प्रशासन के नुमाइंदो ने नेग लेकर, लम्बे-लम्बे घूघट करवाकर करवाए बाल विवाह!

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। अक्षय तृतीया का शुभ दिन या यू कह लो की विवाह का दिन, इस दिन सबसे ज्यादा विवाह स मेलन होते है। आज जिले में दर्जन भर विवाह स मलेन आयोजित किए गए थे,और खबर ये भी आ रही है कि कलेक्टर शिुवपरी के लाख प्रयास के बाद भी इन स मेलनो में बाल विवाह भी संपन्न हुए।

आपको विदित होगा कि आज से 3 दिन पूर्व शिवपुरी में रहने वाली एक बडी बहन ने अपनी नाबालिग छोटी बहन की शादी रूकवाने के लिए प्रशासन ने से गुहार लगाई थी इसकी छोटी बहन  पिछोर के रूपपुुरा गांव में रहती है और इसका पंजीयन सिरसौद में स पन्न हुए मु यमंत्री कन्यादान योजना के विवाह पंजीयन 42 वे क्रमांक पर था। हालाकि समय पर जानकारी हो जाने के कारण ये विवाह नही हो सका परन्तु जब सरकारी स मेलन में इस विवाह का पंजीयन हो गया तो अन्य समाज के स मेलनो में क्या नही हुआ होगा

जानकारी के अनुसार जिले के पोहरी, करैरा, पिछोर, शिवपुरी और नरवर आदि क्षेत्रों में आज विभिन्न समाजों के सामूहिक विवाह स मेलन में हुए। जिनमें बताया गया है कि अधिकांशत: कई मासूम नाबालिग बालक-बालिकाओ के भी विवाह संपन्न कराए गए। सूत्रों की खबर है कि पोहरी में चार, सेसई में एक और खतौरा में भी दो नाबालिगों के विवाह कराए गए है।

विवाह समिति ने अपने जो ब्यौरे दिए है उसमें बालक-बालिकाओं के मेडिकल रिपोर्ट को का सही पाया जाना है जिसे देखते हुए यह विवाह संपन्न हुए। वहीं कई जगह उम्रदराज दूल्हों के भी सात फेरे इन विवाह समारोह में हो गए। बताया जाता है कि आदर्श ग्राम सिरसौद के चक्क में कई उम्र दराज व नाबालिग बालिकाओं के विवाह संपन्न कराए गए जिसके बारे में जब वहां के आयोजकों से मीडिया ने जानकारी लेना चाही तो आयोजकों ने दूरी बना ली।

जिसे देखते हुए ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी नाबालिग बालिकाओं के विवाह संपन्न कराए गए। हालांकि इसके लिए प्रशासन ने टीम तैयार की थी लेकिन यह टीम दूर-दराज के क्षेत्रों में नजर नहीं आई। बताया गया है कि नाबालिगो को मिडिया से दूर रखा और घूघट की आड में हो गई नाबालिगे विदा......................

नाबालिग विवाह कराने के मामले में पंडित,टेंटबाला,बर्तन वाला,रसोईया और लडकी या लडके के माता पिता स ोलन है तो आयोजक तक पर भी एफआईआर करने के आदेश कानून में है परन्तु आज दर्जनो विवाह नाबालिग विवाह मेडिकल टेस्ट के आधार पर हो गए।

3 दिन पुराने मामले में लडकी के अध्यापक ने मिडिया को बयान दिया था कि लडकी शाला मे अध्यन्नरत है और परिवार वालो ने इस लडकी को अनपढ बताकर मेडिकल टेस्ट करने वाले डॉक्टर को नेक देकर फर्जी प्रमाण पत्र हासिल कर लिया और इस मेडिकल प्रमाण पत्र पर सरकारी स मेलन में पंजीयन हो गया इससे यह सिद्व हुआ की प्रशासन के नुमाइंदो ने नेक लिया और फर्जी काम करा।

अगर कलेक्टर शिवुपरी इस मामले में मेडिकल बनाने और माता-पिता पर एफआईआर करा देते तो कुछ नाबालिगों के विवाह आज रूक सकते थे परन्तु साहब ने तो टीएल की बैठक में आदेश देता एक सरकारी पत्रकार से प्रेस नोट भिजवा दिया कि किसी भी हाल में ना हो पाए नाबालिग विवाह......................
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