कमलनाथ को प्रदेश की कमान मिलने से सिंधिया खेमें में निराशा

शिवपुरी। आज मध्यप्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हुई उठापटक में कमलनाथ को कांग्रेस पार्टी की कमान मिलते ही शिवपुरी में सिंधिया खेमें के नेताओं में निराशा छा गई है। हांलाकि राहुल गांधी ने सांसद सिंधिया को चुनाब समिति का अध्यक्ष बनाया है। परंतु इससे खेमें में सन्नाटा पसर गया है। सोशल मीडिया पर भी सिंधिया के हर छोटे-छोटे कार्यक्रम के फोटो अपलोड़ करने बाले फेसबुकिए नेताओं की और से भी अभी कोई भी बधाई नहीं आई है। हांलाकि सीएम शिवराज सिंह ने इस नियुक्ति पर सिर्फ कमलनाथ को बधाई दी हैै। जबकि अपने आप का प्रतिद्धद्वि मान रहे सांसद सिंधिया के नाम का ट्विट पर जिक्र तक नहीं किया। इससे शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाने बाले कमलनाथ को कमान मिलने पर सीएम शिवराज सिंह भी खुश लग रहे है। 

2018 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश के मामले में कांग्रेस आलाकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की राय को अहमियत देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी है। दिग्विजय सिंह ने नर्मदा यात्रा के बाद कमलनाथ के नाम की खुलकर पैरवी की थी। हालांकि सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव अभियान समिति का चेयरमेन अवश्य बनाया गया है, लेकिन कांग्रेस की प्रेस रिलीज में उनका नाम दूसरे नम्बर पर है। 

कमलनाथ को प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने से यह लगभग तय माना जा रहा है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कमलनाथ के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री पद पर उनका सबसे सशक्त दावा रहेगा। कांग्रेस ने चुनाव हेतु फेस अवश्य घोषित नहीं किया है, लेकिन कमलनाथ को कांग्रेस का सीएम कैंडिडेट माना जा रहा है। कमलनाथ को कमान सौंपे जाने से शिवपुरी में सिंंधिया समर्थकों में निराशा है। 

मध्यप्रदेश में कांग्रेस मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए बिना चुनाव लड़ती आ रही थी। जबकि भाजपा ने चेहरा घोषित कर सत्ता पर काबिज होने में सफलता प्राप्त की। पूर्व के कड़वे अनुभवों को देखते हुए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रदेश में कांग्रेस आलाकमान से चेहरा घोषित कर चुनाव मैदान में उतरने की मांग की। उनके समर्थकों ने एक नारा भी दिया अबकी बार सिंधिया सरकार। जनता में भी उनकी संभावित नियुक्ति को लेकर उत्साह का वातावरण था। प्रदेश भाजपा सरकार में भी घबराहट का वातावरण था। भाजपा ने सिंधिया पर हमला करना शुरू भी कर दिया था। 

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से नजदीकी के कारण आशा बन रही थी कि या तो सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष घोषित किया जाएगा अथवा उन्हें सीएम कैंडिडेट बनाया जाएगा। लेकिन सिंधिया के खिलाफ कांग्रेस में एक सशक्त लॉबी ने सुनियोजित ढंग से काम करना शुरू किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने की परंपरा नहीं है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी ऐसा ही बयान दिया था, लेकिन मीडिया के पूछने पर उन्होंने कह दिया कि यदि पार्टी ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम कैंडिडेट घोषित करती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है इस बयान को सिंधिया समर्थन के रूप में प्रचारित किया गया। 

6 माह तक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नर्मदा यात्रा में व्यस्त रहे और उस दौरान सिंधिया के पक्ष में अच्छा माहौल बना। लेकिन नर्मदा यात्रा समाप्त होने के बाद दिग्विजय सिंह ने बयान दिया कि कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। पार्टी बैठक में भी उन्होंने कहा कि कमलनाथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता है और चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाना चाहिए। इससे कमलनाथ के प्रदेशध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया। वहीं प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाकर संतुष्ट करने का कांग्रेस आलाकमान ने प्रयास किया है। कांग्रेस की नई नियुक्तियों में रैंकिंग की दृष्टि से कमलनाथ सिरमौर हैं और सिंधिया को संगठन में नम्बर दो पोजीशन पर माना जा रहा है। 

चार कार्यकारी अध्यक्षों में रामनिवास अकेले सिंधिया समर्थक
कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री अशोक गहलोत ने प्रेस रिलीज मेें प्रदेश में चार कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति भी की है। इनमें रामनिवास रावत अकेले सिंधिया समर्थक हैं। दूसरे प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी दिग्विजय सिंह खेमे के हैं और सिंधिया के कट्टर विरोधी माने जाते हैं। तीसरे कार्यकारी अध्यक्ष बाला बच्चन कट्टर कमलनाथ समर्थक हैं जबकि चौथे कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी दिग्विजय सिंह समर्थक माने जाते हैं। 

पुराने रिश्ते हैं शिवराज और कमलनाथ के
बताया जाता है कि सीएम शिवराज सिंह और कमलनाथ के बीच पुरानी दोस्ती है। सिर्फ शिवराज सिंह ही नहीं भाजपा के कई नेताओं से कमलनाथ के मधुर रिश्ते हैं। कहा जाता है कि मप्र के सीएम शिवराज सिंह को भी कमलनाथ ने अपने कुछ कारोबारी मित्रों से मदद दिलवाई थी। व्यापमं घोटाले के समय एक बड़े कारोबारी का नाम चर्चाओं में आया था। मोदी के मित्रों में शुमार यह कारोबारी कमलनाथ का भी मित्र है। कहा जाता है कि शिवराज सिंह से इस कारोबारी की दोस्ती कमलनाथ ने ही करवाई थी। 

शिवराज की खुशी की दूसरा बड़ा कारण
सीएम शिवराज सिंह समेत पूरी भाजपा यह मान चुकी थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया सीएम कैंडिडेट होंगे। भाजपा को शिवराज सिंह पर पूरा भरोसा है। भाषण कला में उनका कोई मुकाबला नहीं हैं। जब वो मंच पर खड़े होते हैं तो कम से कम 45 मिनट बिना रुके बोलते हैं। बोलते भी ऐसा कि जनता बंध जाती है। श्रोताओं को मतदाताओं में बदलने का हुनर शिवराज को बेहतर तरीके से आता है। कांग्रेस में भाजपा की चिंता केवल ज्योतिरादित्य सिंधिया थे क्योंकि सिंधिया में भी वही आकर्षण है। वो भी मंच को संभालना जानते हैं।

भीड़ अपने आप उनकी तरफ खिंची चली आती है। लोग उनमें उम्मीदें देखते हैं। श्रोताओं को मतदाताओं में बदलने का हुनर सिंधिया के पास भी है। खुशी इसलिए कि अब कांग्रेस में गुटबाजी कायम हो गई है। सिंधिया को सीधा रास्ता नहीं मिला तो वो खुद को 4 कदम पीछे खींच लेते हैं। 2013 के चुनाव में भी ऐसा ही हुआ था। सिंधिया ने धमाकेदार शुरूआत की थी परंतु सीधा रास्ता नहीं मिला तो दिल्ली लौट गए थे। 2018 में भी अब यही संभावना है। शिवराज सिंह खुश हैं। उनका रास्ता साफ हो गया।  
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