भोपाल। मप्र क्राइम रिपोर्ट 2015 के अनुसार शिवपुरी एवं खंडवा की पुलिस मप्र की सबसे अमानवीय पुलिस है। यहां हिरासत में आरोपियों को गंभीर यातनाएं दीं जातीं हैं। 2 आरोपियों की पुलिस हिरासत में मौत के मुकादमे भी दर्ज हैं। इस मामले में शिवपुरी एवं खंडवा पुलिस मप्र के शेष जिलों की पुलिस से ज्यादा निर्दयी है।
सबसे ज्यादा अपराध इंदौर में
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जारी वर्ष 2015 में हुए अपराध के आकड़ों से। पिछले साल प्रदेश में कुल 2 लाख 70 हजार 300 अपराध दर्ज किए गए। इसमें से 23 हजार 465 अपराध अकेले इंदौर में हुए है। यही नहीं, संगीन अपराधों में भी इंदौर टॉप पर है। पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, अपहरण व महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे 13 प्रकरणों की जिलेवार सूची तैयारी की थी। इनमें से इंदौर सात मामलों में आगे है। गंभीर अपराधों के मामले में राजधानी किसी भी अन्य शहर के मुकाबले में अभी तक शांत है।
डकैती, दंगा चंबल में ज्यादा, जबलपुर में बच्चे चोरी
प्रदेश के जिन जिलों में सर्वाधिक अपराध दर्ज हुए हैं उसमें डकैती के मामले भिंड में सबसे ज्यादा (145 में से 22) हैं। वहीं दंगों के कुल 2205 मामलों में भी भिंड और मुरैना में (123-123) दोनों ही बराबरी पर है। दहेज को लेकर हत्याएं पिछले साल सबसे ज्यादा मुरैना में दर्ज की गई। प्रदेश में जहां वर्ष 2015 में दहेज हत्या के कुल 664 मामले सामने आए, इनमें से 37 मुरैना के हैं जो सर्वाधिक है।
डकैती से पहले गिरफ्तारियों में ग्वालियर आगे
इधर डकैती की तैयारी करते हुए धराए गए लोग ग्वालियर में ज्यादा पकड़ाए। इस तरह के 217 मामले पिछले साल दर्ज हुए, जिसमें ग्वालियर 61 मामलों के साथ टॉप पर है। यहीं नहीं, योजनाबद्ध हत्या के मामले में भी 13 मामलों के साथ ग्वालियर ही आगे है। वैसे इस तरह के प्रदेशभर में 132 मामले सामने आए हैं। उधर, बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराध सबसे ज्यादा जबलपुर में दर्ज किए गए। प्रदेशभर में इनकी संख्या 12 हजार 715 थी, इनमें अकेले जबलपुर में 874 प्रकरण दर्ज किए गए।