पुलिस की मक्कारी पर सब चुप थे, फरियादी ने शोर मचाया तो कार्रवाई कर दी

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शिवपुरी। समाज में बगावत लाने का दोष यदि किसी विभाग को दिया जाना चाहिए तो वह पुलिस विभाग ही हो सकता है। मारपीट के एक मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की, मामले को टाल दिया, लेकिन जब पुलिस की इस बात का आईअीवीपी के एक जवान ने विरोध किया और विरोध करते करते अमर्यादित हो गया तो पुलिस ने तत्काल उसके खिलाफ कार्रवाई कर डाली।

हर खासोआम से अमर्यादित भाषा में बात करने वाली पुलिस को जब आईअीवीपी के एक जवान ने गालियां सुनाईं तो करैरा पुलिस सहन नहीं कर पाई। जबकि यही पुलिस मारपीट के एक मामले में आरोपियों का साथ देने की आरोपी है।

जानकारी के अनुसार करैरा में रहने वाले राजेश जाटव के साथ दो दिन पूर्व अज्ञात लोगों ने मारपीट कर दी थी। पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। उसे बेइज्जत कर भगा दिया।

पुलिस के द्वारा कोई ठोस कार्यवाही न करने से नाराज होकर राजेेश का भाई सोनू उर्फ अशोक जाटव उम्र 28 वर्ष जो आईटीवीपी जवान है और अभी जम्मू कश्मीर में पदस्थ होकर होली पर 15 दिन के अवकाश पर करैरा अपने घर आया था। पुलिस थाने पहुंचा और टीआई की जमकर खरीखोटी सुनाई। पुलिस का आरोप है कि अशोक ने उन्है गालियां दी और देख लेने की धमकी तक दी। पुलिस ने अपनी ज्यादा बेईज्जती होते देख इस जवान को हिरासत मेें ले लिया और 151 की कार्यवाही कर एसडीएम न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेजने की कार्यवाही की गई।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर उसे ऐसा करना ही क्यों पड़ा। यदि पुलिस फरियादी की बात सुनती और उचित कार्रवाई करती तो यह नौबत ही ना आती। मजेदार बात देखिए कि प्रतिक्रिया स्वरूप अमर्यादित भाषा में बात करने वाला सिपाही जेल में है लेकिन मारपीट के मामले में कार्रवाई ना करने वाला टीआई निष्कलंक।

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