इस खबर को केवल पत्रकार ही पढे: क्योंकि शिवपुरी में SAVE पत्रकारिता की आवश्यकता है

ललित मुदगल @एक्सरे/शिवपुरी। इस खबर को केवल शिवपुरी के मीडिय़ाकर्मी ही पढें क्योंकि यह खबर पत्रकार परिवार से ही संबंधित है। पत्रकार एकता के नारे के बाद मुझे यह लिखते हुए बड़ा ही दुख हो रहा है कि अब SAVE पत्रकारिता के लिए अभियान चलाने की जरूरत आन पड़ी है। यह जरूरत क्यों आन पड़ी, आईए इस पूरे मामले का एक्सरे करते है। 

बडे ही दुख के साथ सूचित करना पड रहा है कि इस समय शिवपुरी की मीडिय़ा दो धड़ो में बंट चुकी है और यह हुआ चहरे चमकाने वाले पत्रकारों और शिवपुरी की मीडिय़ा के सुपारी किलरों के कारण। मै भी ठगा रह गया हूॅ इस पूरे प्रकरण में, मैं भी हिस्सा था धरना पार्ट-1 टीम का। 

जैसा कि विदित है कि सयुंक्त मोर्चा का धरना प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या की अड़ियल पॉलिसी के कारण शुरू हुआ था। शर्त थी मेड़म माफी मागें या पत्रकारों से बातचीत करें। बातचीत का स्थल ना ही कलेक्ट्रेट होगा और न ही जिला पंचायत ऑफिस होगा। इसके अतिरिक्त कहीं भी हो सकता है लेकिन ऐसा नही हुआ, मेड़म ने ना ही बातचीत की और न ही इस मामले में खेद प्रकट किया। 

कमिश्नर के प्रतिनिधि मंडल के आग्रह पर संयुक्त मोर्च ने धरने को स्थगित कर दिया। शिवपुरी के पूरे प्रशासन के सामने धरना स्थल पर ही प्रभारी कलेक्टर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया और यह निर्णय लिया गया कि प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या का बहिष्कार आगे भी रहेगा। 

धरने के बाद पत्रकार जिंदाबाद के नारे आने लगे लेकिन अचानक ही इस पूरे घटनाक्रम में मिडिय़ा को सम्मान दिलाने मीडिय़ा का पार्ट-2 अस्तिव में आ गया। यह कैसे आया जानना आवश्यक है। बताया गया है कि संयुक्त मोर्चा के आंदोलन को शिवपुरी के कुछ पत्रकार पचा नही पाए और वैसे तो यह पत्रकार इस आंदोलन को शुरू से ही हाईजैक करना चाहते थे इस पूरे आंदोलन की सुपारी प्रशासन से ले बैठे थे। इस कारण उन्होने एक सोते हुए आदमी को घर जाकर जगाया और इस इस विद्रोह की कमान विद्रोही के हाथ में सौंप दी।  

मासूम विद्रोही को राजनीति का पता ही नहीं था। विद्रोही जम गए धरना पर। धरना पार्ट-2 शुरू। शिवपुरी के पत्रकारों की सम्मान की लड़ाई फिर एक बार पुन: शुरू लेकिन खत्म जिस अंदाज में हुई उससे ऐसा लगा कि सुपारी किलरो ने इस धरना पार्ट-2 की स्क्रिप्ट को पूर्व से ही फायनल कर लिया हो। 

धरना पार्ट-2 का मेडम से जिला पंचायत में मिलना। उसके बाद मेड़म का पीआरओ ऑफिस में आना और चर्चा करना। इस पूरे मामले को देखा जाए तो इसमें पत्रकारो को कैसा सम्मान कैसे मिला। समझ में नही आया। धरना पार्ट-2 को इस धरने की आवश्यकता थी। मेडम तो प्रेस को कलेक्ट्रेट या जिला पंचायत ऑफिस में पूर्व से ही बातचीत करने की कह रही थी। इसमें ऐसा खास क्या हुआ सवाल अभी भी धरना स्थल पर खडा है वह भी बिना टैंट और तम्बू के..। 

अपने राम का कहना है कि संयुक्त मोर्चे का धरना समाप्त करते समय एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया था कि इस विषय पर कभी भी मैडम से कभी बातचीत नही होगी। उनके कार्यक्रमो का बहिष्कार, खबरों का बहिष्कार होगा। इस निर्णय को कार्यक्रम को हाईजैक करने वाले पत्रकार पचा नही पा रहे थे क्योंकि वह तो शिवपुरी की मिडिय़ा की सुपारी लिए बैठे थे। 

इस पूरे घटनाक्रम में इस बात का उल्लेख करना बहुत ही आवश्यक होगा कि मेडम ने न ही जिला पंचायत में और न ही पीआरओ ऑफिस में माफी तो छोड़ो खेद भी नही प्रकट किया। अब धरना पार्ट-2 किस सम्मान की बात कर रहा था। क्या एक डिस्पोजल चाय में पूरा धरना पार्ट-2 बिना किसी सम्मान के डिस्पोजल हो गया। और यह दावा इस कारण भी मजबूत होता है कि मेडम का खेद का समाचार किसी भी समाचार पत्र ने प्रकाशित नही किया है। 

कुल मिलाकर इस पूरे घटनाक्रम से शिवपुरी की मिडिय़ा की हार हुई है, और जीत हुई है मेड़म की,जैसा कि वे शुरू से ही पत्रकार को फाड करना चाहती थी और वे इस काम में सफल हो गई। जैसे पूरे देश मे नारा चल रहा है कि सेव टाईगर वैसे ही यहां लिखना पड रहा है कि शिवपुरी में SAVE पत्रकार नही SAVE पत्रकारिता। 
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