अब तो हक लेकर ही उठेंगे: अनशनकारी ग्रामीणों ने कहा

shailendra gupta
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शिवपुरी। सिंध नदी पर बनाए गए मणिखेड़ा डेम के कारण डूब में आये अमोला, काठी, मितलौनी, दांगीपुरा, करमई लोटना के विस्थापित ग्रामीण अपनी समस्याओ के कारण गुरूवार से नौ ग्रामीण अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए है। अनशन पर बैठे इन नौ ग्रामीणो को इन गांव के सभी निवासियो का समर्थन प्राप्त है।

अनशन पर बैठे ग्रामीणो ने कहा है कि अब वादे नही हक चाहिए, अब हम मर जाऐगें या अपना हक लेकर ही उठेगें।

पिछले सात साल से अपनी समस्याओ का आवेदन ज्ञापन दे-देकर थक चुके ग्रामीणो का कहना है कि अब हम शासन के नुमाईदो के अश्वासनो से हम थक चुके है। आश्वासनो से जिया नही जा सकता है। हमारे विस्थापन के कारण हमेे अब जीने में ही मुशकिल हो रही है। इससे पुर्व जिला मु यालय विशाल रैली निकालकर हमने अपनी मांगे शासन और प्रशासन के समक्ष रखी थी, परन्तु उस रैली में हमें कलेक्टर शिवपुरी की ओर से सिर्फ अश्वासन ही मिला है। मांगे तो मानी जाती नही है। पिछले सात साल से सिर्फ हम वादो की दुनिया में ही जी रहे है और वादो से हमारा काम नही चल सकता हमे खाने के लिए रोटी चाहिए वादे नही ।

यह है विस्थापित गांवो के ग्रामीणो की मांगे

ग्रामीणो की जो मांगे है उनमें सभी आठों विस्थापित गांवो की एक पंचायत बन रोजगार के लिए एक बड़ा उद्योग लगे, जिन विस्थापितो ने न्यायालय की शरण लेकर अधिक मुआबजा लिया है। उनके समान सभी को मुआवजा दिया जाए। विस्थापित परिवारो को पाँच-पाँच बीद्या जमीन या दस दस लाख रूपये दिए जाएं। प्रत्येक परिवार को इंदिरा आवास कुटिर प्रदान की जाये। भूमिहीन होने पर सभी ग्रामीणो के परिवारो का बीपीएल का कार्ड बने। विस्थापना के दौरान ड्रिपेशन रााशि काटी गई है। उसे वापस की जाए। विस्थापित गांवो में नल जल योजना चालू कर पानी सप्लाई की जाए। सभी कॉलोनियो में डामरीकरण किया जाए। पथ प्रकाश के लिए सभी हाईमास्टो को चालू की जाए।

कलेक्टर और एसपी पहुंचे आमरण स्थल पर

शिवपुरी कलेक्टर आर के जैन और एसपी एमएस सिकरवार देर शाम करैरा के नया अमोला आमरण स्थल पर पहुंचे, वहॉ उन्होने आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीणो को मनाने का प्रयास किया। अलग पंचायत को लेकर कलेक्टर ने कहा कि यह उनके दायरे का काम नही है। जिस पर ग्रामीण भड़क गए और कहा कि यादि उनके बस का काम नही है तो फिर वे उनके बीच क्यो आए है। कलेक्टर ने हालात समझते हुए कहा कि पांच ग्रामीणो की कमेटी बनाकर वे ग्रामीण आकर उनसे मिलें, उसके बाद मांगो पर विचार किया जाऐगा।

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