाद से हरिवल्लभ ने शिवपुरी से कोई नाता नहीं रखा और वह अपनी पुरानी कर्म स्थली पोहरी में ही व्यस्त रहे। 

अब भी वह पोहरी से चुनाव लडऩे के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं। वीरेन्द्र के बाद कांग्रेस ने संगठन में फेरबदल किया। इसी तारत य में नगर अध्यक्ष राकेश गुप्ता को हटाकर उनके स्थान पर जिलाध्यक्ष रामसिंह यादव ने अपने चहेते राकेश जैन को नगर अध्यक्ष बनाया। 

यह भी एक तरह से शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की चेहरे की खोज का एक अंग था। लेकिन श्री जैन भी इस कसौटी पर खरे नहीं उतर पाये और उन पर उल्टे निष्क्रियता का तथा जिला संगठन से आमने सामने टकराहट का आरोप लगा। इसी कारण श्री जैन के स्थान पर सिद्धार्थ लढ़ा को नगर अध्यक्ष बनाया गया है। श्री लढ़ा मिलनसार और सामाजिक छवि के हैं। लेकिन कांग्रेस को तो उस एक्स फेक्टर की तलाश है। 

जिससे वह भाजपा की चुनौती को ध्वस्त करने की दमदार चुनौती पेश कर सके। सांसद प्रतिनिधि हरवीर सिंह रघुवंशी को भी कांग्रेस आला कमान द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। इसीक्रम में उन्हें लाईफ लाईन एक्सप्रेस का प्रभारी बनाया गया है। श्री रघुवंशी में क्षमतायें कम नहीं है। उनके पास ज्ञान का अपार भण्डार हैं, लेकिन उस एक्सफेक्टर की उनमें खोज कांग्रेस की जारी है। 
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