मकर संक्राति: हाडकंपा देने वाली ठंड में वाणगंगा पर होगा पर्व स्नान

शिवपुरी। कल मकर संक्राति के अवसर पर प्राचीन पर्र्यटक स्थल वाणगंगा पर श्रद्धालुओं का विशाल मेला लगेगा जिसमें शिवपुरी के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग बड़ी सं या में उपस्थित होकर वाणगंगा के कुण्डों में स्नान करेंगे।

मकर संक्रांति पर वाणगंगा के कुण्डों में स्नान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर साल भर जो जातियां स्नान नहीं करती वे भी मकर संक्रांति पर वाणगंगा के कुण्डों में स्नान करती है। सुबह 4 बजे से लेकर देर रात तक वाणगंगा में स्नान करने वालों का तांता लगा रहेगा। 

शिवपुरी से तीन किमी दूर वाणगंगा एक प्राचीन पर्यटक स्थल है यहां 52 कुण्ड बने हुए हैं। किवदंती है कि अज्ञात वास के समय पांडवों ने यहां विश्राम किया था और बड़े भाई युद्धिष्ठिर को प्यास लगने पर अर्जुन ने अपने गांडीव से जमीन में प्रहार कर पानी की धारा निकाली थी। बाद में इस स्थल पर पांडवों ने 52 कुण्डों का निर्माण किया। 

पूरे परिसर में 52 कुण्ड बने हुए हैं, लेकिन समय की धारा के साथ-साथ इनमें से कुछ कुण्ड विलुप्त हो गए हैं जबकि कुछ कुण्डों में पेड़ों का कचरा आदि प्रवाहित होता रहता है। जिससे इनका जल प्रदूषित हो गया है, लेकिन वाणगंगा के मु य कुण्ड में बारह माह पानी रहता है और इस कुण्ड में काफी साफ स्वच्छ जल विधमान रहता है। 

हालांकि कुछ वर्षो पूर्व इसका जल भी प्रदूषित हो गया था, लेकिन बाद में जिला प्रशासन ने कुण्ड की सफाई कर इसके जल को स्वच्छ बनाया था। मकर संक्राति के अवसर पर वाणगंगा के मु य कुण्ड में स्नान का अपना विशेष महत्व है। इस पर्व पर सुबह 4 बजे से ही स्नान का सिलसिला शुरू हो जाता है। 

यहां स्नान करने के  लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु सुबह-सुबह अपनी बैलगाड़ी लेकर आते हैं और अपने परिवार सहित इस कुण्ड में स्नान करते हैं। लोहापीटा जाति के लोग जिनके बारे में कहा जाता है कि वह पूरे वर्ष भर स्नान नहीं करते वे भी मकर संक्राति पर स्नान करने के लिए वाणगंगा आते हैं। 

शहर के धार्मिक श्रद्धालु भी मकर संक्राति के अवसर पर स्नान के लिए वाणगंगा आना नहीं भूलते हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण यहां ग्रामीण परिवेश का छोटा मोटा मेला लग जाता है। जिसमें झूले, खेल तमाशे और खाने पीने की वस्तुओं की दुकानें रहती है।  

श्रद्धालु स्नान कर दान करना नहीं भूलते
मकर संक्राति के पर्व में स्नान और दान का महत्व है। बिना स्नान और दान के यह पर्व मनाना अधूरा माना जाता है। इसी कारण वाणगंगा के कुण्ड में स्नान कर श्रद्धालु अपनी-अपनी सामर्थ अनुसार दान धर्म भी करते हैं। यहां श्रद्धालु खिचड़ी, लड्डू और वर्फी आदि का वितरण कराते हैं वहीं भिखारियों को दान भी देते हैं। इस कारण यहां भिखारियों की बहुत बड़ी सं या रहती है। समाजसेवी लोग मकर संक्रांति के पर्व पर गर्म कपड़ों जैसे स्वेटर, क बल और जर्र्सी भी  जरूरतमंद  लोगों को देते हैं। 
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