जिपं चुनाव: सिंह-सिंधिया एक साथ, भाजपा में गुटबाजी

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शिवपुरी। जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव 12 मार्च को होने जा रहा है। यह मुकाबला काफी दिलचस्प रहने के आसार इसलिए हैं, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा दोनों दल संख्या बल की दृष्टि से लगभग बराबर हैं, लेकिन दोनों दलों की परेशानी का कारण गुटबाजी है।

ऐसी स्थिति में कांगे्रस के दोनों गुटों सिंधिया और दिग्गी खेमे के बीच बन रही एकजुटता भाजपा के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है जबकि भाजपा में यशोधरा राजे और नरेन्द्र सिंह खेमे के बीच अंतर्विरोध काफी गहरे हैं जिससे प्रत्याशी चयन में आम सहमति नहीं बन पा रही है।

जिला पंचायत चुनाव में सन् 2005 के चुनाव को यदि छोड़ दिया जाए तो विधायक केपी सिंह किंगमेकर की भूमिका निभाते रहे हैं। 2005 के अध्यक्षीय चुनाव में अवश्य सिंधिया खेमे के वीरेन्द्र रघुवंशी ने मनी पॉवर के बलबूते उन्हें मात देने में सफलता प्राप्त की थी और जूली आदिवासी को वह अध्यक्ष बनवा ले गए थे जबकि केपी सिंह खेमे के जगना आदिवासी को पराजय का सामना करना पड़ा था।

लेकिन 2005 में जूली आदिवासी को अध्यक्ष बनवाने वाले पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी 2010 के चुनाव में अपनी पत्नी विभा रघुवंशी को जिता नहीं पाए थे। उस चुनाव में जीत भाजपा के जितेन्द्र जैन गोटू की हुई थी, लेकिन 2005 के चुनाव की कसक के कारण केपी सिंह ने वीरेन्द्र रघुवंशी के समर्थन से अपने हाथ पीछे खींच लिए थे।

इस चुनाव में भी एक तरह से केपी सिंह किंगमेकर की भूमिका में है। सूत्र बताते हैं कि जिला पंचायत के चुने गए 23 सदस्यों में से कम से कम 5 सदस्य केपी सिंह के प्रति निष्ठावान है। उनके समर्थक सदस्यों में दिनेश परिहार, योगेन्द्र रघुवंशी, भारती लोधी, ललिता जाटव आदि के नाम लिए जा सकते हैं।

योगेन्द्र रघुवंशी तो मुखर रूप से कहते हैं कि वह कक्काजू के आदेश का पालन करेंगे। कांग्रेस की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए प्रदेश कांग्रेस महामंत्री बैजनाथ सिंह यादव की धर्मपत्नी श्रीमती कमला देवी यादव का नाम लिया जा रहा है।

धनबल में संपन्नता उनकी उ मीद्वारी की सबसे बड़ी ताकत है। बैजनाथ सिंह यादव और केपी सिंह के बीच समन्वय भी अच्छा माना जा रहा है। कांग्रेस की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कोलारस नगर पंचायत अध्यक्ष रविन्द्र शिवहरे और सांसद प्रतिनिधि हरवीर सिंह रघुवंशी भी दोनों के बीच समन्वय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि इसी कारण कांग्रेस के ोमों में तालमेल के आसार बन रहे हैं। इस तालमेल के अनुसार अध्यक्ष पद पर कमला यादव और उपाध्यक्ष पद पर योगेन्द्र रघुवंशी बंटी की उ मीद्वारी उभर सकती है।

इस समन्वय के बनने पर कांग्रेस को जीत का सफर तय करने के लिए कम से कम तीन सदस्यों की आवश्यकता होगी और कांग्रेस के नजदीकी सूत्र बताते हैं कि इस आंकड़े को जुटाने में पार्टी को कोई दिक्कत नहीं होगी।

जबकि दूसरी ओर भाजपा में विभिन्न गुटों के बीच तालमेल बनना बांकी है। भाजपा में मु य रूप से रामस्वरूप रावत की माँ या धर्मपत्नी अथवा मिथलेश बघेल में से किसी एक के पक्ष में फैसला हो सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में तीन लोधी मतों के बिखराव का खतरा भी है और भाजपा के खेमों में तालमेल बन पाएगा यह भी एक बड़ा सवाल है।

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