जब विवेक की आंख खुलेगी तभी भगवत साक्षात्कार होगा: साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी

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शिवपुरी। गांधी पार्क में चल रही संगीतमय में श्रीराम कथा में साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी ने श्रीराम कथा का वाचन करते हुए कहा कि भगवान को हम नहीं देख पा रहे हैं, हम उसकी कृपा की अनुभूति नहीं कर पा रहे हैं तो कहीं न कहीं दृष्टि में दोष है। बाहर की आंख से संसार नजर आता है और भीतर की आंख से भगवान नजर आते हैं। भीतर से साधना का प्रारंभ होगा तभी हृदय की, विवेक की आंख खुलेगी और जब विवेक की आंख खुलेगी तभी भगवत साक्षात्कार होगा। कहीं से भगवान को लाया नहीं जाता, जिस क्षण जीव के हृदय में प्रेम प्रकट हो जाए भगवान उसी क्षण प्रकट हो जाते हैं। 

ये प्रेम प्रकट होने के नौ साधन हैं। साध्वी जी ने दास शब्द का महत्व बताते हुए कहा कि जिस समय जीव को गुरू शरणागति होती है उस समय उसे सिखाया जाता है कि आज से तुम भगवान के दास हो गए और नामकरण किया जाता है तब दास आदि शब्द जोड़ा जाता है। 

जीवन में कई बार शब्दों का प्रयोग व्यक्ति कर लेता है, पर आचरण में नहीं आता है। भगवान कहते हैं कि दास वह जिसने मुझे छोड़कर किसी और की आशा नहीं की। साध्वी जी ने कहा कि मेरा दास बन गया और मनुष्योंं से आशा रखता है, कि ये मेरे लिए यह सुख दे देगा है, ये मेरे के लिए आनंद दे देगा यह सबसे बड़ी भूल है भगवान कहते हैं।

अगर आज भी कहीं दुनिया में भगवान का दास बनने के बाद भी आशा लगी है पुत्र से, पति, संसार में किसी से भी आशा लगी है कि ये मेरे लिए सुख कर देगा तो उसका दासत्य सच्चा नहीं है। यहां बताना होगा कि कथा प्रतिदिन दोपहर साढे 12 बजे से प्रारंभ होकर शाम 5 बजे तक चल रही है। ट्रस्ट से जुड़े अशोक तिवारी, कपिल सहगल, राजेश गुप्ता ने सभी धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वह अधिक से अधिक संख्या में श्रीराम कथा में पहुंचकर धर्म लाभ लें। 
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