भाजपा के प्रेशर में चुनाव आयोग ने किया पितृपक्ष में मीडिया का श्राद्ध् | Shivpuri

ललित मुदगल @एक्सरे / शिवुपरी। अभी तक आम पब्लिक के लिए चौंकाने वाली खबरें आती रहती हैं, लेकिन अब मीडिया को चौंकाने वाली खबर भी आई है प्रदेश में आम चुनाव मुहाने पर खडे हैं, भाजपा ने पूरी तैयारी कर ली है कि कैसे चुनाव जीतना हैं। इसके लिए तैयारी में पहला चरण की तैयारी पितृपक्ष में मीडिया का श्राद्ध् करके किया हैं। आईए इस पूरे मामले में एक्सरे करते हैं।

जैसा कि विदित हैं कि प्रदेश में आम चुनाव मुहाने पर खड़े हैं इसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी तैयारी शुरू कर दी हैं। चुनाव से पूर्व कई मीडिया घरानो ने इस चुनाव में कांग्रेस की बढत बताई हैं और भाजपा की हार। एससी—एसटी एक्ट के खिलाफ नेताओ के प्रति खिलाफ माहौल बन रहा हैं। मीडिया के संपादक भी इस एक्ट के खिलाफ संपादकीय लिख रहे हैं।

इस बार चुनाव आयोग ने मीडिया के पर कतरना शुरू कर दिए हैं। अभी शिवपुरी में विधानसभा चुनाव को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी और जनसंपर्क अधिकरी की बैठक हुई जिसमें केवल जिले स्तर के पत्रकारों के चुनाव के लिए कार्ड जारी किए जाऐंगेें लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने मीडिया के लिए काला कानून बनाते हुए तहसील स्तर के पत्रकारों के चुनाव के कार्ड नही जारी करने का नियम बनाया हैं। 

जिला स्तर के पत्रकारों के लिए भी नियम बनाया गया हैं कि प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रिक मीडिया के अतिरिक्त सोशल मीडिया के केवल अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को ही चुनाव आयोग चुनाव मतदान केन्द्र और मतगणना स्थल पर में प्रवेश के कार्ड जारी करेगा और यह सर्व विदित हैं कि अधिकांश अधिमान्य पत्रकार हैं जो सत्ता के लिए चासनी परोसते हैं खासकर सोशल मीडिया के पत्रकार। जैसे एससी—एसटी एक्ट को संशोधित कर देश में जातिवाद की खाई भाजपा ने बनाई हैं ऐसे ही मीडिया में अब खाई पैदा करने की कोशिश की जा रही हैं; 

इससे पूर्व हर स्तर के पत्रकारों के निर्वाचन कार्ड जारी करता था। इस बार मीडिया के लिए नया काला कानून क्यो बनाया गया हैं। ऐसा क्यों किया गया हैं अभी स्पस्ट नही हैं, लेकिन इस नियम से यह प्रतीत हो गया है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र नही हैं, सत्ता के दबाब में है चुनाव आयोग को टास्क दिया हैं कि मीडिया की बीच मतभेद पैदा करो।

शिवुपरी में 5 विधानसभा क्षेत्र हैं। मीडिया के हिसाब से बात करे तो हर काम करने वाले समाचारो में प्रतिदिन रहने वाले अखबारों, चैनलों और सोशल पर चलने वाले पोर्टलों के जिले में लगभग 20 पत्रकार हैं। पूरे जिले के सभी संवाददाता दिन भर काम करते हैं जब आपको पूरे जिले की खबरो को आप तक पहुंचाते हैं। 

जिले के 5 विधानसभा हैं। सैकडो संवेदनशील पोलिंग बूथ हैं। ऐसे में एक समाचार पत्र का या चैनल का एक अकेला पत्रकार कैसे कवरेज करेंगा। सम्रझ से परे हैं। ऐसी स्थिती में निष्पक्ष चुनाव का सवाल खडा हो गया हैं। चुनाव आयोग का सबसे बडा पहला और बडा धर्म हैं कि निष्पक्ष चुनाव कराना। पत्रकारो के मतदान केन्द्र में और मतगणना केन्द्र में प्रवेश करने से चुनाव की निष्पक्षता कैसे आंच आ रही थी।

पत्रकारो को मतदान केन्द्र और मतदान केन्द्र से दूर रखने में अवश्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अवश्य सवाल खडे हो रहे हैं। यह खबर मिडिया की स्वतंत्रता पर तो हमला करती हैं साथ में कांग्रेस के लिए भी खतरे वाली खबर हैं। अब मिडिया को भी चुनाव आयोग की खबरो को भी निगलेट कर देना चाहिए और इसके लिए पत्रकरो के संगठनो को भी आवाज उठानी चाहिए नही तो सत्ता के प्रेशर में इस पितृपक्ष में मिडिया की स्वतंत्रता का श्राद्द तो कर दिया हैं। 
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1 comments:

News Analyzer said...

पत्रकारों को अपनी पत्रकारिता के संबंध में पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए हर उस विषय पर जो कि पत्रकारिता से संबंध रखता है महज पत्रकार ही एक ऐसा स्तंभ है जो न्याय कार्यपालिका पर जनहित में लोकहित में कार्य करने के लिए उन्हें प्रेरित कर सकता है और भ्रष्टाचार से उसे रोक सकता है परंतु आजकल कई पत्रकारों में ऐसा देखा जाना पाया ही नहीं जाता अगर इस कमी को हम पूरा कर दें तो मजाल है किसी नेता की जो पत्रकारों पर उंगली उठाने कर सत्ता का लाभ ले सकें

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