शिवपुरी। कहा जाता है यदि इंसान किसी मुकाम को हासिल करने के लिए दृण निश्चय कर ले तो कुछ भी असंभव नहीं है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया शिवपुरी के नरेन्द्र नगर में रहने वाले संतोष शर्मा ने जो एक दशक से एसएएफ की १८ वीं बटालियन में आरक्षक के पद पर पदस्थ था।
लेकिन जज्बा अधिकारी बनने का था। संतोष ने जी तोड़ मेहनत की और बीते रोज घोषित हुए सब इंस्पेक्टर परीक्षा परिणाम में वे सूबेदार के पद पर चयनित हो गए। खासबात यह है कि ३५ वर्षीय संतोष के लिए यह आखिरी अवसर था। संतोष सेवानिवृत एएसएलआर महेश शर्मा काका के पुत्र व प्रधानध्यापक हरिशरण शर्मा के अनुज है। उनकी इस कामयाबी पर १८ वीं बटालियन के अधिकारियों व स्टॉफ सहित शुभचिंतक प्रफूल्लित है।
इंजीनियरिंग छोड़ बन गया प्लाटून कमांडर
इंजीनियर की डिग्री हासिल करने के बावजूद 25 वर्षीय भुवनेश गौतम को लगा कि वह पुलिस सेवा के जरिए समाज को अपराध मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। और इसी इच्छा शक्ति के बूते उसने इंजीनियरिंग छोड़ कर पुलिस सेवा की सब इंस्पेक्टर की परीक्षा दी और पहली बार में ही सफलता भी मिल गई। भुवनेश का चयन पुलिस सेवा के प्लाटून कमांडर पद पर हुआ है। वे सेवानिवृत शिक्षक आत्माराम गौतम के पुत्र व पूर्व विधायक गणेश गौतम के भतीजे है।