सांसद सिंधिया ने मेनका गाँधी को फिर लिखा मप्र के कुपोषण पर पत्र

भोपाल। गुरुवार २२ जून। सांसद सिंधिया ने मेनका गाँधी को पुनः पत्र लिखाकर मप्र के कुपोषण की समस्या की यथा स्तिथि का जिक्र करते हुए इस इस पर सुधार हेतु आग्रह किया है। उन्होंने लिखा कि मुझे आपका पत्र दिनांक 15 जून को प्राप्त हुआ है। मैं आपका ध्यान मेरे पिछले 4 पत्रों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ, जो मैंने दिनांक 14 सितम्बर 2016, 21 सितम्बर 2016, 18 नवम्बर 2016 एवं 25 जनवरी 2017 को लिखे थे। मेरे पहले पत्र दिनांक 14 सितम्बर 2016 में मैंने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में कुपोषण की भयावह समस्या का उल्लेख किया था|जिसके कारण 2 महीनों में 19 बच्चों की मृत्यु हुई। इस पत्र में मैंने आपसे उच्चस्तरीय केन्द्रीय जांच दल द्वारा जांच कराने का आग्रह किया था, जिसके आधार पर समस्या के शीघ्र निराकरण के साथ दोषी अफसरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा सके।

दिनांक 22 सितम्बर 2016 को सिंधिया ने एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मेनका गाँधी से व्यक्तिगत भेंट के दौरान पुनः एक पत्र दिनांक 21 सितम्बर सौंपा था, जिसमें राज्य प्रशासन की लापरवाही के मद्देनज़र, एक स्वतंत्र, निष्पक्ष जांच के निर्देश देने का अनुरोध किया था। 

सिंधिया ने अपने पत्र में मेनका जी को दिए गए सुझावों का भी जिक्र किया, जैसे की सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रबंधन, संतुलित आहार के पैकेट का वितरण,प्रदेश में व्यापक स्तर पर चल रहे आंगनवाड़ी एवं पोषण आहार घोटालों की जांच, इत्यादि। इस पर मेनका गाँधी ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हूए आश्वस्त किया था कि वे  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगी, केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से एक स्वतंत्र जांच दल भेजेंगी और दोषिओं पर सख्त कार्यवाही करेंगी। किन्तु आश्वासन अनुसार केन्द्रीय जांच दल, सिंधिया द्वार दिए गए सुझावों पर अमल और दोषी अफसरों के खिलाफ कार्यवाही तथा मुख्यमंत्री को मेनका गांधी के पत्र एवं प्रतिक्रिया की कोई सूचना सिंधिया को आज तक प्राप्त नहीं हुई है, जबकि सिंधिया ने इस संबंध में एक स्मरण-पत्र  18 नवम्बर 2016 को लिखा था।

सिंधिया ने फिर दिनांक 25 जनवरी के पत्र द्वारा आपका ध्यान मध्य प्रदेश में कुपोषण की चिंताजनक स्थिति की ओर आकर्षित किया था|जहाँ सितम्बर में 19 बच्चों की मौत के बाद भी कोई कार्यवाही न किये जाने का ही परिणाम था कि मात्र 2 महीनों में कुपोषित बच्चों की संख्या 1740 और बढ़ गयी। अक्टूबर 2016 तक श्योपुर में जहाँ कुपोषित बच्चों की संख्या 22708 थी, वही दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़कर 24448 हो गयी। हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच ने 18 जनवरी को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा था कि कुपोषण के कारण एक भी मौत हुई तो कलेक्टर और महिला एवं बाल विकास अधिकारी पर कार्यवाही होगी मगर इसके उपरांत भी राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा ठीक से कार्यान्वन और निगरानी न किये जाने का ही परिणाम है कि स्थिति बद से बद्दतर होती जा रही है। उल्लेखनीय है कि सिंधिया के उपरोक्त पत्र का उत्तर अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।

सिंधिया ने खेद के साथ कहा कि मेरे उपरोक्त पत्रों और आपसे व्यक्तिगत वार्तालाप के 9 महीनों बाद भी परिस्थितियों में रत्तीभर भी सुधार नहीं आया है तथा कुपोषण के कारण दिन प्रतिदिन मासूम बच्चों की जानें जा रही है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ 2016 में 6 साल से कम उम्र के 25440 बच्चों ने अपनी जाने गंवाई (64बच्चे प्रतिदिन), हालांकि राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इनमें से मात्र 116 मौतें की कुपोषण के कारण हुई,वहीं दूसरी ओर राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री ने दावा किया है कि इनमें से एक भी मौत कुपोषण के कारण नहीं हुई। अभी तक, राज्य सरकार द्वारा इस स्थिति में सुधार हेतु ज़मीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गयी। हालांकि राज्य स्तर के अधिकारियों के एक दल ने ज़रूर एक दिन जिले का दौरा किया था, मगर उसके बाद भी स्थिति जस की तस है।

सिंधिया ने  मेनका जी से पुनः अनुरोध है कि मध्य प्रदेश में कुपोषण की इस गंभीर स्थिति को महाबीमारी का संकट समझकर, इसके समाधान हेतु शीघ्र-अतिशीघ्र केन्द्रीय जांच दल भेजकर इसकी जांच करवाये तथा उचित निर्देश जारी करें। उन्होंने यह भी निवेदन है किया कि मध्य प्रदेश में एकीकृत बाल विकास सेवाएं योजना के बेहतर कार्यान्वन हेतु मेनका गाँधी तुरंत हस्तक्षेत करें। सिंधिया ने उम्मीद की है कि विषय की गंभीरता को समझते हुए मेनका गाँधी इस पर प्राथमिकता से गौर करेंगी और की गयी कार्यवाही से सिंधिया को अवगत करवाएंगी।
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