प्रभु की रथयात्रा परमात्मा की अनंत यात्रा का प्रथम चरण है:मुनि प्रसन्न सागर जी

shailendra gupta
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शिवपुरी- पुष्पगिरि तीर्थ प्रणेता आचार्य पुष्पदंत सागर जी महाराज के आत्मीय शिष्य अन्तर्मता मुनिश्री प्रसन्न सागर महाराज मुनिश्री प्रणीत सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री पर्व सागर महाराज, आर्यिका रत्न भाग्यमती माता जी अहिंसा संस्कार पदयात्रा के साथ शिवपुरी में भव्य मंगल प्रवेश किया। शिवपुरी दिगम्बर जैन समाज के वार्षिक बसंत पंचमी के के विमानोत्सव पर विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा धर्म अंधों की रैली नहीं आंख वालों की यात्रा का नाम है।


प्रभु की रथयात्रा परमात्मा की अनन्त यात्रा का प्रथम चरण है इसलिए प्रत्येक मनुष्य को प्रभू के रथोत्सव में दस कदम चलना चाहिए। तुम दस कदम चलोगे परमात्मा हजार कदम चलकर आएगा। धर्म कोई पूजा की वस्तु नहीं, वह तो जीने की कला है। धर्म वह है जो जिया जाता है। जो जिया नहीं जाता वह धर्म नहीं है। धर्म का अर्थ जीवन की समग्रता को धारण करना है। धर्म आनन्द की यात्रा है। धर्म की यात्रा स्वयं को ही तय करनी पड़ती है। अपने ही पांवों से अपने ही भावों से दूसरों की बैसाखियां काम नहीं आएंगी। 

दूसरों के कंधे काम नहीं आएंगे। लोग शिखर जी की यात्रा मोक्ष की यात्रा किसी डोली पर नहीं हो सकती। किसी के कंधों चढ़कर जीवन की मंजिल तक पहुंच पाना असंभव है। कंधों पर तो मुर्दे को ले जाया जाता है वह भी मरघट तक दूसरों के कंधों पर चढ़कर मरघट से आगे जाया भी तो नहीं जा सकता। मुनि श्री ने कहा कि धर्म केवल चर्चा तक ही सिमित न रहे, चर्या भी बने और यहां जो सत्संग में आप सुनते हैं उसे श्रवण तक ही सीमित न रखें, उस पर अमल भी करें। संतों से प्रवचन से यदि आपने एक शब्द भी जीवन में उतार लिया तो कायाकल्प हो जाएगा। क्या सुना? कितना सुना? यह मत्वपूर्ण नहीं। कितना जिया? यह महत्वपूर्ण  है। 

क्या खाया? किना खाया? यह महत्वपूर्ण नहीं। कितना पचाया? वह महत्वपूर्ण है। इससे पूर्व आज आदिनाथ जिनालय पर मुनि संघ की भव्य आगवानी सकल जैन समाज द्वारा की गई। मुनि संघ आदिनाथ जिनालय, माधव चौक गांधी चौक सदर बाजार होते हुए चन्द्रप्रभु जिनालय पहुंचकर बसंत पंचमी पर आयोजित विमानोत्सव में सम्मिलित हुए तत्पश्चात विमाया यात्रा चन्द्रप्रभु जिनालय से प्रारंभ होकर सदर बाजार गांधी चौक, माधव चौक होते हुए आदिनाथ जिनालय पहुंची तत्पश्चात विशाल धर्मसभा को अन्तर्मना मुनिश्री प्रसन्न सागर महाराज ने संबोधित किया। 
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