महाराजा से नजरे बचाकर राजा की शरण में कांग्रेसी

shailendra gupta
शिवपुरी- शिवपुरी, गुना, अशोकनगर के कई सिंधियानिष्ठ कांग्रेसी नेता पार्टी में तवज्जो ना मिलने के चलते पाला बदलने की फिराक में है। कई सिंधियानिष्ठ तो ज्योतिरादित्य का साथ छोड़कर पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के महासचिव दिग्विजय सिंह के नजदीक जाकर उनके खेमे में सलाम भी ठोंक आऐं है। ग्वालियर चंबल संभाग में कांग्रेस पार्टी में खास प्रभाव रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों की सिंधिया खेमे से मोहभंग का मामला चर्चा में है। सिंधिया से मोहभंगता की स्थिति कांग्रेसजनों में क्यों उत्पन्न हुई, इसको लेकर राजनैतिक हल्कों में सरगर्मियां है। 

सूत्र बताते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुड़ रहे कई कांग्रेसियों ने पार्टी में पाला बदल लिया है। अपनी उपेक्षा और यहां वजनदारी ना मिल पाने के बाद इन सिंधियानिष्ठों ने ज्योतिरादित्य से दूरी बढ़ा ली है। खबर है कि दूरी बढ़ाने वाले इन ज्योतिरादित्य समर्थक नेताओं द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से इन नेताओं ने नजदीकियां बढ़ाई है। पिछले कई दिनों से पार्टी में उपेक्षा का शिकार बने सिंधियानिष्ठ पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष राकेश गुप्ता, पूर्व सांसद प्रतिनिधि विजय शर्मा और पूर्व जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण धाकड़ द्वारा सिंधिया खेमा छोडऩे की खबर है। 

हालांकि इन नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं की है मगर अंदरूनी तौर पर पार्टी सूत्र बताते हैं कि इन तीनों नेताओं ने सिंधिया खेमे को बाय-बाय कर दिया है। इन तीनों नेताओं के अलावा और भी कई सिंधियानिष्ठ ज्योतिरादित्य से बात ना करने के कारण इस खेमे को बाय-बाय करने के मूड में है। 

एक सिंधियानिष्ठ ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया है कि पिछले कई दिनों से वह सिंधिया के लिए काम कर रहे है मगर यहां चापलूसों को लगातार पद दिए जा रहे है जो सही सिंधियानिष्ठ है उसे उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। चापलूसों की फौज ज्योतिरादित्य के आसपास लग जाने के कारण स्व.माधवराव सिंधिया के जमाने से सक्रिय कई सिंधियानिष्ठ तो अपने घर बैठ गए है। सिंधियानिष्ठों में अचानक छाई यह मायूसी आने वाले समय में क्या रंग दिखाती है इस पर सबकी निगाहें रहेंगी। 

चुनाव में आ सकती है दिक्कत


सिंधिया खेमा छोड़कर दिग्विजय सिंह खेमे में जाने वाले कांग्रेस नेताओं के पाला बदलने से सन् 2014 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया भी गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में खासी मशक्कत का सामना करना पड़ सकता है। सिंधिया से बात ना बन पाने के कारण खेमा बदलने वाले यह कांग्रेसी आने वाले समय में गुटबाजी को और बढ़ावा देंगें। जिसका नुकसान 2014 के लोकसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस को हो सकता है। इसके अलावा सिंधिया खेमे से जुड़े कई पुराने नेताओं के पाला बदलने से दिग्गी खेमे में जाने पर इस क्षेत्र में दिग्विजय सिंह गुट के वर्चस्व एक बार फिर बढऩे के आसार नजर आ रहे हैं और इसका सीधे तौर पर नुकसान ज्योतिरादित्य सिंधिया को होगा। 

खेमेबाजी से कमजोर हो रही कांग्रेस


सिंधियानिष्ठ कांग्रेसियों द्वारा पाला बदलने की खबरों के बाद पहले से ही परेशानी से जूझ रही कांग्रेस के लिए यह खबर सिरदर्द बढ़ाने वाली है। अंचल में भी कांग्रेस की स्थिति भाजपा के मुकाबले काफी खराब है और इस दौरान सिंधिया और दिग्विजय सिंह  दो खेमे बनने से इससे पार्टी को और नुकसान होने की संभावनाऐं प्रबल हो गई है। सूत्र बताते हैं कि राकेश गुप्ता, लक्ष्मीनारायण धाकड़, विजय शर्मा जैसे कांग्रेसी पाला बदल चुके है वहीं और भी कई सिंधियानिष्ठ अपनी उपेक्षा के कारण पाला बदलने अथवा घर बैठने का मन बना रहे हैं। इन सब राजनैतिक घटनाक्रमों के कारण कांग्रेस को नुकसान होना निश्चित है। पार्टी नेताओं के बीच बढ़ रही गुटबाजी का असर 2013 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है। 
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