श्री कृष्णजन्म के साथ श्रीमदभागवत का पांचवा दिवस

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पिछोर। पिछोर केगोकुलधाम में आयोजित श्रीमदभागवत कथा सप्ताह के पांचवे दिन शनिवार केा भगवान कृष्णजन्मोत्सव के साथ परमसंत श्री रमाकांत जी व्यास कथापाण्डाल में उपस्थित् भक्तगणों को आनंदित किया।
श्रीकृष्ण कथा के साथ महाराजश्री ने सुमधुर भजनों जिनमें हिन्दी के साथ साथ उर्दू एवं संस्कृत का समागम था के साथ मनमुग्ध किया क्व कथा में महाराजश्री ने बताया कि मन की वाणी पवित्र करने का सबसे अच्छा साधन हरि:नाम संकीर्तन है। उन्होंने कथा को जीवन से जोडते हुये बताया कि जो दूसरों के सुख का हरण कर ले, जो शांति में विघ्र पैदा करे वही कंश है। विधाता एवं समय की गति कभी जानी नहीं जाती, एक पल में कब क्या हो जाये इसकी किसी को खबर नहीं बताते हुये सुंदर भजन- खबर ना या जग में पल की रे- श्रवण कराया। भगवान और भक्त का परिचय कराते हुये श्री ब्यास ने बताया कि जहां भक्त की श्रद्धा एवं विश्वास जुडा होता है वहां भगवान को जाना ही पडता है। भगवान केवल श्रद्धा और प्रेम से वशीभूत होते हैं। इसके अलावा कथा के दैारान श्री कृष्ण जन्मोत्सव की कथा महाराजश्री ने श्रवण कराते हुये नंदोत्सव मनाया जिसमें कथा पाण्डाल में विशेष साजसज्जा कर भगवान का झूला, खिलोना, चकरी, भोंरा, पीपी, ढोल, नगाडे, आतिशवाजी, खील, बताशे, टोफी आदि का समागम किया गया। संगीतयमी सुमधुर बधाईयों के साथ भक्तेा ने झूमते नाचते हुये आनंदोत्सव मनाया।

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