रामबाबू गडरिया का साथी और कराहल घाटी में बस लूट का आरोपी 5 साल से साधू के बनकर दे रहा था लोगों को ज्ञान, दबौचा | SHIVPURI NEWS - Shivpuri Samachar | No 1 News Site for Shivpuri News in Hindi (शिवपुरी समाचार)

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3/28/2019

रामबाबू गडरिया का साथी और कराहल घाटी में बस लूट का आरोपी 5 साल से साधू के बनकर दे रहा था लोगों को ज्ञान, दबौचा | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। खबर चौकाने बाली श्योपुर के देहात थाना क्षेत्र से आ रही है। जहां बीते रोज पुलिस ने शिवपुरी के जंगलों में आंतक का पर्याय बने डकैत रामबाबू गडरिया गैंग के सक्रिय सदस्य और पांच हजार के इनामी डकैत चिंटू गडरिया को दबौचा है। उक्त आरोपी 13 साल पहले कराहल घाटी में रामबाबू गडरिया के साथ मिलकर लोगो का अपहरण कर लूट की बारदात को अंजाम दिया था। गैंग के खात्मा के बाद उक्त आरोपी साधू के भेष में लोगों को बैराग्य का ज्ञान दे रहा था। 

वर्ष 2007 में चंबल में आतंक का पर्याय रहे रामबाबू गड़रिया गैंग का उसके एनकाउंटर के साथ ही खात्मा हो गया, जबकि गिरोह में उसके साथी पुलिस से बचने इधर-उधर भाग निकले। रामबाबू की गैंग में शामिल और 2006 में रामबाबू के साथ इंदौर जाने वाली बस में लूटपाट व 19 लोगों का अपहरण करने वाला 5 हजार का इनामी दस्यु चिंटू गड़रिया को देहात थाना पुलिस ने मंगलवार को साधु के वेश में गिरफ्तार किया है। चिंटू ने उत्तरप्रदेश के वृंदावन और मथुरा में करीब 6 साल तक फरारी काटी। उसने साधुओं के अखाड़े में शामिल होकर वैराग्य अपनाया। 

फरारी की शुरुआत में चिंटू के साथ रामबाबू गड़रिया की बहन चंदा गड़रिया भी 3 साल तक रही, लेकिन इसके बाद से उसे भी चंदा की कोई जानकारी नहीं है। शिवपुरी के नरवर थाना क्षेत्र के बंगला गांव निवासी चिंटू उर्फ चित्ता पुत्र हल्के गड़रिया ने वृंदावन और मथुरा में 6 साल फरारी के बाद शिवपुरी के एक मंदिर में फरारी काटी, जहां वह श्रद्धालुओं के साथ गुरु बन गया और उन्हें ज्ञान की बातें बताने लगा। 

यहां करीब 5 साल से वह मंदिर पर रहकर लोगों से मिलने वाले दान पर गुजर-बसर कर रहा था। इस बीच मंगलवार को वह छर्च थाना क्षेत्र के बिलौआ गांव में रिश्तेदारी में जाने के लिए निकला, इस बीच मुखबिर ने चिंटू की सूचना पुलिस को दे दी कि वह साधु के वेश में रह रहा है। इस पर पुलिस ने श्योपुर-शिवपुरी हाईवे पर बिलौआ रोड से उसे गिरफ्तार कर लिया। 

नाम रखा अयोध्या शरण, रामबाबू की बहन भी साथ रही 

पुलिस की गिरफ्त में आए चिंटू गड़रिया ने पहले पुलिस को लगातार गुमराह किया। उसने अपने उप्र मथुरा का होने के आईडी पेश किए, लेकिन पुलिस ने उसकी नहीं मानी। चिंटू ने फरारी में अपना नाम अयोध्या शरण पुत्र कुंजबिहारी निवासी मथुरा उप्र रख लिया था जिससे वह पुलिस को गुमराह कर सके, लेकिन मुखबिर की सटीक सूचना पर गिरफ्तार आरोपी चिंटू से जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने सच्चाई कुबूल कर ली। चंदा को भी शरण देने की बात कुबूल की। हालांकि आरोपी अभी भी पुलिस को अन्य साथियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा है, जिसे लेकर पुलिस लगातार आरोपी चिंटू से पूछताछ करने में जुटी हुई है।

2006 में यात्रियों को लूट कर बस में लगा दी थी आग 

वर्ष 2006 में रामबाबू गड़रिया के साथ मिलकर चिंटू गड़रिया ने इंदौर जाने वाली जैन बस में लूटपाट की थी, जबकि बस को आग के हवाले कर दिया था। उस समय 11 लाख रुपए की लूटपाट की गई थी। गैंग का यह मूवमेंट देख पुलिस ने उस पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था और अप्रैल 2007 में रामबाबू गड़रिया के एनकाउंटर के साथ ही गैंग खत्म हो गया था और गैंग के सदस्य फरार हो गए। जिनमें 5 हजार रुपए का इनामी चिंटू गड़रिया भी शामिल था। 2006 में गड़रिया गैंग की यह पहली बड़ी और सनसनीखेज वारदात थी, जिससे पूरा प्रदेश हिल गया था। श्योपुर एसपी नगेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी से उसके गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। 

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