चाबीघर पर उग्र प्रदर्शन, कर्मचारी ऑफिस छोड़ भागे

shailendra gupta
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शिवपुरी। शहर में ताबड़तोड़ ढंग से हो रही बिजली कटौती से समाज का हर वर्ग आक्रोशित है, लेकिन कल तो जनता के धैर्य की सीमा समाप्त हो गई। 15 घंटे से अधिक की बिजली कटौती से परेशान नागरिक सड़कों पर उतर आए और उन्होंने विद्युत मण्डल के खिलाफ जोरशोर से नारेबाजी करते हुए चाबीघर पर चक्काजाम कर दिया।

उग्र भीड़ को देखकर चाबीघर के कर्मचारी भाग खड़े हुए और भीड़ ने चाबीघर में घुसकर तोडफ़ोड़ शुरू कर दी। फर्नीचर उठा-उठा कर बाहर फेंक दिया, टेलीफोन जमीन पर पटक दिया। मजे की बात तो यह है कि यह सब नजारा तब हो रहा था जब पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन कहीं न कहीं वे भी विद्युत कटौती के लिए विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इस कारण वे भी मूक बने रहे। शिवपुरी में विद्युत कटौती कृत्रिम है और जानबूझकर की जा रही है।

यह कल उस समय जाहिर हो गया जब जनता के उग्र होने के पांच मिनिट के भीतर ही लाईट आ गई। जिससे लोग अपने-अपने घरों में चले गए, लेकिन 10 मिनिट बाद ही फिर लाईट गोल हो गई और रात 10 बजे बाद ही बिजली के दर्शन हुए। सुबह 6 बजे से फिर लाईट गायब है।

शिवपुरी में बिजली आने जाने का कोई समय निश्चित नहीं है। जब मर्जी आए तब लाईट काट दी जाती है। कभी-कभी तो पूरे शहर में 10 से 12 घंटे तक कटौती कर दी जाती है। कटौती का समय कभी कुछ तो कभी कुछ बताया जाता है। लेकिन कल तो हद हो गई शहर की लगभग आधी आबादी अंधेरे मेें डूबी रही। तारकेश्वरी कॉलोनी, फिजीकल रोड, सईसपुरा इलाके में अधिकांश मुस्लिम समाज के लोग निवास करते हैं और इस समय उनके रोजे चल रहें हैं, लेकिन हद देखिए कि कल सुबह साढ़े तीन बजे से इस इलाके में लाईट गोल कर दी गई। कारण क्या रहा किसी को नहीं मालूम।

सब सोचते रहे कि लाईट अब आई अब आई लेकिन सुबह हो गई लाईट के दर्शन नहीं हुए। दिन चढऩे लगा दोपहर हो गई, शाम हो गई और रात भी हो गई। लेकिन बिजली नहीं आई तो नहीं आई। चाबी घर पर फोन कोई उठाता नहीं अधिकारी मोबाईल रिसीव करते नहीं। इन इलाकों के अलावा दोपहर 12 बजे से ठण्ड़ी सड़क और शंकर कॉलोनी इलाके में भी बिजली चली गई और वह भी रात तक नहीं आई। आखिर जनता का धैर्य क्यों नहीं टूटता। आक्रोशित भीड़ ने रात 8 बजे चाबीघर को घेर लिया और चक्काजाम शुरू कर दिया। भनक पाकर पुलिसकर्मी भी मौके पर आ गए, लेकिन उन्हें भी लगा कि कहीं न कहीं विद्युत मण्डल दोषी है। इस कारण उनकी भूमिका मूक दर्शक की बनी रही और हौंसला पाकर भीड़ ने अपने दिल का गुबार जमकर निकाला। चाबीघर पर जमकर आक्रोश व्यक्त किया। वहां मौजूद बिलों को सड़क पर फेंक दिया। इस हंगामे का परिणाम यह हुआ कि पांच मिनिट में ही लाईट आ गई। अब कैसे कहा जा सकता है कि विद्युत मण्डल और इसके अधिकारी निर्दोष हंै।

हंगमा शांत होते ही फिर कर दी लाईट गोल

 
शिवपुरी। बिजली अधिकारी खराबी के कारण 20 घंटे से अधिक समय तक लाईट ठीक नहीं कर पाए। वह जनता के हंगामे के बाद पांच मिनिट में कैसे ठीक हो गई और कैसे प्रभावित इलाकों में बिजली सप्लाई बहाल हो गई। इससे जाहिर होता है कि सब कुछ गड़बड़ी स्थानीय स्तर पर की जा रही है। लेकिन भीड़ की उग्रता के बाद भी विद्युत मण्डल बदमाशियों से बाज नहीं आया और जनता के जाने के बाद फिर से लाईट गोल कर दी गई।
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