श्री बांकड़े हनुमान मंदिर पर कथा में उमड़ा जनसैलाब

shailendra gupta
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शिवपुरी-भक्त की भक्ति से भगवान प्रसन्न होते है ईश्वर के प्रति भक्ति का यदि अटूट संगम देखना है तो इसके लिए भक्त प्रहलाद की भक्ति को देखें और जानें के अपने ईश के प्रति समर्पित भाव से समर्पण होकर की जाने वाली भक्ति कभी बेकार नहीं जाती, तभी हम प्रहलाद जैसे सच्चे भक्त की भक्ति की जानकार अपने जीवन को भी उसी अनुरूप में ढालने का प्रयास करें।
ऐसी भक्ति का मार्ग श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से भक्त प्रहलाद की कथा का चरितार्थ करते हुए व्यासपीठ से प्र यात भगवाताचार्य आचार्य डॉ.गिरीश जी महाराज ने उपस्थित श्रोतागणों को बताया और उस मार्ग पर चलकर प्रभु प्राप्ति की कथा का विस्तृत वर्णन भी सुनाया। कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुजन भक्ति भाव से कथा का श्रवण कर भावविभोर होकर भक्ति में लीन नजर आए। कथा में नन्दोत्सव व श्रीराम जन्म उत्सव व गोवर्धन पूजन के लिए विशेष तैयारियां की गई है।

इन्होंने पाया प्रभु भक्ति का सौभाग्य

स्थानीय श्री बांकड़े हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में प्रतिदिन भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन आचार्य डॉ.गिरीश जी महाराज द्वारा किया जा रहा है। कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का सौभाग्य श्रीमती कीर्ति-इंजी.बृजेश भार्गव ने जबकि श्री गोवर्धन पूजा उत्सव का सौभाग्य श्रीमती सुनीता-हरिशंकर दुबे ने, श्रीरूकमणि विवाह उत्सव श्रीमती रामप्यारी-माखन लाल राठौर पूर्व विधायक व श्री तुलसी विवाह उत्सव का सौभाग्य श्रीमती अंगूरी-रामस्वरूप गुप्ता ने प्राप्त किया है इसके साथ ही श्रीमद् भागवत कथा के अष्टोत्तरशत यजमान भी इस पुण्य लाभ में सहभागी बनेंगें।

महाराश्री ने विभिन्न कथा प्रसंगों को सुनाया

कथा के अगले चरण को बढ़ाते हु महाराजश्री ने भक्त प्रहलाद की कथा बड़े ही सारगर्भित शब्दों में बखान करते हुए बताया कि जिस प्रकार से भक्त प्रहलाद ने अबोध अवस्था में ही प्रभु की दर्शन की मन में लालस की और उसे पूरा करके रहे जहां अपनी भक्ति से भक्त प्रहलाद ने राक्षस कुल को भी पवित्र कर दिया ठीक उसी प्रकार मानव को भी प्रभु दर्शन प्राप्त करने के लिए प्रहलाद की भांति भक्ति करना चाहिए जहां सच्चे हृदय की गई भक्ति कभी बेकार नहीं जाती और भक्त की इसी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान भक्त के वश में होकर उसे दर्शन कर उसके जीवन को धन्य बनाते है। प्रभु की भक्ति का यह मार्ग प्राप्त करने वाले श्रोतागण भक्त प्रहलाद के कथा प्रसंग पर भाव विभोर हो गए और संगीत की समधुर लहरियों पर नाच गाकर प्रभु भक्ति करने लगे। वहीं कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य डॉ.गिरीश जी महाराज ने भूगोल-खगोल अजमिल आ यान का वर्णन सुनाया वहीं चित्रकेतु की कथा का भी विस्तृत वर्णन सुनाया इन्हीं कथाओं के माध्यम से आचार्य श्री ने बलि और बामन अवतार की कथा का वर्णन सुनाया जिसे सुनकर भक्तजनों में प्रभु भक्ति की आस जगी। कथा समापन पश्चात रात्रि में श्रीकृष्ण महारासलीला का भी भव्य आयोजन किया गया है सभी धर्मप्रेमियों से इस धार्मिक आयोजन में सपरिवार शामिल होने का आग्रह किया है।


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