इन तीन कैसो पर ही क्यों रूक गई प्रशासन की गाडी, हजारो है ऐसे कैस

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। पिछले एक सप्ताह में प्रशासन द्वारा तीन बड़ी कार्यवाहियां की गई हैं परन्तु इन तीन पर ही प्रशासन की गाडी क्यो रूक गई ऐसे तलघर और अतिक्रमण और जमीनो ही हेराफैरी के हजारो के कैस पेडिंग है।

पहले पढ़िए क्या किया:—
एक मुख्य नगरपालिका अधिकारी कमलेश शर्मा ने अवैधानिक तलघर के निर्माणकर्ता महेन्द्र गोयल पर पौने सात करोड़ रूपये जुर्माना अधिरूपित किया है।

दूसरे इंडस्ट्रीयल एरिया में राजनैतिक बल संपन्न अतिक्रमणकर्ताओं के अतिक्रमण हटाये गये और तीसरे डायवर्टेड जमीन के रकबे से अधिक जमीन डायवर्टेड बताकर विक्रय करने वाले कॉलोनाइजर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

इन तीन बड़ी कार्यवाहियों से निश्चित तौर पर हड़कंप मचा है। इससे प्रशासन की ताकत जहां उजागर हुई है वहीं उसकी अक्षमता भी कहीं न कहीं परिलक्षित हो रही है।

क्योंकि अवैधानिक कार्यों को अंजाम देने वालों की गिनती भी मुश्किल है। सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में क्या एक अवैध तलघर निर्माणकर्ता के खिलाफ कार्यवाही पर्याप्त है? अतिक्रामकों के खिलाफ कार्यवाही सीमित क्यों हैं? तीसरा सवाल यह है कि जमीन के नाम पर हेराफेरी करने वाला गिरफ्तार कॉलोनाइजर अकेला नाम है। जबाव निश्चिततौर पर नकारात्मक है और इससे ही प्रशासन की विफलता उजागर हो रही है।

शिवपुरी में लंबे समय से प्रशासन सुस्त और निष्क्रिय पड़ा हुआ है। कारण क्या है? इसके बारे में अलग-अलग अनुमान हैं। भ्रष्टाचार को प्रशासन की शिथिलता से जोड़कर देखा जाता है। अवैधानिक काम इसलिए भी होते हैं क्योंकि वैधानिक काम में तमाम तरह की दिक्कत प्रशासनिक मशीनरी के द्वारा खड़ी कर दी जाती हैं।

शिवपुरी में एक अवैध तलघर निर्माणकर्ता के खिलाफ नगरपालिका ने कार्यवाही की, लेकिन वास्तविकता यह है कि आधा सैंकड़ा से अधिक अवैध तलघर शिवपुरी में बने हुए हैं जिनके मालिकों के पास या तो तलघर निर्माण की अनुमति नहीं है या फिर आवासीय उपयोग के तलघरो का व्यवसायिक उपयोग गैरकानूनी ढंग से किया जा रहा है।

नगरपालिका स्पष्ट करेगी कि शेष अवैध तलघर निर्माणकर्ताओं के प्रति वह क्यों उदार है? शहर में हजारों की संख्या में मकान बिना अनुमति के बने हुए हैं। कारण सिर्फ यह है कि आसानी से निर्माण शुल्क जमा करने के बाद भी अनुमति नहीं मिलती है।

आसानी से नामांतरण नहीं होते। कानून का पालन कराना नगरपालिका का उत्तरदायित्व है, लेकिन इस जि मेदारी को कभी नपा प्रशासन ने महसूस नहीं किया। इंडस्ट्रीयल एरिया से कुछ लोगों के अतिक्रमण हटाये गये, लेकिन पूर्व विधायक माखनलाल राठौर कहते हैं कि तमाम तरह के गैरकानूनी कार्य इंडस्ट्रीयल एरिया में हो रहे हैं। लीज की जमीन पर भवन खड़े कर उन्हें किराया पर उठाया गया है।

गोदाम बनाये गये हैं, लेकिन कार्यवाही हम पर ही होती है? ठीक इसी तरह का मामला कॉलोनाइजर संजय चतुर्वेदी की गिर तारी का है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पांच हजार वर्गफीट जमीन का डायवर्सन कराया और उससे कहीं अधिक जमीन डायवर्टेड बताकर विक्रय कर दी, लेकिन ऐसा करने वाले लोगों की सं या सिर्फ चतुर्वेदी तक सीमित नहीं है।

अब समय आ गया है कि प्रशासन को अपनी निष्पक्षता और दृढ़ता का परिचय देना होगा। प्रशासन के प्रति जनता में भय भी होना लाजमी है ताकि अवैध कार्यों को अंजाम देने में सौ बार सोचा जाये।

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