मोदी ने पवैया को इशारों ही इशारों में दी नसीहत

shailendra gupta
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शिवपुरी। शिवपुरी-गुना लोकसभा क्षेत्र में सिंधिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे भाजपा के उम्मीदवार जयभान सिंह पवैया सिंधिया का अजेय रथ रोकने के लिए सांमतवाद को हथियार बनाया है। उन्होने अपने खुल्ले शब्दो में कहा की श्रीमंत और महाराजा जैसे शब्दो का प्रयोग करने वाले लोग मेरे पास कुल्ला करके आएं परन्तु मोदी की सभा राजमाता से ही शुरू और राजमाता पर ही जाकर खत्म हुई।

मोदी के भाषण के पूर्व पवैया ने जहां खुलकर कहा कि देश में कोई राजा, महाराजा और महारानी नहीं है, कोई राजमाता नहीं सिर्फ एक ही मां भारत माता है और बड़ी से बड़ी कुर्सी का लालच भी मुझसे किसी को महाराज और श्रीमंत नहीं कहला सकता। इसके पूर्व राजमाता विजयाराजे सिंधिया की समाधि की मिट्टी को श्री पवैया किसी खानदान के मरघटे की मिट्टी कह चुके हैं। 

उन्हीं पवैया के समक्ष गांधी पार्क की सभा में नरेन्द्र मोदी ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया के सम्मान में पलक पावड़े बिछा दिए। राजमाता की नम्रता, विनय, जनता के प्रति प्रेम और मातृत्व भाव की उन्होंने भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए यहां तक कहा कि उन्होंने मेरी चिंता की, मैं उनके क्षेत्र की चिंता करूंगा और उनके अधूरे सपनों को पूरा करूंगा।  

मोदी ने यशोधरा राजे सिंधिया को अपनी छोटी बहन बताया, लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति श्री पवैया ने कठोर से कठोर शब्दों का इस्तेमाल कर एक तरह से श्री पवैया को सामंतवाद के असली मायने बताए। उनके शब्दों का अर्थ समझें तो श्रीमंत और महाराजा शब्द सामंतवाद के प्रतीक नहीं, बल्कि अहंकार सामंतवाद का प्रतीक है।

शिवपुरी की सभा में नरेन्द्र मोदी ने जब अपने भाषण की शुरूआत राजमाता के व्यक्तित्व की महानता और उनके ममत्व भाव को शब्दों की माला में पिरोना शुरू किया तो श्री पवैया को खुद ब खुद जवाब मिलना शुरू हो गया। श्री मोदी ने बताया कि  वह मुरली मनोहर जोशी की काश्मीर यात्रा के संदर्भ में शिवपुरी में आए थे। वह तथा उनके साथी बहुत थके हुए थे और थकान इतनी गहरी थी कि बिना कुछ खाए-पीए सो गये थे तब आधी रात को कमरे का दरबाजा राजमाता ने खटखटाया। हम जब बाहर निकलकर आए तो देखा कि वह मां अपने हाथों में दूध का गिलास लिए थी और कह रहीं थीं कि कुछ खाया नहीं है दूध पीकर सो जाओ। उन्होंने मनुहार कर हम सब को दूध पिलाया। एक मां का दिल क्या होता है? यह मैंने राजमाता के व्यक्तित्व में देखा था।

राजमाता की तुलना उन्होंने इसके बाद यहां के सांसद से की और मोदी बोले कि कहां राजमाता और कहां आपके सांसद! बकौल मोदी, मैंने कभी किसी में इतना अहंकार नहीं देखा जितना उनमें है। साउदाहरण समझाते हुए श्री मोदी ने कहा कि ऊर्जा मंत्री के  रूप में इस क्षेत्र में अच्छा कार्य करने वाले राज्यों को पुरस्कृत करने के समारोह में उन्हेें आना था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि गुजरात को अच्छा काम करने के लिए चार पुरस्कार मिल रहे हैं तो उन्होंने समारोह में आना स्थगित कर दिया। कहां से आया उनमें इतना अहंकार? इसे भी श्री मोदी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वह शहजादे की संगत में रहते हैं और इसी संगति के कारण उनमें अहंकार आया है।

श्री मोदी पूरा होमवर्क कर आए थे और सांसद के खिलाफ आग उगलते हुए उन्होंने कहा भी कि पहले वह हाथ हिलाते थे वह हाथ भी आजमा लेते हैं फिर हाथ की सफाई शुरू हो जाती है। अब हाथ मिला रहे हैं। कटाक्ष करते हुए श्री मोदी ने कहा कि मै बहुत कम बार शिवपुरी आया हूं, लेकिन इसके बाद भी जितने अधिक यहां के लोगों से मैंने हाथ मिलाया है उतने लोगों से तो आपके सांसद ने भी हाथ नहीं मिलाये। उन्होंने कहा कि राजमाता ने मेरी चिंता की है, मैं उनके क्षेत्र की चिंता करूंगा और उनके अधूरे सपनों को पूरा करूंगा।

मोदी के शब्दों को यदि पवैया समझें तो अर्थ स्पष्ट है कि राजा के घर में जन्म लेने से कोई सामंतवादी नहीं होता। सामंतवाद तो एक मानसिकता है और अहंकार ही इंसान को सामंतवादी बनाता है, भले ही ऐसा व्यक्ति किसी साधारण घर में ही क्यों न जन्मा हो।

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