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सन 2018 कई राजनेताओ की कुंडली पर ग्रहण मार गया तो कईयो को राजयोग | SHIVPURI NEWS

राजकुमार शर्मा शिवपुरी। सन 2018 भाजपा के दर्दनीय साल रहेगा। हिन्दी भाषी प्रदेशो में जमी सत्ता बदल गई।शिवपुरी में भी सन 2018 कई नेताओ की कुंडली में ग्रहण मार गया तो कई नेताओ को जमीन से उठाकर आसमान में चमका दिया।

राजनीतिक जीवन का सबसे सुनहरा हो सकता राजे के लिए साल 2018 

शिवपुरी विधायक ओर पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधियाक लिए पूरे राजनीतिक जीवन का अब तक का सबसे सुनहरा साल साबित हुआ है सन 2018,इस साल हुए विधानसभा चुनावो में यशोधरा राजे सिंधिया ने अपनी राजनीतिक जीवन की सबसे बडी 28 हजारी जीत मिली है। जहां भाजपा के कई मंत्री इस विधानसभा में धरासाई हुए हैं राजे ने विपरित परिस्थित्यिो में इतनी बडी जीत हाासलि की है। इस जीत से यशोधरा राजे सिंधियां को सर्वमान्य नेता के रूप में उभरी हैं,और यह साबित हुआ है कि शिवपुरी विधानसभा सीट पर भाजपा का नही यशोधरा राजे सिंधिया का कब्जा हैं। 

महेन्द्र यादव नहीं भुला पायेंगे बीता साल 

वर्ष 2018 शुरू आत से महेन्द्र यादव के लिए खुशी तथा गम लेकर आया था जिसके तहत उनके पिता पूर्व विधायक कोलारस का आकस्मिक निधन हो गया वहीं उनके स्थान पर कांग्रेस ने उनके पुत्र महेन्द्र यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया। कोलारस विधानसभा क्षेत्र में संपन्न हुए उप चुनाव में महेन्द्र यादव ने अच्छे खासे मतों से परास्त किया और विजयीश्री हांसिल की। वहीं वर्ष 2018 में विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे।  लेकिन जाते-जाते वर्ष 2018 उन्हें गम देकर चला गया। वर्ष 2018 को महेन्द्र यादव हमेशा याद रखेंगे। जिसके तहत वे विधायक चुने गए और पराजित हो गए।

वीरेन्द्र, जसवंत, सुरेश को दिलावाया सन 2018 ने राजयोग 

नवम्बर 2018 में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में वर्र्षों से संघर्ष कर रहे राजनेताओं को हमेशा याद रहेगा। किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुरेश राठखेड़ा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जसवंत जाटव, पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में अपने-अपने दलों के लिए कार्य कर रहे थे। कांग्रेस नेता सुरेश राठखेड़ा व जसवंत जाटव ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि वे अपने क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हो पायेंगे,इसके लिए वह अनवरत रूप से संघर्ष कर रहे थे लेकिन उन्हें विधानसभा तक पहुंचने का मौका नहीं मिल पा रहा था। वर्ष 2018 में संपन्न हुए चुनावों में जैसे ही उन्हें राजनैतिक दलों ने मौका दिया तो उपरोक्त राजनेताओं ने विजयीश्री हांसिल कर विधानसभा तक पहुंचने में सफलता हांसिल की हैं। जो उन्हें हमेशा ही यादगार रहेगा। 


पूर्व विधायक भारती और शकुंतला को दर्द दे गया बीता वर्ष

जिले की पोहरी विधानसभा क्षेत्र विधायक प्रहलाद भारती व करैरा विधायक शकुंतला खटीक को बीता वर्ष शुभ नहीं रहा। विगत 10 वर्षों से पोहरी से विधायक रहे प्रहलाद भारती को गत विधानसभा चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा वहीं करैरा विधायक शकुंतला खटीक को कांग्रेस पार्टी ने जिताऊ उम्मीदवार न समझते हुए वहां से नए प्रत्याशी जसवंत जाटव पर अपना विश्वास जताते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया। जिन्होंने पार्टी उम्मीदों को बरकरार रखते हुए विजयीश्री हांसिल की लेकिन वर्ष 2018 जाते-जाते शकुंतला और प्रहलाद भारती गम दे गया।   

कैलाश कुशवाह को पहचान दे गया साल 2018

पोहरी विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडे कैलाश कुशवाह इस चुनाव में जीत नही सके,लेकिन पहचान अवश्य दे गया। कैलाश कुशवाह को इस चुनाव में 50 हजार से अधिक मत प्राप्त किए है। इस प्रर्दशन के कारण कैलाश कुशवाह का भविष्य बसपा में उज्जवल होता दिख रहा हैं,जानकारी आ रही है कि कैलाश कुशवाह को बसपा ग्वालियर लोकसभा टिकिट दे सकती है।

भटकते रहे कुछ राजनेता

जिले की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से उम्मीदवार बनाए जाने की उम्मीद सजोये हुए कुछ राजनेता अपनी समूची राजनैतिक ताकत का उपयोग करने के बावजूद भी टिकिट हांसिल करने में ना कामयाब रहे। जिसमें कोलारस के पूर्व विधायक ओमप्रकाश खटीक, देवेन्द्र जैन, हरिवल्लभ शुक्ला, नरेन्द्र बिरथरे, राकेश गुप्ता, दिलीप मुदगल, आलोक बिंदल, जैसे कई नेता दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलों में अपनी-अपनी पहुंच का प्रयोग कर टिकिट हांसिल करने जुगत लगे रहे। लेकिन अंत तक उन्हें कुछ भी हाथ नहीं लगा। 

लेकिन पार्टी द्वारा राजनेताओं को तबज्जो न दिए जाने पर कुछ ने तो बगावती तेवर अपनाते हुए गत विधानसभा चुनाव में निर्दलीय तथा बसपा जैसी पार्टियों से हाथ मिलाकर राजनैतिक दलों के समीकरण ही बिगाड़ कर रख दिए, जिनमें करैरा के पूर्व विधायक रमेश प्रसाद खटीक एवं पोहरी से बसपा के उम्मीदवार कैलाश कुशवाह जो पूर्व में भाजपा से मंडी उपाध्यक्ष के पद तक पहुंचे थे।