विक्रय से वर्जित भूमि के विक्रय मामले में राजस्व कर्मचारियों की भी होगी जांच

shailendra gupta
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शिवपुरी। पोहरी तहसील के ग्राम देवरीकलां में जमीन के फर्जीवाड़े में विक्रय से वर्जित जमीन की नकली भू-अधिकारी ऋण पुस्तिका एवं खसरे की नकल तैयार कर क्रेता कृषक सोनेराम कुशवाह से साढ़े 22 लाख रुपये ठगी मामले में राजस्व कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी।
कलेक्टर आरके जैन ने फरियादी सोनेराम कुशवाह की शिकायत पर एसडीएम पोहरी को जांच सौंपी है। 20 मई 2014 के इस आदेश में कलेक्टर ने पटवारी सुनीता रावत, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार पोहरी की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया है। 

वहीं पुलिस इस मामले में विक्रेतागण खैरू  पुत्र जगराम खंगार, सोमवार पत्नी खैरू खंगार, परमाल पुत्र बारे जाटव, बसंती पत्नी परमाल जाटव, नरेश पुत्र जगराम बराई, मिथलेश पत्नी नरेश, गजाधर पुत्र मनुआ जाटव, बिंद्रा पत्नी गजाधर जाटव, जशराम पुत्र बद्री खंगार, गीता पत्नी जसराम, सोनेराम पुत्र बाबूलाल जाटव, सुनीता पत्नी सोनेराम जाटव, रघुवीर पुत्र झींगुरिया खंगार के अलावा बिचौलिये की भूमिका अदा करने वाले दौलतराम कुशवाह, रतिराम कुशवाह, हरिबल्लभ धाकड़ और कल्ला रावत के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए मामले की जांच कर रही है। एसडीओपी एसएन मुखर्जी ने इस बावत फरियादी के बयान भी दर्ज कर लिये हैं। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी सोनेराम कुशवाह ने ग्राम देवरीकलां में सर्वे क्रमांक 809/7, 809/16, 809/20, 809/21, 809/15, 809/23, 809/24 की लगभग 40 बीघा जमीन का सौदा 13 विक्रेताओं से चार दलालों के माध्यम से तीन अनुबंध के जरिये 7 लाख 75 हजार रुपये की बयाना राशि देकर किया। चूंकि उक्त जमीन विक्रय से वर्जित थी इस कारण अनुबंध में स्पष्ट रूप से इस बात का जिक्र था कि विक्रेतागण कलेक्टर से अनुमति लेकर रजिस्ट्री कराएंगे और यदि वह अनुमति लेने में असफल होते हैं तो वे क्रेता सोनेराम कुशवाह को बयाने की राशि ब्याज सहित अदा करेंगे। साढ़े 22 लाख रुपये के सौदे में शेष राशि रजिस्ट्री के वक्त देना तय किया गया। 

इसके बाद विक्रेतागण छह फर्जी भू-अधिकार ऋण पुस्तिका एवं खसरे की नकल लेकर आए जिसमें जमीन विक्रय से वर्जित का कॉलम नहीं था। इस बावत भू-अधिकार ऋण पुस्तिका क्रमांक एलजी 569949, एलजी 562951, एलजी 562985, एलजी 569152, एलजी 562831, एलजी 562791 उन्होंने क्रेता सोनेराम को दी। किताबों में भूमि विक्रय से वर्जित होने का कोई इंदराज अंकित नहीं है और उस पर तहसीलदार पोहरी एवं ग्राम पटवारी के हस्ताक्षर हंै। इसके साथ-साथ भूमि के खसरे की प्रमाणित प्रतिलिपियां क प्यूटर नकल शाखा से फरवरी और मार्च माह में जारी हुईं थीं वे दीं गईं। इस भरोसे क्रेता ने विक्रय की शेष राशि विक्रेताओं को अदाकर जमीन की पॉवर ऑफ अटोर्नी अपने नाम ले ली और रसीद भी प्राप्त कर ली।

इस मामले में क्रेता का कहना है कि उसने पॉवर ऑफ अटोर्नी इसलिए ली क्योंकि उस समय रजिस्ट्री कराने के लिए उसके पास धन नहीं था। यह मामला तब उजागर हुआ जब पॉवर ऑफ अटोर्नी लेने के 10-11 माह बाद रजिस्ट्री कराने के लिए के्रता सोनेराम कुशवाह क प्यूटर शाखा में खसरे की नकल लेने 19 फरवरी 2014 को गया तब उसे विदित हुआ कि उक्त जमीन अभी भी विक्रय से वर्जित बनी हुई थी तथा खसरे की फर्जी नकल उसे दी गई थी। इसके बाद जब वह पटवारी सुनीता रावत से मिला तो वहां भी उसे विदित हुआ कि भू-अधिकार ऋण पुस्तिका में विक्रय से वर्जित प्रविष्टी दर्ज बनी हुई थी। तब से अब तक सोनेराम न्याय के लिए भटक रहा है। 

सरकारी रिकॉर्ड में विवादित विक्रेताआं के नाम है जमीन
इस मामले में विक्रेता अब उक्त जमीन की मुआवजा राशि लेने की तैयारी में हैं। उक्त जमीन सरकारी रिकॉर्ड में अभी भी विवादित विक्रेताओं के नाम बनी हुई है और डूब क्षेत्र में आने के कारण उक्त जमीन को शासन अधिग्रहित कर रहा है और नियमानुसार उक्त जमीन का 40 लाख रुपये मुआवजा विक्रेतागण लेने की तैयारी में जुटे हुए हैं। लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि फर्जीवाड़ा पूरी तरह से उजागर हो गया है इसके बाद भी ठगी करने वाले सुगठित गिरोह के विरूद्ध न तो प्रशासन और न ही पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाही की है जिससे ठगों के हौंसले बुलंद बने हुए हैं।


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