प्राईवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ ओपन पेरेंट्स मीटिंग 24 को

shailendra gupta
शिवपुरी- शहर में संचालित निजी विद्यालयों के संचालकों द्वारा मनमानी फीस वृद्घि करने एवं पालकों पर जबरन निजी प्रकाशकों की किताब, कॉपी, स्कूल ड्रेस आदि सामग्री स्कूल से अथवा अपनी मनचाही खरीदने हेतु एक बार फिर दबाव बनाया जाने लगा है। आक्रोशित पालकों ने मंगलवार को जनसुनवाई के माध्यम से कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर प्राइवेट विद्यालयों की लूट रोकने हेतु एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है कि इस संबंध में पालकों को सुनने के बाद  जिला मजिस्ट्रेट शिवपुरी ने बकायदा एक आदेश भी पारित किया था, जिसे ये निजी स्कूल संचालक पूरी तरह से आइना दिखा रहे हैं। पालकों ने जिला कलेक्टर से उक्त मामले पर जनहित का ध्यान रखते हुए उचित कार्रवाई करने की अपील की है।

 पालक संघ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सीबीएसई एवं राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा आईसीएससी एवं सीबीएससी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को एनसीआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्सकें एवं एमपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालयों को निगम की पुस्तकें संचालित करने के स्पष्टï निर्देश दिए थे परंतु निजी स्कूल संचालक अपनी जेबें भरने के लिए निजी प्रकाशनों की पुस्तकें मनमानी रेट प्रिंट कराकर जबरन पालकों को थमा रहे हैं। कुछ स्कूल संचालकों ने अपनी मनचाही दुकानों से किताब खरीदने के लिए पालकों को मजबूर कर रखा है। 

साथ ही एक बार फिर मनमाने ढंग से फीस वृद्घि पर आमदा हैं। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जिला मजिस्ट्रेट शिवपुरी ने 7 मई 2011 को एक आदेश पारित कर इन पर लगाम कसी थी लेकिन अब ये स्कूल संचालक उस आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं। पालकों ने जनसुनवाई के माध्यम से मांग की है कि वे जिला मजिस्ट्रेट के आदेश का पालन कराने निजी स्कूल संचालकों को आवश्यक दिशा निर्देश दें, जिससे छात्रों एवं उनके अभिभावकों पर पडऩे वाले अतिरिक्त बोझ को कम किया जा सके।

क्या था जिला मजिस्ट्रेट का आदेश

जिला मजिस्ट्रेट शिवपुरी द्वारा दिनांक 7 मई 2011 को जारी पत्र क्रमांक 2370 के माध्यम से एक आदेश पारित कर निर्देशित किया गया था। आदेश में कहा गया था कि क्षेत्रीय सिटी मजिस्ट्रेट अथवा अनुविभागीय दण्डाधिकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ निजी विद्यालयों में आकस्मिक निरीक्षण करने के बाद देखेंगे कि आदेश का पालन किया जा रहा है अथवा नहीं। आदेश के उल्लंघन की दशा में संबंधित नियमों एवं कानूनों के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की जाए।

 - निजी स्कूल संचालक अपने विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक एनसीआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों को ही छात्रों के लिए अनुशंसित करेंगे। उपरोक्त निर्धारित पाठ्य पुस्तक के अतिरिक्त अन्य आवश्यक पुस्तकें शिक्षक पालक संघ की सहमति से तय की जा सकती हैं लेकिन यह प्रत्येक कक्षा में दो से अधिक नहीं होंगी।
- कक्षा एक से पांच तक आर्ट एवं क्राफ्ट हेतु अन्य प्रकाशक की पुस्तकें अनुशंसित की जा सकती हैं, वहीं कक्षा 3 से 5 तक के छात्रों को कम्प्यूटर की जानकारी पुस्तक अनुशंसित किए बिना दी जाए।
- सीबीएसई के परिपत्र क्रमांक बारह दिनांक 22.06.2006 अनुपालन में कक्षा 2 से 12 तक केवल एनसीआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों को ही अनुशंसित किया जाए।

क्या कहा था केन्द्रीय विद्यालय संगठन ने

इस संबंध में केन्द्रीय विद्यालय संगठन नई दिल्ली द्वारा छात्रों के हित में उनके स्कूल बैग का बोझ कम करने के संबंध में पत्र क्रमांक ई-11029/16/2009-केवीएस दिनांक 29.12.09 जारी किया गया। जिसमें कहा गया कि-कक्षा एक व दो में किताबों व कॉपियों का वजन बस्ते सहित 2 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। कक्षा तीन व चार के लिए वजन 3 किग्रा, कक्षा 5 से 7 के लिए 4 किग्रा व कक्षा 8 से 12 तक के लिए 6 किग्रा से अधिक नहीं होना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा उनसे संबद्घ विद्यालयों में एनसीईआरटी द्वारा कक्षा 1 से 8 तक के लिए निर्धारित पुस्तकों को ही पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए निर्देश दें।

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