मीडिया का धरना पार्ट-2 शुरू: सम्मान की लड़ाई या कुछ और

ललित मुदगल/शिवपुरी। अभी 48 घटें पूर्व संयुक्त पत्रकार मोर्चा के बैनर तले चल रहा पत्रकारों का धरना खत्म होने की खबर आई थी। पत्रकार एकता जिंदाबाद के नारे चल रहे थे, तभी एक खबर यह आने लगी कि कुछ पत्रकार इस धरने की लड़ाई से संतुष्ट नही थे, उनका मानना था कि अभी पत्रकारो का सम्मान नही मिला आगे और भी लड़ाई लडऩी चाहिए। इसी के साथ शिवपुरी के पत्रकारों का धरना पार्ट-2 शुरू हो चुका है। 

हम पाठकों को फिर यह जानकारी दे कि शिवपुरी की प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या की कथित तानाशाही के चलते शिवपुरी की मीडिया ने प्रभारी कलेक्टर और उनके कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया है। इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ हो कि शिवपुरी की मीडिया ने गणतंत्र दिवस के मुख्य कार्यक्रम का बहिष्कार किया हो। 

शिवपुरी की मीडिया प्रभारी कलेक्टर की कार्यप्रणाली के खिलाफ धरने पर बैठ गई। यह धरना लगातार 5 दिन चला। ग्वालियर कमिश्नर रूपला द्वारा भेजे गए दल के आग्रह पर यह धरना खत्म हुआ। धरना स्थल पर शिवपुरी के प्रशासन के सामने ही प्रभारी कलेक्टर का निंदा प्रस्ताव पारित किया गया और यह घोषणा की गई कि हमारी लड़ाइ अभी खत्म नही हुई है और जब प्रभारी कलेक्टर को हटाया नहीं जाता, सभी कार्यक्रमों का बहिष्कार जारी रहेगा और खबरे प्रकाशित नही की जाऐगीं। 

लेकिन इतना होने के बाद एक धीरे से एक आवाज आई कि यह लड़ाई बिना सम्मान के खत्म कर दी गई है। इस सम्मान को पुन: पाने के लिए शिवपुरी के कुछ पत्रकारो ने पुन: धरना शुरू कर दिया है। धरने स्थल पर किसी भी सगंठन का बैनर नही है क्या मागें है, अभी तक पता नही है। कैसा सम्मान चाहिए मिडिया को, जानकारी अभी तक नही आई है। 

इस मामले में अपने राम का कहना है कि धरना समाप्त होने वाले समय में शिवपुरी के कुछ पत्रकार नही थे। शायद उनके चेहरो की हैप्पी ऐडिंग नही हो सकी, या यूं कह लो कि चेहरा दिखाई नही हो सकी, इस कारण इस धरने को शहर के कुछ पत्रकारो ने हवा दी है। 

बताया यह भी जा रहा है कि इस धरने पर शरीरिक रूप से बैठा कोई है और इस धरने की आयोजन को रचने वाला और कोई है। धरने से ही यह खबर आ रही है कि प्रभारी कलेक्टर से धरना देने वाले पत्रकारो की मीटिंग हो सकती है, लेकिन यहां एक बात का उल्लेख अवश्य होगा, पत्रकारों से मीटिग़ की बात तो पूर्व में भी हुई लेकिन सयुक्त मोर्चा माफी पर अड़ा था।

प्रभारी कलेक्टर से बातचीत न ही कलेक्ट्रेट में होगी और न ही जिला पंचायत के ऑफिस में बात-चीत इसके अतिरिक्त की भी हो सकती थी। इस जिद पर भी सयुक्त मोर्चा अडा था। मेडम तो अपने ऑफिस में बातचीत के लिए पत्रकारो को शुरू से ही आमत्रिंत कर रही थी। 

अब देखना यह है कि धरना पार्ट-2 के कार्यकर्ता क्या करते है। मैडम को कहां तक झुका पाते है यहा स्वयं झुक कर मैडम के ऑफिस तक चल कर जाते है। अपने चेहरो को प्रशासन में कितना चमका पाते है। अब मीडिया में आपस में जमकर घमासान तय लग रहा है। 
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