ये ओले नहीं साक्षात यमदूत थे

shailendra gupta
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शिवपुरी। ये ओले नही थे सक्षात यमराज ही बनकर बरसे थे ये ओले इसमें किसी की जान तो नही गई, लेकिन हमारे अरमानो को जिंदा ही मार गए ये ओले,  ऐसी ही काहानी ओलो का कहर झेल चुके हर गांव के किसान आपको सुनाते मिल जायेगें। ऐसा ही एक मैसेस और फोटो शिवपुरी सामाचार डॉट कॉम की फेश बुक पर किया गया।

तारीख 10 मार्च शाम चार बजे तक कोलारस विधानसभा रन्नोद के पास तीन गांव धंधेरा, जरिया और डकपीपरी के गांवो में फसले किसानो की जीवन बनकर लहरारही थी, इन फसलो में किसी को अपनी बेटी की शादी किसी किसान को अपना मकान और किसी अन्नदाता को अपना कर्जा साहुकार से मुक्त होता दिख रहा था, ये फसले नही किसानो की लाईफ लाईन थी। लेकिन चार बजे के बाद अचानक मौसम बिगडऩे लगा और आसमान काला होने लगा, और तीने गांवो मेें इस आंतकी आसमान ने ऐसे ओले बरसाये कि जिंदा फसले मात्र 5 मिनिट में जमीन में समा गई।

इन गांवो मेे पचास ग्राम से लेकर दो सौ ग्राम तक के ओले आंतकी आसमान ने बरसाये थे जब ये ओले किसानो की फसलो पर गिर रहे थे। तो प्रत्येक किसान के आरमानो की हत्या हो रही थी। 10 मिनिट पहले तक जीवन जीने को प्रेरित करने वाली फसले 10 मिनिट बाद  किसानो को आत्महत्या जैसे घातक कसम उठाने को मजबुर करने लगी। हरे भरे दिखने वाले खेते सफेद दिखने लगे।

कुल मिलाकर इन गांवो के फसले पूरी खत्म हो चुकी है। सर्वे कार्यक्रम भी स पन्न हो रहा है। खेतो पर जाकर नही घर ही बैठकर। किसानो को अब ये चिंता है कि घर बैठकर अगर सर्वे किया गया तो सही मुआवजा नही मिलेगां ,मिलेगां तो कब और कितना।

ये फोटो और इन गांवो की दर्दभरी दस्ता शिवपुरी सामाचार डॉट कॉम की फेसबुक पर मैसेस ग्राम धंधेरा के देवेन्द्र राजपूत ने किया है ऐसे ही किसी भी समस्या और जानकारी आप भी मैसेस कर सकते है या हमारे स्थानीय संपादक ललित मुदगल 9713550966 पर संपर्क  कर सकते है। 

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