58 की उम्र में विदेशी दंपत्ति ने थामा एक-दूसरे का हाथ: बच्चे बने बराती

shailendra gupta
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शिवपुरी। बेल्जियम में रहने वाले 58 वर्षीय पीटर भारतीय संस्कृति से इतने प्रभावित हुए कि उन्होने लिव इन रिलेशन कि जगह विवाह का फैसला किया। इसके बाद शुक्रवार को उन्होने भारतीय पद्धत्ति से वर्षो से खुद के साथ रह रही विदेशी महिला इनके फरवाओ के साथ कोलारस के पड़ोरा गुरद्वारे में सिख धर्म के अनुसार विवाह किया। इस शादी कार्यक्रम में दंपत्ति के दोनो बच्चें बेटा थॉमस व बेटी इसाबेल बराती बने।

पिछले कई वर्षों से बेल्जियूम में रहने वाले जगदीश ग्रेवाल की पीटर से कई वर्षों पुराणी दोस्ती है. ग्रेवाल परिवार ने ही पीटर को शिख धर्म के प्रति प्रेरित किया। ग्रेवाल परिवार की तीन पीडी एक साथ बेल्जियम के हॉसल शहर मे रह रही हें अपनी धार्मिक आस्थाओं  कि वजह से यह परिवार आज भी एक साथ हे और अपने धर्म और हिंदुस्तान को नहीं भूले हैं। 

इस बात से प्रभावित हो कर पीटर ने अपने मित्र जगदीश से सिख धर्म के अनुसार विवाह करने का फैसला किया और वो भी हिंदुस्तान में। इसके बाद पीटर जो बेल्जियम में एक गैस कंपनी के संचालक है। वहीं उनकी पत्नी इनके फरवाओ टेलीकाम सेक्टर में डायरेक्टर है। दोनो अपने  दर्जन भर रिश्तेदारों के साथ भारत आये हें। पीटर और उनकी पत्नी चाहते हें कि उनके बच्चे भी हिंदुस्तानी तरीके से विवाह करे न कि लिव इन रिलेशन में रहे। पीटर का कहना है कि जब तक बे हिंदुस्तान और हिंदुस्तानी लोगों के संपर्क में नहीं थे तब तक पश्चिम का लिव इन रिलेशन अच्छा था। पर जब से उन्होंने भारतीय धर्म को जाना तब महसूस हुआ कि विवाह बंधन उचित हे और वो चाहते हें उबके बच्चे भी इसी परपरा को आगे निभाएं। इस शादी कार्यक्रम में पडोरा गुरूद्वारा के प्रबंधक बाबा हाकिम सिंह मु य रूप से मौजूद रहें।

जिले में ऐसा पहला मामला

लिव इन रिलेशन शिप के बाद वृद्ध अवस्था में किसी विदेशी दंपत्ति का शादी का यह मामला पहला है। इससे पूर्व जिले भर में कहीं भी ऐसा मामला देखने को नहीं मिला। जानकारों की मानें तो भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत होकर इस दंपत्ति ने अपने बच्चों की शादी की बजाए खुद अपनी शादी भारतीय संस्कृति के मुताबिक की और आगे वे अपने बच्चों की शादी भी भारतीय परंपरा के अनुसार चाहते है। शादी का यह मामला पडोरा सहित जिले भर में चर्चा का विषय बन गई है वहीं लोग भारतीय संस्कृति को विश्व की सबसे अच्छी संस्कृति के रूप में मान रहे है।

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