तो फिर कैसे बन पाएगी पार्टी में एकता

shailendra gupta
शिवपुरी-भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम में दल के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रभात झा, अरविन्द मेनन और यशोधरा राजे सिंधिया की उपस्थिति से पार्टी में एकता का संदेश गया था उसकी हवा संगठनात्मक चुनावों में छाई खेमेबाजी ने निकाल दी है।

उस समय भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर सांसद यशोधरा राजे सिंधिया ने साफ कहा था कि गुटबाजी को छोड़कर पार्टी को आगे बढ़ाना है। गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें भाजपा के पास है एक सीट जो पार्टी के पास नहीं है उसे भी कब्जाना है और इसे ही ध्यान में रखकर सब कार्यकर्ता जुट जाऐं। यशोधरा के इस बयान के बाद पार्टी के सभी गुटों में एक नया संदेश गया था मगर इस संदेश की हवा संगठन चुनाव में जिलाध्यक्ष पद को लेकर चल रही आपसी खींचतान ने निकालकर रख दी है। 

पार्टी के वर्तमान जिलाध्यक्ष रणवीर रावत की खिलाफत में उतरे कुछ यशोधरा समर्थक नेताओं ने इस गुटबाजी को और हवा दे डाली है। यशोधरा समर्थक यह नेता जिलाध्यक्ष पद के लिए चयन में अब सांसद यशोधरा राजे सिंधिया का हस्तक्षेप चाह रहे है। नेताओं के बीच आपस में ही खाई खोद रहे यशोधरा समर्थक इन भाजपा नेताओं का साथ उनकी नेता यशोधरा राजे ङ्क्षसधिया देती है कि नहीं यह उन पर ही निर्भर करेगा। इस पर सभी की निगाह है।  अब यशोधरा राजे सिंधिया का रूख पार्टी में गुटबाजी को बढ़ाने का रहता है या आपसी मनमुटाव दूर करके पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए सहमति के आधार पर जिलाध्यक्ष का चयन होता है कि नहीं यह देखने वाली बात होगी। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिलाध्यक्ष पद के लिए रणवीर रावत के नाम की खिलाफत कर रहे कुछ यशोधरा समर्थक नेताओं ने ग्वालियर में इस मामले में सांसद यशोधरा राजे सिंधिया से मुलाकात करके श्री रावत को पुन: जिलाध्यक्ष बनने से रोकने की शिकायत की। बताया जाता है कि इन नेताओं ने यशोधरा राजे सिंधिया को जमकर भरा है। खबर तो यह भी आ रही है कि यशोधरा राजे सिंधिया ने सीधे तौर पर कोई उत्तर नहीं दिया है मगर अंदर ही अंदर वह रणवीर रावत के पक्ष में नहीं है। अचानक यशोधरा राजे सिंधिया के रूख में रणवीर रावत के प्रति जो खिलाफत के भाव पैदा हुए है उसकी क्या वजह है यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी के ही कुछ नेताओं ने यशोधरा राजे के कानों तक रणवीर रावत के खिलाफत की बातों को पहुंचाया है। 

जिसमें पार्टी के एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी और एक जिला महामंत्री का नाम प्रमुख तौर पर सामने आ रहा है। स्थानीय नेताओं द्वारा यशोधरा के समक्ष की गई इन शिकवा शिकायतों का क्या परिणाम रहता है यह आने वाला वक्त बताएगा? मगर अब सबकुछ यशोधरा राजे पर ही निर्भर है। पार्टी के भूमिपूजन कार्यक्रम में यशोधरा राजे सिंधिया ने जिस प्रकार से एकता का संदेश देने की बड़ी-बड़ी बातें की उन पर वह अडिग रहती हैं या स्थानीय नेताओं द्वारा चलाई जा रही खेमेबाजी को बढ़ावा देती हैं यह सब स्वयं यशोधरा राजे सिंधिया पर निर्भर करता है। संगठनात्मक चुनावों ने भाजपा की आपसी गुटबाजी और कलह को एक बार फिर से सामने ला दिया है। पिछले कई वर्षों से भारतीय जनता पार्टी दो गुटों में बंटी होकर जिसमें एक खेमा यशोधरा राजे सिंधिया का तो दूसरा खेमा संगठन का(जिसमें नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रभात झा) है। उसमें ही आपसी प्रतिद्वंदता थी। भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम में इस खेमेबाजी को दूर कर पार्टी की नई लाईन बनाने की कोशिश की गई। जिसमें सभी को एकजुटता का पाठ पढ़ाया गया मगर इस जिलाध्यक्ष पद के चुनाव ने एक बार फिर से इस एकता की लाईन को तार-तार कर दिया है। 
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