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12/28/2011

माफियाओं के पिंजरे में कैद शिवपुरी का सफेद सोना

संजीव पुरोहित
शिवपुरी-शिवपुरी जिला खनिज सम्पदा की विशाल धरोहर अपने आगोश में समेटे हुए है लेकिन न जाने क्यों कुछ लोग अपने निजी हितों को साधने के लिए इस खनिज सम्पदा को नेस्तनाबूत करने में जुटे हुए है। ऐसा नहीं है कि इस बारे में प्रशासन को खबर नहीं बल्कि वह भी सबकुछ देखकर हाथ पर हाथ धरे शांत बैठा हुआ है यदि शीघ्र ही  इस ओर कोई कार्यवाही नहीं की गई तो वह दिन भी दूर नहीं जब माफियाओं के पिंजरे में कैद शिवपुरी का सफेद सोना एक सपना बनकर ही रह जाएगा।


जिले के पिछोर क्षेत्र में सर्वाधिक खदान व नदियां है और इस सफेद सोने को कुछ निजी स्वार्थी तत्व अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए अपनी कैद में शिवपुरी के सफेद सोने को दबाकर बैठे हुए है और चोरी छुपे अवैध उत्खनन कर खनिज संपदा को नुकसान पहुंचाने में तल्लीन है।

इसका जीता जागता उदाहरण शिवपुरी जिले की पिछोर तहसील में देखने को मिल सकता है। जहां पिछोर छत्रसाल  की भूमि है यहां पर खनिज माफियाओं ने यहां की भूमि को इस कदर खोखला कर दिया है कि सिर्फ ढांचा ही रह गया है।  जिसके कई गंभीर परिणाम यहां की जनता को कुछ ही सालों में देखने को मिल जाऐंगे। यहां की जनता पर ईश्वर का आशीर्वाद भी है तभी तो पिछोर से महज कुछ ही दूरी पर भारी मात्रा में पत्थर खदानें और चहुुंओर नदियां है। जिनमें अधिकाधिक मात्रा में रेत पाई जाती है। लेकिन आज रेत माफिया इतने सक्रिय हो गए है कि इन्होंने पिछोर तहसील में आने वाले छोटे से छोटे नाले व बड़ी से बड़ी एक एक भी ऐसी नदी नहीं छोड़ी। 

जहां से अवैध उत्खनन ना होता हो और यह उत्खनन सरेआम किया जा रहा है पर प्रशासन आंख मूंदकर सब चुपचाप देख रहा है। अगर हम पिछोर से 12 किमी के चारों तरफ क्षेत्र में देखें और नदियों पर नजर डालें तो पनडुब्बियां डली हुई दिखेंगी और बड़ी-बड़ी मशीनें जेसीबी पोखरें, नदियां नालों में चलते हुए आसानी से देखी जा सकती है। वहीं रोड किनारे जगह-जगह रेत के भण्डारण के ढेर लगे देखे जा सकते है। जहां से टे्रक्टर  निकलते हुए देखे जा सकते है यह सब चोरी छुपे नहीं होता बल्कि पूरी रंगदारी और धड़ल्ले से नियम कानूनों का माखौल उड़ाते हुए होता है। 

पिदोर के ग्राम नागुली, बनौटा, भौंती व अन्य जगहों पर अगर देखा जाए तो यहां से हजारों डम्फर अवैध रेत निकाली जा रही है। इस अवैध कार्य को यहां के दबंग लोग करते है जिनको किसी का डर नहीं और हर चौकी व थाने के सामने से इनके अवैध रेत से भरे वाहनों को निकाला जाता है जो कि शिवपुरी व अशोकनगर व ईसागढ़ की मंडियों में भेजा जाता है। जिन नदियों की गहराई 5 फिट थी वह आज 30-40फिट नीचे गहरी हो गई है जिससे सबसे बड़ा नुकसान यहां के किसान को झेलना पड़ रहा है। क्योंकि नदियां नालों में गहराई बढऩे से जल स्तर काफी नीचे पहुंच चुका है। अगर इन रेत माफियाओं को समय रहते नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब यहां के संपन्न किसान भूखों मरने की कगार पर पहुंच जाऐंगे। इस रेत के अवैध उत्खन्न को शीघ्र रोके जाने के लिए स्थानीय विधायक ने भी अपने प्रयास तेज कर दिए है और शीघ्र ही इन माफियाओं के विरूद्ध कार्यवाही के लिए शिकायत की जाएगी ताकि रेत के अवैध उत्खन्न को समय रहते रोका जाए।

सरकारी दिखावे बने शोपीस 
म.प्र.सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान कहते है कि हम प्रदेश की जनता के लिए स्वर्णिम प्रदेश बनाऐंगे। महज मंचों से बड़ी-बड़ी घोषणाऐं की जाती है कि मैं एक किसान का बेटा हॅंू, क्या यही स्वर्णिम मध्यप्रदेश है कि जहां पर सुशासन दिवस के नाम पर झूठे संकल्प दिलाए जाते है। कहां है पुलिस विभाग व वन विभाग जिसके सामने से बड़े-बड़े रेत के अवैध उत्खनन से भरे वाहन निकल रहे है और उनकी हिम्मत तक नहीं होती कि इन दबंग रेत माफियाओं पर अंकुश लगाऐं। जिले का खनिज विभाग और पुलिस विभाग तो दबंग राजनेताओं के के यहां की कठपुतली बनकर रह गया है। यहां दबंग रेत माफिया इतने हावी है कि प्रशासन की आंखो के सामने सबकुछ खुलेआम करते है पर प्रशासन का कोईभी नुमाईंदा उन पर लगाम लगाने की जहमत तक नहीं उठा सकता और उठाएगा भी क्यों, जब सोने के महलों में चांदी की जूनियां पहने बैठे है। पैसों की खनक ने इनको अंधा बना दिया है। अब यहां की जनता गुहार करे तो किससे, बस इंतजार में है तो तिल-तिल मरने को, अगर ये सब ऐसे ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब भाजपा का नाम सुनते ही व्यक्ति दौड़कर घर में दुबक जाएगा।  वैसे भी जनता यह तो कहने ही लगी है कि इस सरकार में काम किसी का नहीं रूकता बस लिफाफा साथ होना चाहिए। 

अभी भी वक्त है शिवराज जी अपने अधिकारी वर्ग को सक्रिय कीजिए नहीं तो आपके अधिकारी इसे कुशासन दिवस का रूप देते रहेंगे। खनिज विभाग अगर चाहे तो इन पर लगाम कसकर लाखों रूपये प्रतिदिन शासन की गुल्लक में जमा कर सकता है पर इन्हें अपनी गुल्लक के आगे शासन की गुल्लक फीकी लगती है। अगर यह सब नहीं हो सकता तो यह सब दिखावा करके करोड़ों रूपये का बजट पानी में क्यों बहाया जा रहा है। भाजपामें यह कहावत अधिक चरितार्थ होती है .
अंधेर नगरी चौपट राजा। टके सेर भाजी टके सेर खाजा।।

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