
जानकारी के अनुसार मोहनदास बैरागी ने अपने 12 बीघा खेत को भतीजे दीपक बैरागी को बटार्ई पर दे रखा है। जिसमें दीपक ने चने की फसल की थी। जिसे काटकर उसने खेत में रख दिया था। रात्रि 12 बजे तक वह फसल की देखभाल करता रहा।
लेकिन रात अधिक होने के कारण वह सो गया। रात्रि करीब 3 बजे जब वह जागा तो खेत में आग लगी हुई थी और धुंआ उठ रहा था यह देखकर वह घबरा गया। तुरंत ही उसने आग लगने की सूचना परिजनों को दी। बाद में यह जानकारी पुलिस को लगी तो पुलिस मौके पर फायर बिग्रेड के साथ पहुंची उससे पूर्र्व ही खेत में रखी सारी फसल जलकर नष्ट हो चुकी थी।