संकट में फंसे भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश, त्रिकोणीय मुकाबला

shailendra gupta
शिवपुरी। करैरा में कांग्रेस और बसपा प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीयता का मुद्दा जोरशोर से उठा रहे हैं। जिससे भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश खटीक संकट में घिरे हुए नजर आ रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती खटीक मतदाताओं के बीच जाकर कह रही हैं ऐसे जनप्रतिनिधि को चुनिए जो स्थानीय हो तथा आपके सुख-दुख में साथ खड़ा रहा हो। वहीं बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव भी इस मुद्दे को हवा देने में लगे हुए हैं।
वह कहते हैं कि मैं करैरा की आम जनता का प्रत्याशी हूं। आपके बीच का हूं। क्या आप उसे वोट देंगे? जिसे अभी तक आपसे कोई मतलब न रहा हो। वहीं श्री जाटव दलबदलू प्रत्याशी को वोट न देने की बात कर कांग्रेस प्रत्याशी शकुंतला खटीक को भी निशाने पर लेते हैं, लेकिन खास बात यह है कि स्थानीयता के मुद्दे के कारण अन्य सब मुद्दे गौण हो गए हैं। हालांकि तीनों प्रत्याशी अलग-अलग मुद्दे लेकर चुनाव मैदान में हैं।

अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट करैरा में भाजपा ने पिछले चुनाव में 13 हजार मतों से विजयी होने वाले रमेश खटीक का टिकट काट दिया। इसकी पीड़ा श्री खटीक को है। इसलिए वह प्रचार से पूरी तरह कटे हुए है। भाजपा का संकट यहीं से प्रांरभ हुआ। भाजपा के भितरघाती प्रत्याशी ओमप्रकाश खटीक को कमजोर करने के लिए स्थानीय प्रत्याशी के मुद्दे को पूरी ताकत से उठा रहे हैं। वह मतदाताओं के बीच जाकर कह रहे हैं कि ओमप्रकाश बाहरी प्रत्याशी हैं। चुनाव से पहले करैरा से उनका कोई लेनादेना नहीं रहा और वे जीतकर चले जाएंगे तथा करैरा को प्रतिनिधिविहीन छोड़ जाएंगे। 

करैरा, दिनारा और नरवर मण्डल के अध्यक्षों ने निर्वतमान विधायक रमेश खटीक का टिकट काटे जाने की सलाह दी थी और पार्टी आला कमान को रिपोर्ट प्रेषित की थी कि रमेश खटीक जनाधार खो चुके हैं और उनका टिकट बदला जाए, लेकिन सूत्र बताते हैं कि ओमप्रकाश खटीक की उम्मीदवारी से वे भी खुश नहीं हैं। भाजपा के एक जिला पदाधिकारी तो  ओमप्रकाश खटीक के विरोध में प्रचार करने में जुटे हैं और बताया जाता है कि उन्होंने बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल से हाथ मिला लिया है। जहां तक भाजपा प्रत्याशी का सवाल है वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की कथित जनहितैषी योजनाओं का बखान कर मतदाता के बीच पहुंच रहे हैं और कह रहे हंै कि भाजपा सरकार ने जनता के हर वर्ग के हितों की रक्षा की है और स्वर्णिम मप्र बनाने के लिए करैरा से भाजपा प्रत्याशी को जिताईए। 

करैरा को विकास की मुख्य धारा में जोडऩे का भी वह वायदा कर रहे हैं और इस आरोप का जबाव दे रहे हैं कि स्थानीयता का मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं है। सवाल यह है कि प्रत्याशी चाहे स्थानीय हो या बाहरी। क्या वह आपके हितों की लड़ाई लड़ रहा है? और श्री खटीक कहते हैं कि मैं करैरा की जनता से कभी मुंह नहीं मोडूंगा।  कांग्रेस द्वारा खटीक प्रत्याशी के मैदान में उतरने से भी ओमप्रकाश खटीक की परेशानी बढ़ रही है। शकुंतला खटीक खास तौर पर भाजपा प्रत्याशी पर नुक्कड़ सभाओं में आक्रमण करती हैं। बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव कांग्रेस और भाजपा की तुलना में अपने आप को इसलिए अधिक आरामदायक महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उनके वोटों की कटिंग नहीं हो रही। श्री जाटव कहते हैं कि दलित मतदाता तो उनके साथ हैं ही तथा पिछले पांच साल में जिस तरह उन्होंने आम आदमी के हितों की लड़ाई लड़ी है और उनसे संपर्क रखा है। इसका उन्हें फायदा मिलेगा। भाजपा प्रत्याशी पर जहां वह गैर स्थानीय होने का आरोप लगाते हैं। 

वहीं कांग्रेस प्रत्याशी शकुंतला खटीक को वोट न देने की अपील यह कहकर करते हैं कि वह दलबदलू हैं। टिकट के लिए पिछले चुनाव में वह कांग्रेस से जनशक्ति पार्टी में गई और अब फिर से वह कांग्रेस में हैं। श्री जाटव पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। कुल मिलाकर करैरा में मुकाबला काफी रोचक दिख रहा है और त्रिकोणीय संघर्ष में बाजी किस ओर झुकेगी? यह कम से कम मतदान से 6 दिन पूर्व तो नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी एक-दूसरे को कितना कमजोर कर पाते हैं। इसी आधार पर चुनाव परिणाम निर्धारित होगा।

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