अब बीजेपी में संभावनाएं तलाश रहे हैं वीरेन्द्र रघुवंशी

shailendra gupta
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भोपाल। शिवपुरी के पूर्व विधायक एवं ताजा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकिट पर यशोधरा राजे सिंधिया के मुकाबले नूरा का मुर्गा बन चुके वीरेन्द्र रघुवंशी को जब आप में तवज्जो नहीं मिली तो वो अब बीजेपी में संभावनाएं तलाश रहे हैं।

सनद रहे कि वीरेन्द्र रघुवंशी मूलत: सिंधिया समर्थक नेता कहे जाते हैं। वो कांग्रेस में रहे परंतु जब जब सिंधिया परिवार का कोई प्रत्याशी भाजपा से उतरा उन्होंने उसे भी पूरी मदद की, लेकिन इस बार वो शिवपुरी से विधायकी करना चाहते थे। राह में कोई रोडा भी नहीं था परंतु एन वक्त पर भाजपा ने सांसद यशोधरा राजे सिंधिया यहां से मैदान में उतार दिया।

अब वीरेन्द्र रघुवंशी के सामने हथियार डालने के अलावा और कोई चारा नहीं था। कांग्रेसियों और सिंधिया विरोधियों ने रघुवंशी को खूब हवा दी परंतु रघुवंशी बैकफुट पर ही रहे और चुनाव हार गए।

चुनाव हारने के बाद अचानक उनकी अंतरआत्मा उनसे बातें करने लगी और उन्होनें सिंधिया विरोध का बिगुल फूंक दिया। भोपाल आए और यहां टीवी चैनलों पर प्रायोजित इंटरव्यू दिए। खुद को सिंधिया का सबसे कट्टर विरोधी बताने का प्रयास किया। बावजूद इसके कुछ लाभ नहीं हुआ।

इस बीच दिल्ली में केजरीवाल का जलवा दिखाई दे गया। आम आदमी पार्टी जिसे लोग फेसबुक पार्टी भी कहा करते थे, दिल्ली में चौंकाने वाले परिणाम ले आई। बस फिर क्या था। वीरेन्द्र रघुवंशी भी आप का जाप करने लगे। लोकसभा के टिकिट की आशा लगाए वीरेन्द्र रघुवंशी ने आप के कई नेताओं से बातचीत की परंतु अंतत: बात नहीं बनीं।

अब वीरेन्द्र रघुवंशी बीजेपी में संभावनाएं तलाश रही है। बीजेपी को गुना में सिंधिया का मुकाबला करने के लिए दमदार प्रत्याशी चाहिए। उनके पास केवल एक नाम है जयभान सिंह पवैया, वो भी तमाम तरह की शर्तों के साथ चुनाव लड़ने को राजी हुए हैं। भाजपा उनकी शर्तों को मानना नहीं चाहती परंतु क्या करे कोई और विकल्प भी तो नहीं है। जब इसकी जानकारी वीरेन्द्र रघुवंशी को मिले तो वो फिर से एक्टिव हो गए। अपने भाजपाई मित्रों के माध्यम से नरेन्द्र तोमर तक एप्रोच कर ली है।

उम्मीद है फैसला आज 10 मार्च 2014 सोमवार को ही हो जाएगा। देखते हैं राजनीति में लावारिस हो गए वीरेन्द्र भैया का क्या होता है। 
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