ये कैसा न्याय: पुलिस पिटी तो इल्जाम बेकसूर के सिर रख दिया

shailendra gupta
शिवपुरी। एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी यह कहावत इंदार थाना क्षेत्र में उन पुलिसकर्मियों पर सटीक साबित होती है जो एक मामले में आरोपी को पकडऩे निर्दोष ग्रामीण के घर छत से घुसे और जब ग्रामीण ने अपने घर में इन्हें घुसते देखा तो उसने समझा चोर या बदमाश आ गया इसलिए पूरे परिवार ने मिलकर उसकी पिटाई कर दी।
बस यह हुआ था कि पुलिस ने अपनी असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है और मासूम निर्दोष ग्रामीण पिता-पुत्र को ही हवालात में डाल दिया। इस मामले में पुलिस ने दोनों पिता-पुत्र पर धारा 353 का मामला पंजीबद्ध कर अपनी ही कार्यवाही पर सवाल उठाए है। इस घटना से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

घटनाक्रम के अनुसार बीते रोज जिले के इंदार थाना पुलिस ग्राम तरावली में हत्या प्रयास के दो आरोपियों धनपाल यादव और कल्ला यादव को पकडऩे के लिए गई, लेकिन एक पुलिसकर्मी भूलवश नन्हें सिंह के मकान में जा घुसा। छत पर आए पुलिसकर्मी को चोर समझ घरवालों ने पिटाई लगा दी। इससे खुन्नस खाकर पुलिस ने दोनों निर्दोष पिता-पुत्रों कमल सिंह और नन्हें सिंह पर शासकीय कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए उन्हें गिर तार कर लिया। इस घटना की इलाके में तीव्र प्रतिक्रिया है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता में रोष छाया हुआ है।  

विदित हो कि मई माह के ग्राम एडवारा में दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर संघर्ष हो गया था। जिसमें पुलिस ने हत्या के प्रयास का क्रास मामला दोनों पक्षों पर दर्ज किया था और मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने एक पक्ष के चार आरोपियों को गिर तार कर लिया था। जबकि दूसरे पक्ष के आरोपी फरार थे। इसी बीच आरोपी कल्ला यादव और धनपाल यादव के ग्राम तरावली में होने की सूचना पुलिस को लगी तो आरोपियों को पकडऩे के लिए सिविल डे्रस में पुलिस के जवान मंगलवार और वुधवार की रात को तरावली पहुंचे। जहां दोनों आरोपी अपनी ससुराल में छुपे हुए थे। लेकिन पुलिस भूलवश कमल सिंह के घर में घुस गई। जहां अर्धरात्रि में अचानक घर में घुसे लोगों की आवाज सुनकर परिजन जाग उठे और उन्होंने चोर समझकर एक पुलिसकर्मी की पिटाई लगा दी। बाद में उस जवान ने अपना परिचय दिया तब कमल सिंह ने उसे छोड़ा। पिटाई के बाद उक्त जवान बाहर पहुंचे और उसने साथ आए अन्य पुलिसकर्मियों को घटना की जानकारी दी तो पुलिस बौखला गई और घर में घुसकर कमल सिंह और उसके पुत्र नन्हे सिंह को पकड़ लिया और उसे थाने ले गई।

पुलिस ने स्वयं की साख बचाने निर्दोषों को फंसाया
जब यह घटनाक्रम ग्रामीणों को ज्ञात हुआ तो वह रात्रि में ही थाने पहुंचे और पुलिस की गलती पर नाराजगी जताई। बाद में पुलिस को अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन अपनी साख पर आंच न आए। इसलिए पुलिस ने एक दूसरी कहानी गढ़ी और पकड़े गए निर्दोष पिता-पुत्र सहित अन्य दो से तीन लोगों पर हत्या के प्रयास के आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस को कार्यवाही करने से रोकने के आरोप में उन पर धारा 353 शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज कर लिया है। 

बेबुनियाद आरोप पर ग्रामीणों ने पुलिस पर उठाए सवाल, किया रोष व्यक्त
पुलिस ने जो कहानी बताई उससे संदेह उत्पन्न होता है, क्योंकि जब हत्या प्रयास के आरोपी कल्ला और धनपाल छिपने के लिए तरावली पहुंचे और वहां कल्ला की ससुराल में रूके तो पुलिस को इसकी सूचना लगी। जिस पर पुलिस उन्हें पकडऩे के लिए तरावली पहुंची तो वह आरोपियों के ठहरने वाले  स्थान पर नहीं पहुंची, बल्कि वह कमल सिंह के घर में घुस गई। जबकि पुलिस का कहना है कि कमल सिंह सहित उसके पुत्र नन्हें सिंह और अन्य दो से तीन लोगों ने आरोपियों को भगाने में सहायता की है और पुलिस को कार्रवाई से रोका। जबकि उक्त पिता-पुत्र आरोपियों को जानते तक नहीं हैं अगर आरोपियों के ससुराल वाले उन्हें बचाते तो मामला सत्य प्रतीत होता।

इनका कहना है
पुलिस हत्या प्रयास के आरोपियों को पकडऩे के लिए जहां पिता-पुत्र और अन्य लोगों ने पुलिस को कार्यवाही करने से रोक दिया। जिस पर पुलिस ने उन आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज किया है और रही बात ग्रामीणों के हंगामा की तो वह पुलिस पर आरोपियों को छोडऩे के लिए दबाव बना रहे थे।
आलोक सिंह
अति. पुलिस अधीक्षक शिवपुरी 

पुलिस पर ग्रामीण झूठा आरोप लगा रहे हैं। जबकि कमल सिंह और नन्हें सिंह ने आरोपियों को भगाने के लिए पुलिस को रोका और उनके साथ धक्का मुक्की भी की। इस कारण उन पर मामला दर्ज किया गया।
बीके छारी
एसडीओपी कोलारस


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