ऐसा धर्म हमारा कल्याण नही कर सकता: मुनिश्री अभय सागर

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। जो हमारे अंदर भरा है वही बाहर आ जाये तो समझना जीवन में आर्जव धर्म का आगमन होने लगा है। परंतु प्राय:कर देखने में ये आता है कि व्यक्ति आज अपना विज्ञापन करता है। होता कुछ है और दिखाता कुछ है। बाहर में धर्म का आवरण को धारे है और अंतरंग में कुटिलता की नागिन को पाला है।

धर्म करने के लिये कुछ अलग करने की आवश्यकता नहीं होती, बस बाहर और भीतर एक हो जाओ । इसी का नाम आर्जव धर्म है। उक्त उद्गार स्थानिय महावीर जिनालय में उत्तम मार्दव दसलक्षण धर्म के अवसर पर वहाँ चार्तुमास कर रहे पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य पूज्य मुनि श्री अभय सागर जी महाराज, पूज्य मुनिश्री प्रभातसागर जी महाराज एवं पूज्य मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज ने दिये।

प्रारंभ में पूज्य मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज ने कहा कि- धर्म दस दिनों के लिये नहीं आये हैं परंतु हमें झकझोरने आये है। ऐसा नहीं है कि आज आर्जव धर्म की बात करें तो क्षमा को छोड़ दें।

जैसे रेलगाड़ी के सभी डिब्बे एक साथ चलते हैं और गाड़ी विभिन्न स्टेशनों को छोड़ती हुई आगे बड़ती जाती है, उसी प्रकार हम अपनी कशयों को छोड़ते हुये इन सभी धर्म रूपी डिब्बों से जुड़े रहेंगे। तभी आपकी हमारी गाड़ी धर्म मार्ग पर बड़ती हुयी मोक्ष मार्ग तक पहुंचेगी।

परंतु आज होता ये है कि बाहरी आवरण में तो धर्म झलक रहा है और अंतरंग में कशायें पनप रही हैं। ऐसा धर्म किसी काम की नहीं। ये आवरण किसी काम नहीं आयेगा। आज धर्म बगुले के समान दिखावे का धर्म रह गया है। ऐसा धर्म तु हारा कुछ भी कल्याण करने वाला नहीं है। अत: इन धर्मो को सदा के लिये जीवन में अपनाओ तभी कुछ कल्याण संभव है।

पूज्य मुनि श्री प्रभातसागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि- जो अंदर है वही बाहर आ जाये तो समझना जीवन में आर्जव धर्म का आगमन हो रहा है। परंतु होता उल्टा है, आज मानव धर्म तो करता है पर दिखाने के लिये करता है। कुटिल व्यक्ति कभी धर्म नहीं कर सकता। जिसके अंतरंग में मायाचारी है उसे तिर्यंच गति का ही बंध होता है।

जिस प्रकार श्रृंगार हमारे नकलीपन का विज्ञापन है, उसी प्रकार जो हमारे अंदर नहीे उसक दिखाना मायाचारी का गुण है। वक्र व्यक्ति करेगा कुछ, दिखायेगा कुछ और कहेगा कुुछ। ऐसा व्यक्ति स्वयं के लिये अच्छा तो करना चाहता है, परंतु वही उसके लिये पतन का कारण बनता है। अत: हमें भी ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिये।

दिनाकं 21 सिंतम्बर के कार्यक्रम
आज प्रात: 6:20 से 8:20 तक नित्य नियम अभिषेक-शांतीधारा, पूजन, 8:30 बजे से उत्तम मार्दव धर्म पर पूज्य मुनित्रय के मंगल प्रवचन होंगे। दोपहर 2:30 से तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया जायेगा तथा पूज्य मुनिश्री अभयसागर जी द्वारा तत्वार्थ सूत्र के तृतीय अध्याय का अर्थ बताया जायेगा।

सांयकाल 6:00 बजे गुरूभक्ति, 7:00 बजे आरती एवं भजन तथा रात्रि 8 बजे से सांगानेर से पधारे भैयाजी के प्रवचन होंगें। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंृखला में आज रात्रि 9 बजे से त्रिसला मंडल द्वारा प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन महावीर जिनालय में रखा गया है।
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