मीडिया ने पकड़ा महिला बाल विकास विभाग में 36 लाख का दवा घोटाला

शिवपुरी। बारे-बारे न्यारे कर महिला बाल विकास विभाग के लिपिक और मेडीकल सप्लायर विक्रेता की मिलीभगत से लाखों रूपये की महत्वपूर्ण दवाओं से भरी एक खेप रात के अंधेरे में शिवपुरी के न्यू ब्लॉक स्थित आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र में उतारी जा रही थी कि तभी मामले की जानकारी मीडियाकर्मियों को लगी और मीडिया को देख वहां मौजूद लिपिक व सप्लायर के होश उड़ गए।

जिस पर तुरंत जिला प्रशासन को जानकारी दी गई और मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रक को जब्ती ले लिया। जबकि मौके पर ही मीडियाकर्मियों ने स्वास्थ्य विभाग व महिला बाल विकास अधिकारी को फोन कर उतारी जाने वाली दवाओं के बारे में जानकारी ली तो दोनों ही अधीनस्थ अधिकारियों ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ा। जिससे मामला संदेह में आया और अब पूरा मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में है।

कुछ यूं किया जा रहा था गड़बड़झाला

बीती रात मीडिया की सतर्कता से प्रथम दृष्टि में महिला बाल विकास का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। गुपचुप तरीके से देर रात न्यूब्लॉक स्थित आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र में ट्रक से दवाएं उतारी जा रही थीं। ट्रक चालक और सप्लायर के पास जिला मलेरिया अधिकारी के नाम बिल्टी और बिल था। बिल के अनुसार उक्त दवाएं 36 लाख 43 हजार 500 रूपये की थीं। मलेरिया अधिकारी अलका त्रिवेदी ने जब इंकार किया कि उक्त दवाएं उनकी नहीं हैं तो स्पष्ट हो गया कि दाल में काला है। आज सुबह जिला महिला बाल विकास अधिकारी उपासना राय ने बताया कि उक्त दवाएं उनके विभाग की हैं, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि बिल्टी और बिल गलत कैसे बन गए तो उन्होंने इसके लिए सप्लायर को जिम्मेदार ठहराया। जब उनसे दवाओं की राशि के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इनकी कीमत लगभग 20 लाख रूपये बताई। जबकि बिल के अनुसार उक्त दवाएं 36 लाख से अधिक की हैं।

लिपिक ने धमकाया मीडियाकर्मियों को

मौके पर महिला बाल विकास विभाग का लिपिक नरेश दोहरे भी था। जिसने मामला दबाने और पत्रकारों को धमकी देने तथा प्रलोभित करने का भी प्रयास किया। उक्त लिपिक को आपराधिक न्यास भंग के मामले में तीन साल की सजा न्यायिक मजिस्ट्रेट करैरा के न्यायालय से हो चुकी है। आश्चर्यजनक पहलूं यह है कि जब महिला बाल विकास अधिकारी ने बजट को सरेण्डर कर दिया था तो फिर उक्त दवाएं क्यों उतारी जा रही थीं? फिर ड्रग कंट्रोल एक्ट के तहत दवाएं गैर चिन्हित क्षेत्र में कैसे उतारी जा सकती हैं। मीडिया की सतर्कता से ट्रक को जप्त कर लिया गया है और प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। लेकिन निष्पक्ष जांंच हो पाएगी इसमें संदेह बरकरार है।

यह है मामला

बीती रात अंधेरे में न्यू ब्लॉक क्षेत्र में आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र के समीप ग्वालियर से ट्रक क्रमांक एमपी 07 जीए 2142 में शासकीय दवाएं सांई बाब इंटर प्राइजेज से शिवपुरी के जिला मलेरिया अधिकारी के  नाम से दवाएं शिवपुरी आई। जिसे गलत तरीके से न्यूब्लॉक में स्थित महिला बाल विकास के आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र में उतारा जा रहा था। जब यह जानकारी मीडियाकर्मियों को लगी तो वे मौके पर पहुंचे और उन्होंन ट्रक में भरे माल की जानकारी आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र पर मौजूद बाबू नरेश दोहरे से लेनी चाही तो उसने गोलमोल तरीके से जवाब देते हुए ट्रक में खाली पुट्ठे होने की बात कही,लेकिन जब माल उतारा जा रहा था तो उसमें खाली पुट्ठों के नीचे दवाईयां रखी हुई थीं। जिससे मीडियाकर्मियों को संदेह हो गया और उन्होंने बाबू नरेश दोहरे से उनके झूठ बोलने का कारण पूछा तो बाबू ने अपने आप को पत्रकार बताते हुए मीडियाकर्मियों के साथ अभद्रता शुरू कर दी और बाद में मामले को तूल पकड़ता देख वह मौके से भाग निकला। इसके बाद से ट्रक के साथ आए सप्लायर सुरेश नामक व्यक्ति ने ट्रक के ड्रायवर से बिल्टी छीन ली। जिस पर पाने वाले का नाम जिला मलेरिया अधिकारी लिखा हुआ था और बिल्टी के साथ जो बिल संलग्र था उस पर भी जिला मलेरिया अधिकारी शिवपुरी अंकित था।

यह दवाऐं थी पेटियों में

पकड़े गई दवा की पेटियों में मु य रूप से पैरासीटामोल 4536 और कीमत और 27 हजार रूपये अंकित थी। साथ ही 18 पैकिट कॉटन, 1 लाख 80 हजार रूपये, पोबीडिन आयोडिन ट्यूब, 96 हजार रूपये, रोल बेण्डेड पट्टी 36000 रूपये 1800 पैकिट और नीचे कुल योग 36 लाख 43 हजार 500 रूपये था। लेकिन सप्लायर और महिला बाल विकास के बाबू के बीच सांठगांठ के चलते यह दवाईयां आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र पर उतारीं जा रही थीं। दोनों के भाग जाने से मीडियाकर्मियों का संदेह बढ़ गया।

कलेक्टर व चुनाव पर्यवेक्षक को भी दी सूचना

इसके बाद कलेक्टर आरके जैन से पत्रकारों ने संपर्क साधकर मामले की संदिग्धता के बारे में जानकारी दी और चुनाव के  दौरान मु त में दवाएं बांटने का संदेह भी गहरा जाने के कारण चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पयवेक्षक से भी शिकायत की। जिस पर कोतवाली टीआई आरकेएस राठौर पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए और उन्होंने पूछताछ की। देर रात तहसीलदार मौके पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी।

स्वास्थ्य व मलेरिया विभाग ने झाड़ा पल्ला
जब यह मामला उलझा हुआ था कि दवाएं स्वास्थ्य विभाग की हैं या मलेरिया विभाग की तो सीएमओ उचारिया ने स्टोर प्रभारी बीके शर्मा को मौके पर भेजा जिन्होंने कहा कि उक्त दवाएं स्वास्थ्य विभाग की नहीं हैं। बाद में मलेरिया अधिकारी अलका त्रिवेदी से फोन पर संपर्क साधा गया तो उनका सीधा जवाब था कि उनके विभाग द्वारा कोई भी दवाई नहीं मंगाई गई है और न ही ऐसा कोई शासन-प्रशासन से आदेश है।

भाग खड़े हुए सप्लायर व ट्रक चालक

इस मामले में संदेह इसलिए और गहरा गया कि ट्रक चालक और सप्लायर मौके से भाग खड़े हुए। देर रात महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारी उमेश भटनागर मौके पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि उक्त दवाएं महिला बाल विकास विभाग की हैं, लेकिन सवालों का वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

ड्रग कंट्रोलिंग एक्ट का हुआ उल्लंघन, कार्यवाही की मांग

स्वास्थ्य विभाग के स्टोर प्रभारी बीके शर्मा जब मौके पर पहुंचे और पत्रकारों ने उनसे सवाल किए तो उनका कहना था कि ड्रग कंट्रालिंग एक्ट के तहत बगैर लाईसेंस के कहीं भी दवा नहीं रखी जा सकतीं। अगर प्रशिक्षण केन्द्र पर दवाएं रखी जा रही हैं तो यह ड्रग कंट्रोलिंग एक्ट का उल्लंघन है और इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

इनका कहना है:-
दवा सप्लायर को हमने माल भेजने के लिए कल दोपहर 3-3:30 बजे का समय दिया था। तीन ट्रक आने थे, लेकिन इस अवधि तक मात्र 1 ट्रक आया। हमने 5-5:30 बजे तक दवाओं का इंतजार किया। लेकिन दवाएं न आने के कारण बजट सरेण्डर कर दिया। लगभग 20 लाख रूपये का बजट सरेण्डर किया गया। मुझे नहीं पता कि सप्लायर ने 36 लाख से अधिक का बिल कैसे बनाया है। बिल और बिल्टी गलत व्यक्ति के नाम पर बनाने की भी उन्हें कोई जानकारी नहीं हैं। इसकी जानकारी सप्लायर ही दे सकता है, लेकिन यह सच है कि सप्लायर के पास मलेरिया अधिकारी का दवाओं का कोई ऑर्डर नहीं हैं।
उपासना राय
महिला बाल विकास अधिकारी शिवपुरी मप्र



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