नारद जयंती महोत्सव : आज जो भी सत्ता में आता है पाने के लिए आता है देने के लिए नहीं

शिवपुरी। आज शिवपुरी में प्रचार विभाग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग व वेव साईट क्रांति दूत डॉट इन के संयुक्त तत्वावधान में नारद जयन्ती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्थानीय होटल सनराइज में राष्ट्रीय चुनौतियां के समाधान में समाज का सहभाग विषय पर आयोजित विमर्श में लखनऊ से पधारे वरिष्ठ पत्रकार संजय तिवारी, पूर्व सूचना आयुक्त गोपालकृष्ण दंडोतिया तथा अंचल की लोकप्रिय लेखिका श्रीमती नीलम महेंद्र के सारगर्भित उद्बोधन हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव ने की।

भारत माता व महर्षि नारद के चित्रों के आगे दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ । अपने उद्बोधन में डॉ. नीलम महेंद्र ने कहा कि राष्ट्र बही प्रगति करता है जो समस्याओं से लडक़र उनका समाधान खोजता है, महिला अत्याचार, भ्रूण हत्या जैसी कई समस्याये आज देश में है, जिनको समाप्त करने की दिशा में बढऩा होगा। समाज में परिवर्तन तब आता है जब सामाजिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता होती है, समाज में नैतिकता होती है। 

जब हम समस्याओं से लड़ते है तो समस्याये भाग खड़ी होती है, हारा बही जो लड़ा नही। अंधकार जब होता है तभी तो दीप जलाया जाता है । ज्योतिबा फुले ने सारा जीवन बालिकाओं के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया, बाबा आम्टे ने कुष्ठ रोगियों के लिए आजीवन कार्य किया, स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को उत्साहित किया, प्रेरित किया, स्वामी दयानंद सरस्वती ने ज्ञान का प्रवाह किया वैदिक संस्कृति को पुन: स्थापित किया। इनके जीवन से प्रेरणा लेकर ही हम राष्ट्र की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं । संक्षेप में कहा जाए तो व्यक्ति के सुधार से ही समाज में सुधार होगा।

लखनऊ से पधारे वरिष्ठ पत्रकार संजय तिवारी ने कहा कि इस विषय के सम्पूर्ण विवेचन के लिए पहले यह समझना होगा कि समाज क्या है,समाज की भूमिका क्या है? सीमा में बंधे भूखंड को देश नही कहा जाता। भारतीय सभ्यता अर्थात सिंधु घाटी सभ्यता, दुनिया में जहाँ जहाँ सिंधु घाटी सभ्यता के लोग होंगे, भारत वही तक है । अगर सीमा से राष्ट्र बनता तो तो कश्मीर जलती क्यों? हमारी संस्कृति में व्यक्ति प्रारम्भिक इकाई है, व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज,प्रदेश और देश होता है।

पहले नारे लगते थे मजदूर एकता जिंदाबाद,छात्र एकता जिंदाबाद,आज नारे लगते है यादव एकता जिंदाबाद,ब्राह्मण एकता जिंदाबाद। यह परिवर्तन आज की राजनीति के कारण आया है। राजनीति जिसके राज से नीति बनती है, वह केवल स्वार्थ आधरित हो गई है। समस्याये विकट है अगर हम सजग और सचेत नही हुए तो आने बाली पीढ़ी हमे क्षमा नही करेंगी। राष्ट्र में योग्य महिला, योग्य पुरुष बनाये तभी सारी समस्याएं समाप्त होगी।

विषय को आगे बढ़ाते हुए पूर्व सूचना आयुक्त गोपाल कृष्ण दंडोतिया जी ने कहा कि केवल व्यक्ति और समाज के आधार पर ही देश नहीं बनता। देश तब बनता है जब उस भूखंड में निवास करने वाले लोग उस भूमि के प्रति पूज्य भाव रखते हैं। उस भूखंड से जब आस्था जुड़ जाती है, तब राष्ट्र बनता है । हम वसुधैव कुटुम्बकम कहते है, यानी ये वसुधा हमारा कुटुंब है। 

अब हमारा परिवार भाव ही नहीं बचा, तो वसुधा कहा से कुटुंब होगी। हमारे यहाँ कहा गया था कि अपने उदर पोषण के अतिरिक्त रखना पाप है। गीता में कहा गया कि जो स्वयं के लिए पकाता है, वह पाप पकाता है, स्वयं खाता है, वह पाप खाता है । परंतु आज तो सब अपने लिए ही जी रहे है। सत्ता भ्रष्ट करती है तो पूर्ण सत्ता पूर्ण भ्रष्ट करती है,आज जो भी आता है बो पाने के लिए आता है, देने के लिए कोई नही आता। 

अपने से प्रारम्भ करके समाज के लिए देश के लिए समय देकर ही चुनौतियों से लडऩे की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जी भार्गब ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज स्थिति ये बन गयी है कि जो बात उठाने की व्यवस्था को सुधारने की बात करता है उसे दबा दिया जाता है ,प्रताडि़त किया जाता है। 

बहुराष्ट्रीय कंपनियों के माल को लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है,जो शिकायत करने जाता है उसे दंडित किया जाता है,समाज को गेर जागरूक बनाया जा रहा है। एक साथ मिलकर खड़े होकर ही देश को समस्याओं से मुक्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन अरुण जी अपेक्षित, प्रस्तावना आशुतोष शर्मा, स्वागत भाषण दिवाकर शर्मा व आभार प्रदर्शन उमेश भारद्वाज ने किया।
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