करैरा में कांग्रेस की कमजोरी से खिल सकता हैं कमल...

शिवपुरी। नगर पंचायत करैरा के अध्यक्ष पद पर इस बार जोरदार घमासान देखने को मिला। निर्दलीय प्रत्याशी दमयंती मिश्रा के पुत्र पुष्पेन्द्र मिश्रा की रासुका में गिर तारी से मुकाबला और जोरदार हो गया। इससे दमयंती मिश्रा मुकाबले में वापिस लौटीं और कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती गई।
यहां भाजपा प्रत्याशी कोमल साहू और निर्दलीय प्रत्याशी दमयंती मिश्रा के बीच जीत हार का फैसला होने की उ मीद है। पलड़ा भले ही भाजपा प्रत्याशी कोमल साहू का भारी दिख रहा हो, लेकिन यदि वैश्य मतों का अधिसं यक हिस्सा कांग्रेस प्रत्याशी वीनस गोयल लेने में सफल रहे तो आश्चर्यजनक रूप से निर्दलीय प्रत्याशी दमयंती मिश्रा भी चुनाव जीत सकती हैं।

कोलारस में जहां दस साल से शिवहरे दंपत्ति अध्यक्ष पद पर काबिज हैं वहीं करैरा में साहू दंपत्ति का भी यही कीर्तिमान है। अंतर सिर्फ इतना है कि शिवहरे दंपत्ति ने जीत कांग्रेस उ मीदवार के रूप में हासिल की। जबकि साहू दंपत्ति ने 2004 और 09 के चुनाव में निर्दलीय उ मीदवार के रूप में विजयरथ आगे बढ़ाया। इस चुनाव में ऐसा लग रहा था कि भाजपा अरविंद बेडर को उ मीदवार बनाएगी, लेकिन भाजपा ने ऐसा न करते हुए कोमल साहू को उ मीदवार बनाया जबकि कोमल साहू ने टिकट के लिए आवेदन भी नहीं किया था।

कांग्रेस ने वीनस गोयल की उ मीदवारी घोषित की और दमयंती मिश्रा ने कांग्रेस के बागी उ मीदवार के रूप में फॉर्म भरा। कांग्रेस ने विधायक की इच्छा के कारण कमजोर प्रत्याशी वीनस गोयल पर दाव लगाया। जबकि उसके पास रवि गोयल के रूप में एक मजबूत प्रत्याशी था। साहू दंपत्ति की जीत का आधार अल्पसं यक और साहू जाति के मत बनते रहे हैं। यहां 19 हजार मतदाताओं में से लगभग 3200 अल्पसं यक वर्ग के मतदाता हैं और साहू जाति के मतदाताओं की सं या दो से ढाई हजार है। कोमल साहू के भाजपा उ मीदवार के रूप में चुनाव लडऩे से अल्पसं यक मतों के उनके पक्ष में बिखरने का खतरा पैदा हुआ।

लेकिन सूत्र बताते हैं कि श्री साहू ने भाजपा की साफी न पहनकर उनका दिल जीतने का काम किया। उनकी अगर जीत हुई तो इसका श्रेय मुस्लिम और साहू मतों उनके पक्ष में धु्रवीकरण को दिया जा सकता है। प्रचार के प्रारंभिक चरण में दमयंती मिश्रा मुकाबले से बाहर हुईं, लेकिन चुनाव के दौरान उनके पुत्र की गिर तारी से उनका ग्राफ तेजी से बढ़ा और ब्राह्मण मत उनके पक्ष में एकजुट हुए। जहां तक वैश्य मतों का सवाल है उनमें सेंध लगाने का काम कोमल साहू ने किया। बताया जाता है कि यदि अधिसं यक वैश्य मत वीनस गोयल लेने में सफल रहे तो कोमल साहू की जीत पर खतरे के बादल मंडरा सकते हैं। जहां तक धनबल का सवाल है तो एक पार्टी विशेष के प्रत्याशी ने पानी की तरह पैसा बहाया।

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