नही खुलने दे रहे डेम के गेट, मुआवजे को अडे ग्रामीण, डेम के गेट के नीचे खडे हो गए | Shivpuri

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। शिवपुरी, श्यापुर व ग्वालियर सीमा पर पार्वती नदी पर बनाए गए अपर ककेटो डैम भर जाने के कारण उसके गेट खोलना अवाश्यक हो गया था,लेकिन ग्रामीणो ने इन गेटो को खोलने का विरोध करते हुए  गेटो के नीचे पानी में जाकर खडे हो गए। मौके पर प्रशासन और पुलिस पहुंची ग्रामीण डेम के गेट खोलने का विरोध कर रहे थे, बडी ही मुशिकल के बाद प्रशासन की मनाने के बाद डेम के गेट खोले गए। 

बीते दिनो से लगातार हो रही बारिश के कारण अपर ककेटो डेम लबालब भर गया। डेम का लेबल 369 फुट हैं और उसमे पानी 370 फुट हो गया। इस कारण डेम के गेट खोलना डेम प्रबंधन के लिए अतिआवश्यक हो गया,लेकिन जैसे ही गेट खोलने के डेम प्रबंधन ने सायरन और मुनादी कराई जैसे ही शिवपुरी जिले की सीमा में आने वाला ग्राम बूड़दा के ग्रामीण डेम के गेटो के नीचे खडे हो गए और डेम के गेट खोलने का विरोध करने लगे। 

अपर केकेटो डेम शिवपुरी जिले की सीमा से होकर गुजरने वाली पार्वती नदी पर बनाया गया हैं। इसका पानी का भराव क्षेत्र 95 प्रतिशत श्योपुर जिले में होता हैं। जब डेम के गेट खोले जाते है तो पानी ग्वालियर की सीमा में छोडा जाता हैं। इस डेम के डूब क्षेत्र में श्योपुर जिले के अधिकाशं गांव आते है। शिवपुरी जिले का बैराड़ तहसील और गोवर्धन थाने का एक मात्र गांव बूड़दा का कुछ हिस्सा आता हैं। 

सर्वे के दौरान बूड़दा गांव के  मात्र 56 परिवार डूब क्षेत्र में आए थे,जिन्है मुआवजा मिल गया। लेकिन जब डेम लबालब भर जाता है तो इस गांव के 200 परिवार इस डेम के भराव क्षेत्र में आ जाते हैं। इस गांव के चारो ओर पानी भरने लगता हैं,गांव टापू नुमा हो जाता है,पूरे रास्ते बंद हो जाते है। इस डेम में डूब क्षेत्र से प्रभावित परिवार पिछले केई सालो से मुआवजे की मांग कर रहे थे,लेकिन प्रशासन लगातार अनसुनवाई कर रहा था। 

ग्रामीणो का कहना था कि जब डेम पूरा भर जाता हैं तो हमारे खेत डूब जाते है,हम अपने खतो पर खेती नही कर सकते। डेम का पानी हमारे खेतो में अतिक्रमण कर लेता हैं। सरकारी इंजीनियरो ने सर्वे गलत करा हैं। डूब क्षेत्र में हमारी जमीन आ जाती हैं इस कारण हमे मुआवजा चाहिए। लेकिन प्रशासन हमारी सुन नही रहा है। 

जब डेम में पानी भर जाता हैं। हमारा गांव टापू हो जाता हैं,हम प्रशासन को यही दिखाना चाहते थे,कि डेम का पानी अपनी सीमा तोड हमारी सीमाओ में घूस जाता है। क्यो कि प्रशासन मानने को तैयार नही है कि डेम का पानी हमारी सीमा में घुस आता है,इस कारण ग्रामीण इस डेम का पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे थे।
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