इंसाफ के लिऐ भटक रहा है गरीब

shailendra gupta
राजू (ग्वाल) यादव/शिवपुरी-एक सामान्य आमजन अपनी मुसीबतों से इस कदर परेशान हो जाए कि वह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो, लेकिन उसे उसकी समस्या का समाधान ना मिले तो वह क्या करें, कुछ ऐसी ही विपदा में घिरा है करैरा निवासी शीतल प्रसाद जाटव जो विद्युत विभाग की मनमानी और विभाग की गलतियों की सजा स्वयं भुगत रहा है।

इसके लिए उसे कुछ समय में जेल में भी बिताना पड़ा लेकिन उसकी विद्युत समस्या आज भी जस की तस है। विद्युत विभाग द्वारा शीतल के घर भेजा गया बिल इतना भारी है कि वह उसे चुकाने में असमर्थ है ऐसे में विभाग को लिखित रूप से मीटर कटाने की शिकायत करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी है जिससे उसका जीवन संकट है। थक-हारकर जिला प्रशासन से शीतल ने गुहार लगाई है कि उसे न्याय नहीं मिला तो वह अपना जीवन बर्बाद करने को बाध्य होगा। अब कार्यवाही जिला प्रशासन को करना है।

जिले के करैरा में वार्ड 12 न्यू कॉलोनी में रहने वाले शीतल प्रसाद पुत्र मंगी प्रसाद जाटव का विद्युत कनेक्शन कटने के बाद भी बिजली विभाग द्वारा लगातार बिल भेज जा रहा है। गौरतलब है कि शीतल प्रसाद जाटव के घरेलू कनेक्शन बिजली बिल का 14468 रूपया का बिल बकाया था इस वजह से बिजली विभाग ने उन पर केस दर्ज कर करैरा न्यायलय में पेश किया। जहां से न्यायलय ने शीतल जाटव को जेल भेज दिया। वहीं शीतल के परिजनो ने जैसे-तैसे कर बिजली विभाग का बिल जमा भी कर दिया और एक माह वाद शीतल प्रसाद जाटव को जेल से रिहा किया गया। 

शीतल प्रसाद जाटव के जेल से रिहा होने से पूर्व बिजली विभाग ने इनके घर से बिजली का मीटर निकाल कर कनेक्शन को विच्छेद कर दिया लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही से इस गरीब दलित को 10  जून  2013 को पुन: 15359 रूपये का बिल थमा दिया है अब शीतल प्रसाद जाटव इस बिल को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। जहॉ इस गरीब की कोई सुनवाई नही हो रही है। 

कई बार शिवपुरी आकर भी जिला प्रशासन को जनसुनवाई में भी आवेदन देकर शिकायत की पर जनसुनवाई केवल औपचारिकता बन कर रह गई है और आज भी शीतल को पुन: बेबजह जेल जाने का भय सता रहा है। वही बिजली विभाग के कर्मचारी इसे विभाग की गलती बता रहे है पर विद्युत विभाग के अधिकारी इस गरीब की बात सुनने को तैयार नही है। यहां तक कि ये गरीब दलित अपना आवेदन स्वयं भोपाल जाकर  मुख्यमंत्री  को दे चुका है पर गरीब की अभी तक कोई सुनवाई नही हुई हैं। 

इस गरीब दलित पर मुसीबतो का पहाड़ टूट पडा है। एक तरफ तो बिजली न जलाने पर बिजली विभाग के द्वारा दिया गया हजारो रूपय का बिल और दूसरी तरफ पत्नी को केंसर जैसा घातक रोग है। वह उसका इलाज नही करवा पा रहा है। शीतल प्रसाद का कहना है कि अगर उसकी इस परेशानी को दूर नहीं किया गया तो वह अपनी जिन्दगी को खत्म करने पर मजबूर होगा। हालांकि इस बात की पुष्टि शीतल ने नहीं की लेकिन वह अपनी परेशानियों से बहुत परेशान है। ऐसे में जिला प्रशासन को चाहिए कि वह इस गरीब की सुध लेकर हर संभव न्याय व सहायता प्रदान करें।

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