Tuesday, August 01, 2017

बिनेगा आदिवासी बस्ती में सहरिया क्रांति की बड़ी जीत, पट्टे पाकर खुशी से रो पड़े आदिवासी

शिवपुरी। एक लम्बे संघर्ष के बाद अंततोगत्वा बिनेगा के आदिवासियों को उन्हीं की बस्ती में रहवास का पट्टा मिल गया है। इस पट्टे के लिए आदिवासी समुदाय के आधा सैंकड़ा से अधिक परिवार पिछले काफी समय से संघर्षरत थे। आदिवासियों ने अपनी ही बस्ती में जमीन की यह जंग सहरिया क्रांति के सहयोग से जीती। 

यहाँ बता दें कि बिनेगा ग्राम में आदिवासियों को उनकी ही जमीन से बेदखल करने के प्रयास आश्रम प्रबंधन द्वारा किए जा रहे थे। अपने हक की यह लड़ाई आदिवासियों ने सहरिया क्रांति के बैनर तले शुरू की जिसमें जिला प्रशासन के पूर्व कलेक्टर ओ.पी. श्रीवास्तव, मौजूदा कलेक्टर तरुण राठी, एसपी सुनील पाण्डे ने भी अहम भूमिका निभाई। पिछले दिनों शिवपुरी आईं अनुसूचित जनजाति आयोग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती अनुसुइया उइके ने भी इस आदिवासी बस्ती का दौरा किया और आदिवासियों की अधबनी कुटीरों का जायजा लिया था जिन्हें आश्रम प्रबंधन ने विवादित कर निर्माण को रुकवा दिया था। 

इस मुद्दे को लेकर आदिवासी समुदाय के सैंकड़ों लोगों ने जिला मुख्यालय पर रैली निकाली, प्रदर्शन किया और शिवपुरी से भोपाल तक पैदल मार्च तक की हुंकार भरी जिस पर प्रशासन हरकत में आया और तत्कालीन कलेक्टर ओ.पी. श्रीवास्तव के निर्देश पर प्रशासन ने जब जमीनी हकीकत टटोली और बिनेगा का पीडीए सर्वे संयुक्त रूप से कराया तो आदिवासियों का दस्तावेजी पक्ष मजबूत निकला। बिनेगा आश्रम प्रबंधन का तर्क था कि सामुदायिक पट्टे की भूमि पर आदिवासियों के कुटीर निर्माण को रोका जाए और इन्हें बेदखल किया जाए।

जबकि आश्रम को जो सामुदायिक पट्टा पूर्व कलेक्टर राजीव दुबे द्वारा मुहैया कराया गया उस पर आश्रम प्रबंधन ने चौतरफा घेराबंदी कर उसका निजी उपयोग जारी रखा हुआ है। इस सम्बन्ध में कलेक्टर तरुण राठी को भी आदिवासियों ने ज्ञापन देकर अवगत कराया, इसी बीच अनुसूचित जाति आयोग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने जब मौका मुआयना किया तो उन्हें आदिवासी महिलाओं ने अपनी प्रताडऩा की आप बीती सुनाई जिसे सुन वे भी दंग रह गईं। 

आयोग ने इस बस्ती की ओर रुख कर लगाए गए कैमरों को भी हटाने के निर्देश प्रशासन को दिए थे। एक लम्बी जद्दोजहद के बाद आज आदिवासियों को कलेक्टर के निर्देश पर आदिम जाति कल्याण विभाग के सीओ श्री कुशवाह ने मौके पर पहुंचकर आवासीय पट्टे प्रदान किए। कुल 62 आदिवासी परिवारों को यह पट्टे प्रदान किए गए।

जब आदिवासी परिवारों के मुखियाओं को पट्टे मिले तो सैंकड़ों की तादात में मौजूद सहरिया समुदाय की महिलाओं ने जिला प्रशासन जिंदाबाद, अनुसुइया उइके जिंदाबाद, शिवराज सिंह जिंदाबाद और सहरिया क्रांति जिंदाबाद के नारे लगाए और पट्टे बांटने अधिकारियों को आदिवासियों ने गोद में उठा लिया। महिलाओं ने मंगलगीत गाकर इस घड़ी का स्वागत किया। कई वंचित परिवार तो इस दौरान भावुक होकर रोने लगे।

इन आदिवासियों को मिले पट्टे
आज आदिवसियों में समरत पुत्र बाबू आदिवासी, लायकराम पुत्र खच्चू आदिवासी, रामलखन पुत्र खच्चू आदिवासी, चंदन पुत्र गिरवर आदिवासी, अमर सिंह पुत्र खैरू आदिवासी, सोनू पुत्र जगदीश आदिवासी, इमरतलाल पुत्र दौजी आदिवासी, सजन पुत्र गजराज सिंह आदिवासी, कल्याण पुत्र हक्के आदिवासी, हरी पुत्र रत्ती आदिवासी, धर्मेन्द्र पुत्र हरी आदिवासी, दिलीप पुत्र हरि आदिवासी, लक्ष्मण पुत्र अंगद आदिवासी, सिरनाम पुत्र परीक्षत आदिवासी, औतार पुत्र जसुआ आदिवासी, प्रकाश पुत्र किशन आदिवासी, नवल पुत्र नाथू आदिवासी, रामचरण पुत्र बुद्घु आदिवासी, दुर्गा पुत्र जगराम आदिवासी, अतर सिंह पुत्र दुर्गा आदिवासी, महेश पुत्र मुरारी आदिवासी, माडो पुत्र भोटू आदिवासी, आदेश पुत्र बिरखु आदिवासी, रामदेही पुत्र रतन आदिवासी, दिनेश पुत्र मुरारी आदिवासी, मनोज बाई पुत्र रविकांत आदिवासी, राजू पुत्र बलराम आदिवासी, मुंशी पुत्र माधो, सुनील पुत्र तोरन आदिवासी को पट्टा दिया गया है। इसी प्रकार साहब सिंह पुत्र बाबू आदिवासी, सुगरा पुत्र बाबू आदिवासी, अमर सिंह पुत्र बाबू आदिवासी, हरी पुत्र जादो आदिवासी, खच्चू पुत्र हरिया आदिवासी, गिररू पुत्र दोजी आदिवासी, राजेन्द्र पुत्र गिररू आदिवासी, दाताराम पुत्र बाबूलाल आदिवासी, जगदीश पुत्र हरीराम आदिवासी, दोजी पुत्र खूबी आदिवासी, गोकल पुत्र गोविन्दी आदिवासी, नब्बो पुत्र गजराज आदिवासी, हक्के पुत्र किशन आदिवासी, घनश्याम पुत्र टिल्लू आदिवासी, आशाराम पुत्र टिल्लू आदिवासी, आशाराम पुत्र अंगत आदिवासी, विद्या पत्नि अंगत आदिवासी, सीताराम पुत्र जादो आदिवासी, धारा पुत्र बाबू आदिवासी, रूकमा पत्नि भरोसी आदिवासी, गुड्डी पत्नि नारायण आदिवासी, शीला पत्नि जशराम आदिवासी, कोशा पुत्र मुन्ना आदिवासी, दोजी पुत्र मुरारी आदिवासी, लखुआराम पुत्र देउआ आदिवासी, सुरेश पुत्र लखुआराम, दैउआ, सुरेश पुत्र लखुआ, पार्वती पत्नि करण आदिवासी, सिमन्त्रा पत्नि बलराम आदिवासी, पप्पू पुत्र भुज्जी आदिवासी, रामकली पत्नि घासी आदिवासी, रतनलाल पुत्र किशन आदिवासी को पट्टा दिया गया है।

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