भौतिक संपन्नता के साथ आंतरिक समृद्धि आएगी तब बनेगा भारत विश्व गुरू: स्वामी परमात्मानंद जी

शिवपुरी। एकात्म यात्रा में पधारे देश के प्रख्यात संत और आचार्य महासभा के महासचिव संत स्वामी परमात्मानंद जी महाराज ने आज सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकारवार्ता में बताया कि एकात्म यात्रा का उद्देश्य मनुष्य का सर्वांगीण विकास करना है। उन्होंने कहा कि अकेले भौतिक संपन्नता विकास की कसौटी नहीं है अगर भौतिक संपन्नता ही सब कुछ होती तो आज अमेरिका विश्व गुरू होता। विश्व गुरू होने के लिए आंतरिक समृद्धि आवश्यक है और भारत इस कसौटी पर खरा उतरता है। 

पत्रकारवार्ता में स्वामी परमात्मानंद जी के साथ जनअभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त राघवेन्द्र गौतम और पत्रकार अजय खेमरिया भी उपस्थित थे। श्री खेमरिया ने प्रारंभ में एकात्म यात्रा की पृष्ठ भूमि और स्वामी परमात्मानंद जी महाराज के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

पत्रकारवार्ता में स्वामी जी ने बताया कि सही विकास तभी है जब जातपात, धर्म, भाषा, प्रदेशवाद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र का विकास हो। उन्होंने बताया कि विश्व की 88 प्रतिशत संपत्ति महज 10 प्रतिशत लोगों के हाथों में है और इसे विकास नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में कुछ खास बात है इसलिए लार्ड मैकाले ने भी कहा कि यहां के समाज की व्यवस्था इस तरह की है कि उस पर शासन नहीं किया जा सकता। इन्हीं गुणों के कारण भारत सदियों तक विश्व गुरू रहा है। 

इस गौरव को पुन: प्राप्त करने के लिए आंतरिक समृद्धि आवश्यक है और आंतरिक समृद्धि के लिए हृदय की विशालता पहली शर्त है। उन्होंने कहा कि वसुदेव कुटुम्बकम की भावना इसी संस्कृति में है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में इस बात से इंकार किया कि एकात्म यात्रा राजनैतिक यात्रा है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा धार्मिक यात्रा है और संतगण इसे निकाल रहे हैं, शासन सिर्फ इसे बल प्रदान कर रहा है और लोग राजनीति से ऊपर उठकर एकात्म यात्रा में शामिल हो रहे हैं। यात्रा के जरिये गांव-गांव से मिट्टी संग्रहित की जा रही है। लोगों से कलश लिए जा रहे हैं ताकि कलश को गलाकर स्वामी शंकराचार्य जी की भव्य प्रतिमा का निर्माण किया जा सके। 
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