इंदिरा आवास कुटीर योजना का कड़वा सच: जमीन बनी बिछौना, आसमां आशियाना

shailendra gupta
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शिवपुरी - अपनी इकलौती बेटी के हाथ पीले करने के बाद शिवपुरी के बिलोकलां गांव में रहने वाला झींगुरिया जाटव पूरी तरह अकेला रह गया था। गांव में ही मेहनत मजदूरी कर बनाई गई छोटी सी झोंपड़ी में रहकर अपना जीवन यापन कर रहा था इसी बीच प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी इन्दिरा आवास कुटीर योजना के तहत उसके लिए भी एक कुटीर पंचायत के माध्यम से आवंटित हो गई। टूटी-फूटी झोंपड़ी के स्थान पर कुटीर मिलने की आश से झींगुरिया प्रफुल्लित था। पंचायत के कर्ताधर्ताओं के निर्देश पर उसने अपने घरोंदे को इस चाह में तोड़ भी दिया कि कुछ ही दिनों में यहां उसका नया आशियाना खड़ा कर दिया जायेगा। लेकिन सीधे-साधे झींगुरिया को शायद लालफीताशाही में उलझी योजनाओं का इल्म नहीं था यही कारण था कि स्वीकृति तीन महीने बाद भी न तो उसे कुटीर का पैसा मिला है और न ही कोई ठोस आश्वासन। हालात यह हैं कि कुटीर की आश में अपना घरोंदा भी गवां चुका झींगुरिया अब कड़कड़ाती सर्दी खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने के लिए विवश है। जिम्मेदार हमेशा की तरह एक-दूसरे पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ते नजर आ रहे हैं।



दरअसल शिवपुरी विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बिलोकलां में रहने वाला झींगुरिया जाटव उम्र 65 वर्ष गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों की श्रेणी में आता है। इकलौती पुत्री जानकी की शादी के बाद वह गांव में ही घास-फूंस की झोंपड़ी में गुजर बसर कर रहा था। इसी दौरान विगत अक्टूबर माह में पंचायत द्वारा उसे सूचित किया गया कि उसके नाम से इन्दिरा आवास कुटीर स्वीकृत हो गई है और जल्द ही उसे कुटीर क े लिए स्वीकृत 45 हजार रूपये की राशि सौंप दी जायेगी। लेकिन राशि प्राप्त होने से वह नींव भरवाकर तैयार करवा ले। सीधे-साधे झींगुरिया ने पंचायत के इस फरमान के बाद अपने हाथों से ही अपना घरोंदा रौंद डाला और खुद नींव खोदकर उसे तैयार कर दिया। हफ्ते दर हफ्ते और महीना दर महीना गुजरता गया, लेकिन झींगुरिया को कुटीर की राशि क ेबजाय सिर्फ और सिर्फ आश्वासन मिलते रहे। हालत यह है कि वह सर्दी के इस प्रतिकूल मौसम में खुले आसमान के नीचे किसी तरह जीवन जी रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की तंद्रा है कि टूटने का नाम नहीं ले रही। यह मामला सिर्फ एक गरीब मजूदर झींगुरिया की दास्ता बयान नहीं करता, बल्कि बताता है कि किस प्रकार जिले में लालफीताशाही और अलाली प्रथा के चलते योजनाएं फलीभूत होने से पहले ही दम तोड़ रहीं हैं।
 
इनका कहना है-

झींगुरिया जाटव की कुटीर के लिए 45 हजार रूपये का चैक जारी किया जा चुका है व पोस्ट ऑफिस में स्थित खाते में जमा भी कर दिया है। हो सकता है चैक कलेक्शन के चलते राशि नहीं आई हो, मैं दिखवाकर जल्द ही संबंधित को राशि उपलब्ध करा दूंगा।

रघुवीर परिहार
सचिव ग्राम पंचायत बिलोकलां
 
यदि कुटीर मंजूर हो चुकी है और चैक खाते में जमा कराया जा चुका है तो पैसा हितग्राही के खाते में आ जाना चाहिए था। आखिर क्या कारण रहे हैं जिनकी वजह से पैसा हितग्राही के खाते में नहीं आया है, मैं इसकी जांच करवाऊंगा। यदि किसी की लापरवाही के कारण हितग्राही को आसमान के नीचे सोना पड़ रहा है तो उसके खिलाफ उचित वैधानिक कार्रवाई संस्थित की जायेगी।
 
एचपी वर्मा
सीईओ जिपं शिवपुरी
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