वात्सल्य समूह के अध्यक्ष डॉ. दिलीप और महासचिव मुकेश बने

Updesh Awasthee
शिवपुरी। समाजसेवी संस्था वात्सल्य समूह की नवीन कार्यकारिणी 2015-16 का गठन किया गया है जिसमें दो वर्ष के लिये पदाधिकारियों का मनोनयन सर्वस मति से किया गया है।
जिसमें अध्यक्ष डॉ. दिलीप जैन को मनोनीत किया गया है अन्य पदाधिकारियों में उपाध्यक्ष इंजी. राकेश जैन, अजय जैन, विनोद जैन पोहरी, अजय जैन कोलारस, महासचिव मुकेश जैन, सचिव संजय जैन, सहसचिव पंकज जैन, अभिनंदन जैन, नरेन्द्र जैन, पंकज कोलारस, निर्मल जैन पारस और शिखरचंद जैन, कोषाध्यक्ष राजकुमार जैन साखनौर वाले बनाये गये हैं। संस्था के अध्यक्ष डॉ. दिलीप जैन ने बताया कि नवीन कार्यकारिणी कार्यकाल दो वर्ष है।  संस्था का स्थापना दिवस एवं जैन समाज के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का स मान 15 फरवरी 2015 रविवार को किया जायेगा।

*संत और सूर्य कभी एक जगह नहीं टिकते। ये जहां जाते हैं अंधकार मिटाते हैं और रोशनी फैलाते हैं। संत बहता पानी और चलती हवा जैसा होता है। संत तो सुगंध है। सुगंध फैलाने का काम है। संत की महिमा बताने का काम श्रावक है। संत एक नई सुबह का आगाज है जो साधना में है वह संत है, जो साधना में नहीं है तो समझना पेट भरने वालों की जमात है।

तर्क से बचें इससे तकरार बढ़ती है
तर्क न करें क्योंकि तर्क से तकरार बढ़ती है। समर्पण से सौहाद्र्र बढ़ता है। तर्क सिर्फ उलझाता है। समर्पण समाधान देता है। सास ने कहा यों। बहू ने कहा क्यों। बस यहीं से महाभारत शुरू हो जाती है जो सुख समर्पण में है वह अकड़ में कहां। जो सुख झुकने में है वह तनने में कहां। तर्क नर्क है, समर्पण स्वर्ग है। समर्पण में जियें।

प्रसन्नता और प्रणाम से करिये दिन की शुरूआत
दिन की शुरूआत प्रसन्नता और प्रणाम से करिये। जो व्यक्ति सुबह उठते ही एक मिनट भी मुस्कुराता है उसे पूरे दिन का पॉवर टॉनिक मिल जाता है और जो व्यक्ति मां-बाप, गुरू और प्रभु के चरणों में घुटने टिकाता है उसे जिंदगी में कभी किसी के सामने घुटने नहीं टेकने पड़ते। जिसके पास दुआओं की दौलत है सही मायने में वही अमीर है। इस दौलत की बदौलत ही व्यक्ति दौलतमंद होता है। 

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